रविवार, 14 दिसंबर 2014

कहां चला चौथा खंभा?



राज और समाज पर खरी आवाज


मीडिया स्वतंत्र या स्वच्छंद?

कहां चला चौथा खंभा?
कल बीबीसी उर्दू सेवा के पत्रकार का एक लेख ब्लॉग पर डाला था। लोगों ने (ख़बर पैदा करने का सही तरीक़ा) पढ़ा और उनके कमेंट भी आए। इधर बीच कुछ समय से लगातार मीडिया की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह उठने लगे हैं। गुजरात दंगों से लेकर मुंबई हमले और ऐसे ही कई मामलों में। अखबारों में तो फिर भी गनीमत है लेकिन कुछ चैनल ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में सारी हदें ब्रेक करते जा रहे हैं। मुंबई हमले की बात के बाद कुछ गाइडलाइंस बनी। मीडिया स्वतंत्र होनी चाहिए इसमें कोई दो राय नहीं। पत्रकारिता के विद्यार्थी और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखने के कारण मैं भी मीडिया पर किसी दबाव और प्रतिबंध का विरोधी हूं लेकिन मुझे लगता है कि हमें स्वतंत्रता और स्वच्छन्दता का भेद जरूर याद रखना चाहिए।
आखिर इससे क्या होगा?
फिलहाल मैं जिस खबर के बारे में बात करूंगा वह है वरुण गांधी के भड़काऊ भाषण की। चुनाव आयोग के पास दर्ज शिकायत और खबरों के अनुसार वरुण ने पीलीभीत में मार्च के पहले हफ्ते में धर्म विशेष के खिलाफ भाषण दिया। वरुण को ऐसी बात नहीं बोलनी चाहिए थी और अगर बोली है तो उन्हें कानूनन उचित सजा मिलनी चाहिए। वरुण के भड़काऊ भाषण से न तो पीलीभीत के उस कस्बे में न ही जिले में और न ही उप्र में किसी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव हुआ। लेकिन बीच कुछ चैनलों ने वरुण के आपत्तिजनक टैपों को रोज दर्जनों बार दिखाया। खास बात यह कि टैप दिखाने के पहले वो यह भी कह रहे थे, 'आइए आप को सुनाते हैं वरुण गांधी का वह जहरीला भाषण जो उन्होंने.......'आप जिस टैप को खुद जहरीला कह रहे हैं उसे बार-बार क्यों दिखा रहे हैं? ने बताया कि इसलिए दिखा रहे हैं ताकि मतदाता जागरुक हों। मतदाता इससे जागरुक होगा या द्वेष फैलेगा?
यह कैसी पत्रकारिता?
वरुण ने जो जहर एक, दो या तीन बार उगला उसे हमारे निरपेक्ष चैनलों ने सैकड़ों बार उगला। आखिर क्यों? वरुण ने गलत किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए न कि उस जहर को वहां तक पहुंचाना चाहिए जहां नहीं पहुंचा है। तकलीफ तब होती है जब उन्हें ऐसी खबरें बताते-सुनाते देखना पड़ता है जिन्हें देखकर पत्रकारिता के क्षेत्र में आया। वरुण और राज ठाकरे जैसे लोगों को कौन बना रहा है? कौन करता है इन्हें महिमा मंडिता। जो व्यक्ति सिंगल कॉलम, या चंद सेंकेंड की खबर का भी हकदार नहीं उसे लीड छाप रहे हैं और उसपर प्राइम टाइम में बहस चला रहे हैं। क्या मेरे जैसा प्रशिक्षु इसे ही पत्रकारिता समझे?
इनके रास्ते पर कोई नहीं
सच तो यह है कि आज का युवा और समाज ऐसे लोगों को न तो महत्व देता है और न ही उनके भड़कावे पर कुछ करता है। राज के साथ कुछ लोग हैं पूरा मुंबई नहीं वैसे ही वरुण के साथ भी कुछ ही लोग हैं। देश का युवा न तो इनसे प्रभावित है और न ही इनके रास्ते पर चलना चाहता है।
मीडिया ने गायब किए मुद्दे!
इस चुनाव में कोई राष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। आतंकवाद, भ्रष्टाचार, महंगाई, मंदी, बेरोजगारी जैसे मुद्दे राजनीतिक दलों को कितना याद है यह तो पता नहीं लेकिन चैनलों को बिल्कुल याद नहीं। घंटों इस बात पर लाइव टॉकशो होता है कि कौन कमजोर, कौन गुलाम लेकिन इन मुद्दों पर न तो नेता कुछ बोलते हैं न चैनल कुछ पूछते हैं। कहा जाता है कि जनता जो चाहती है हम वह देते हैं। तो भइया जनता को इस बात से मतलब है कि उसकी नौकरी चली गई है। सुबह की चाय से रात के चावल तक सब महंगे हो गए हैं। क्या खाए, क्या बचाए? घर से निकलता है तो पता नहीं रात को लौटेगा या नहीं? नर्सरी में एडमिशन से लेकर टॉप लेवल नौकरियों तक पैसे का बोलबाला है। यह मुद्दे कौन उठाएगा।
इसको भी हवा कर दिया
इस चुनाव का एक सबसे बड़ा मुद्दा भाजपा के पीएम इन वेटिंग ने उठाया। स्विस बैंकों में जमा काले धन का। हो सकता है उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए उठाया हो? यह मामला पहले भी उठा है लेकिन इतने व्यापक पैमाने पर पहली बार किसी ने यह मसला उठाया है लेकिन हमारे चैनलों से यह मुद्दा गयाब है। बुढिय़ा/गुडिय़ा और कांधार/गुजरात में फंसी मीडिया इस मसले पर चुप है। हमेशा स्टिंग ऑपरेशन करने वाले इस मसले पर क्यों नहीं खोजी पत्रकारिता का कमाल दिखाते हैं? देश को यह सच कौन बताएगा? नेताओं से यह सच कौन उगलवाएगा? उम्मीद मीडिया से है लेकिन............व्यावसायिक प्रतिबद्धता अगर मजबूरी है तो पेशेगत नैतिकता उससे ज्यादा जरूरी है।

6 टिप्‍पणियां:

  1. यह उम्मीद करनी बेकार है। जब सभी कुछ अर्थ पर टिका हो तो कौन किसी की टाँग खीचेगा ?
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  2. स्थिति बद से बदतर ही होती जानी है ! यह अर्थतंत्र है !
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  3. हालाँकि मेरा सुझाव कुछ अटपटा सा लग सकता है ,लेकिन हम वाकई चौथे खंबे की विश्वसनीयता को लेकर चिंतित हैं तो इस पर काम किया जा सकता है । क्या कुछ समर्पित और ईमानदार लोग मिलकर एक अखबार खड़ा नहीं कर सकते जो सच्चे पत्रकारों को मौका भी दे और समाज का सच भी सामने लाये ।
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  4. ab kiski mmane?kiski sunen?
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  5. http://hinduonline.blogspot.com/

    Before the grand lanch function of "Bharat Swabhiman Mission"
    Baba Ramdev seems to be genueinly interested
    in the betterment of desh, dharam, rajniti
    and i used to watch him on Aastha channel regularly

    But right from the lanch function of "Bharat Swabhiman Mission"
    where Babaji had invited a Shia Muslim maulaavi
    and introduced him as his darling brother
    speeches of Babaji has lost its sharpness
    for the protection of desh, dharam, rajniti

    Maybe its the price one has to pay
    to garner support of all residing in india
    and whether they are muslim
    it does not matter

    As a common hindu
    what more could i have done but
    only stopped actively watching Babaji
    from that lanch function
    though i still regard Babaji
    as a great yoga master
    and for his oratory skills

    But, now in the present controvercy
    of Devband fatva against Vande Mataram
    attended by Babaji and home minister
    hindus should protest and show their displeasure
    to both Babaji and home minister
    for agreeing to be a part of function
    working against the spirit of Bharat
    and consolidating/ fanning the Jihadi movement

    As politicians support Jihadis
    for capturing muslim vote bank
    is Babaji trying to capture
    muslim and sickular followers
    by agreeing to attend Jihadi function
    and not speacking out against
    the fatva then and there
    not even 2 days after that

    all this when Babaji is
    the most outspoken hindu guru
    who is more than ready to
    give sound bytes on each and every
    topic including yoga
    and never take any nonsense
    laying down from any celebrited reporters/ editors

    is it that like all other leaders
    whether they are politicians or not
    they are always supporting Jihadis
    at the cost of hindus
    and like them Babaji too
    wants to capture muslim and sickular followers
    and / or
    even Babaji fears from Jihadis

    O Hindus come out of your hibrenation
    how long you want to wait
    for things to get worse
    before trying for their recovery

    its easy to get charged up against Jihadis
    but path to recovery goes first
    by winning over the sickular hindus

    O Hindus, this is the time
    to lanch campainge against
    all sickular hindus
    in the form of Babaji
    and dont wait for RSS/ BJP/ VHP
    dont look forward for their orders
    listen to your heart/ mind

    Babaji has a reputation
    of coming out sucessfully
    from every controvery in the past
    which where lanched by sickulars
    but this time
    if common hindus campainge
    against his sickular tendencies
    at least he has to say sorry
    for his moments of weakness

    i appeal all PRO-HINDU bloggers
    to write-up on this topic from their heart
    so that greater clearity and publicity to
    hindu's view emerage in media

    also remember that
    blogging alone cannot provide
    answers to worldly problems.


    http://hinduonline.blogspot.com/2009/11/original-post-no-4-o-hindus-come-out-of.html


    .
    उत्तर दें
  6. hello blogger friend,

    for so long you didnot post on your blog.

    is everything alright?

    looking forward to your posts.

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