शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

दिल्ली के सबसे खास 10 क्रिश्चन कौन / विवेक शुक्ला

दिल्ली के सबसे खास 10 क्रिश्चन कौन


राजधानी की दस सबसे खास क्रिश्चन शखिसयतों की आज बात करेंगे। बेशक, इस सूची में पहला नाम प्रखर मानवाधिकारवादी जॉन दयाल का आएगा। जहां पर गरीब-गुरुबा के हकों के लिए संघर्ष होगा वहां पर जॉन दयाल जरूर होंगे। वे दलित ईसाइयों के हकों के लिए दशकों से लड़ रहे हैं। सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्र रहे दयाल साहब कहते हैं कि दलित हिन्दू को अपशब्द कहने पर जेल हो सकती है तो दलित ईसाई के साथ ज्यादती करने वालों को क्यों रियायत मिले। आमतौर पर हिन्दी बोलने वाले दयाल साहब की अंग्रेजी के तमाम लोग कद्रदान हैं।


हरीश साल्वे ( वकालत)


 हरीश साल्वे को इस समय देश का सर्वश्रेष्ठ और सबसे महंगा वकील माना जाता है।  गुजरे करीब चालीस सालों से दिल्ली में रह रहे साल्वे भारत सरकार से लेकर रिलायंस और टाटा ग्रुप के लिए पैरवी कर चुके हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एन.के.पी.साल्वे के पुत्र हरीश का भगवान दास रोड के व्हाइट हाउस में दफ्तर है। उनकी खासियत ये है कि वे हर केस को जीतने के लिए इतनी मेहनत करते हैं मानो कि वे केस हार गए तो दुनिया इधर से उधर हो जाएगी।उन्हेंआप कभी-खभी खान मार्केट में भी देख सकते हैं। हरीश साल्वे ने सोली सोराबजी की देखरेख में 1976 में लॉ की प्रेक्टिस शुरू की थी।


ब्रायन सिलास (संगीत)


 ब्रायन सिलास की जब पियानों के की-बोर्ड पर उंगलियां थिरकती हैं, तो सुनने वाले वाह कह उठते हैं। एक जमाने में अप्पू घर में नौकरी करने वाले ब्रायन ने कोविड से पहले साउथ दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जब पियानों पर सुपरहिट गीतों जैसे कुछ न कहो, कुछ भी न कहो… लग जा गले से… याद न जाए…वगैरह की धुन बजाई तो दर्शक झूमने लगे।ब्रायन की उंगलियां लता मंगेश्कर के गीत- मन डोले मेरा तन डोले…गीत के साथ थमीं। उन्होंने फिल्मी गीतों को पियानो पर इस तरह से साधा है कि लगता ही नहीं कि पियानो एक वेस्टर्न वाद्ययंत्र है। ब्रायन की ख्वाहिश है कि वे दिल्ली में एक संगीत का स्कूल खोलें। ब्रायन का संगीत से साक्षात्कार उनके माता-पिता ने कानपुर में करवाया था। वे चर्च में होने वाले संगीत कार्यक्रमों में भाग लेते थे।


ए.जे.फिलिप ( समाज सेवा)


ए.जे.फिलिप लेखक और शिक्षाविद् हैं।  उन्होंने अपने साथियों के साथ दीपालय स्कूल, कालका जी एक्सटेंशन में एक असाधारण स्कूल खोला है। दीपालय की बिल्डिंग और सुविधाएं किसी भी मशहूर स्कूल से उन्नीस नहीं है। दीपालय में आसपास की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को दाखिला प्राथमिकता के आधार पर मिलता है। ये संभव होता है फिलिप जी, उनकी टीम और दानवीरों के कारण। आपको निर्धन परिवारों के बच्चों के लिए इतना शानदार स्कूल शायद ही कहीं मिले।  अगर बात दीपालय से हटकर करें तो फिलिप जी रक्षा और विदेश मामलों के गहन जानकार हैं।


दिलीप चेरियन( पब्लिक रिलेशंस)


दिलीप चेरियन की क्रिमसम पार्टी के क्या कहने। उसमें दिल्ली के असरदार और मशहूर चेहरे शामिल होते हैं। वहां पर लजीज डिशेज तो परोसी जाती हीहै। दिलीप चेरियन मीडिया और पीआर कंसलटेंट हैं। वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के स्टुडेंट रहे हैं। बेशक, वे भारत में मीडिया पीआर एजेंसी की दुनिया के पुराण पुरुष हैं। उन्होंने ही परफेक्ट रिलेशंस नाम की पीआर एजेंसी शुरू की थी। वे अब बंद हो गए आर्ब्जवर फार बिजनेस एंड पालिटिक्स पेपर में सीनियर एडिटर भी रहे।


डा.स्वपना लिड्डल ( इतिहास)


डा.स्वपना लिड्डल दिल्ली के इतिहास पर लगातार श्रेष्ठ काम कर रही हैं।उन्होंने चांदनी चौक: दि मुगल सिटी आफ ओल्ड दिल्ली और कनॉट प्लेस जैसी शानदार किताबें लिखी है। वह सेंट स्टीफंस कॉलेज, जेएनयू और जामिया में पढ़ी हैं। डा. स्वपना 1980 के दशक में दिल्ली आई तो इसे दिल से चाहने लगीं। वह इंटेक की संयोजक भी हैं। इस बहाने वह दिल्ली के महत्वपूर्ण स्मारकों को बचाने की लगातार कोशिशें करती हैं।


डा.सखी जॉन ( समाज सेवा)


डा.सखी जॉन किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। वे एक अनजान शख्स को अपनी एक किडनी दान दे चुके हैं। उन्हें याद है जब वे 26 अप्रैल,1992 को केरल से दिल्ली आए थे। जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से जुड़े हुएसखी दिल्ली आते ही तीस हजारी, कमला नगर, प्रताप नगर, मजनूं का टीला में गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाने लगे। बच्चों में तो उनकी जान बसती है। वे अपनी घर के आसपास के बच्चों को पढ़ाते और उनका स्कलों में दाखिला करवाते हैं। उनके घर के दरवाजे जरूरतमंदों के लिए हर वक्त खुले रहते हैं।


रेबेका जॉन ( कानून)


दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैक्ल्टी आफ लॉ की स्टुडेंट रहीं रेबेका जॉन को देश ने तब कायदे से जाना जब उन्होंने आरुषि केस में तलवार दंपती और 1984 में मारे गए सिखों के परिजनों के पक्ष में पैरवी की। उन्होंने मेरठ के हाशिमपुरा कांड के पीड़ितों के लिए भी पैरवी की थी। रेबेका जॉन पहली महिला वकील थीं जिन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर काउंसिल नामित किया था।


प्रो.सिडनी रिबेरो(शिक्षा)


कौन नहीं जानता प्रो.सिडनी रिबेरो को! वे दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में लंबे समय तक अंग्रेजी पढ़ाते रहे है। रिबेरो साहब ने  डी यू की कई  पीढ़ियों को पढ़ाया । उनकी इमेज एक आदर्श टीचर की रही। इसलिये उन्हें अपने स्टूडेंट्स का सम्मान भी मिला। उनका परिवार दिल्ली के सबसे पुराने एंग्लो इंडियन परिवारों में से है। ये 1909 से दिल्ली में हैं। प्रो.रिबेरो की मां श्रीमती मेरी रिबेरो कश्मीरी गेट के जीपीओ डाकघर की चीफ पोस्टर मास्टर थीं।


नग्योनी आर.जेम्स ( समाज सेवा)


 राजधानी में अच्छी-खासी आबादी नार्थ ईस्ट राज्यों के ईसाइयों की भी है। नग्योनी आर.जेम्स इनके घऱ से लेकर पेशेवर मसलों को हल करने को लेकर लगातार सक्रिय रहते हैं। वे 1999 में मणिपुर से दिल्ली में आकर बस गए थे। पेशे से इंजीनियर जेम्स कहते हैं कि अब वे दिल्ली वाला हो चुके हैं। उनके प्रयासों से ही नार्थ ईस्ट राज्यों के ईसाई हरेक महीने के पहले रविवार को गोल डाक खाना के सेक्रेड हार्ट कैथडरल चर्च में प्रार्थना के लिए एकत्र होते हैं। इस बहाने बाद में बैठकी भी हो जाती है। जेम्स ने हाल ही मेंनार्थ-ईस्ट कैथोलिक कम्युनिटी, दिल्ली  की स्थापना के 30 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम भी आयोजित किया।

Harish Salve and Brian Silas

25 December 2020

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