मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

आईना -/ पूनम झा

 आईना

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शाम की चाय की चुस्की लेते पत्नी ने पति से --" अजी क्या बात है काफी दिनों से आपके जिगरी दोस्त विवेक जी नहीं आये हैं  ? "

पति ने अनसुनी कर दी पर पत्नी मानने वाली कहाँ थी  ।  फिर से  पूछ बैठी ।

तब  पति ----  " वो काफी दिनों से मुझे कहता था कि मैं तुम्हारी तरह दोस्त नहीं हूँ कि सबकी बातों में हाँ में हाँ मिला दूं । मैं तो सबको आईना दिखा कर सुधार देता हूँ  ।  सच्चा दोस्त वही होता है जो कमियाँ दिखा कर उसे सुधार दे  । "

" मुझे बहुत अफसोस होने लगा कि मैं अच्छा दोस्त नहीं हूँ  । फिर एक दिन मैंने भी अपनी दोस्ती धर्म निभाई और उसका आईना उसकी तरफ घुमा दी बस तभी से । "

पूनम झा

कोटा राजस्थान

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