शनिवार, 20 मार्च 2021

यूँही मस्त नग़मे लुटाता रहूं / महेन्द्र कपूर

 तुम अगर साथ देने का वादा करो !

मैं यूँही मस्त नग़मे लुटाता रहूं ...


हिंदी सिनेमा के महान गायक व असाधारण आवाज़ के धनी महेन्द्र कपूर की आवाज में एक अद्धभुत सा फोक जोन था और इसी कारण उनके गाए देशभक्ति गीत लोगों के दिल के बेहद करीब हैं।


इस महान गायक का जन्म ९ जनवरी १९३४ को अमृतसर में हुआ , महेंद्र कपूर को बचपन से ही गायिकी का शौक था और उनका यही शौक उन्हें मुम्बई तक ले आया था। गायिकी की दुनिया में पहचान बनाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की और कई महान लोगों के शार्गिद के रूप में काम किया। उन्होंने संगीत की अपनी प्रारंभिक शिक्षा हुस्नलाल-भगतराम, उस्ताद नियाज अहमद खान, उस्ताद अब्दुल रहमान खान और पंडित तुलसीदास शर्मा से हासिल की।


उनकी किस्मत तब चमकी जब मर्फी रेडियो की ओर से आयोजित एक कॉन्टेस्ट के वे विजेता बने। इसके बाद उन्होंने फिल्मी सफर की शुरुआत की और १९५३ में आई फिल्म ‘मदमस्त’ के साहिर लुधियानवी के गीत ‘आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए नाशाद आया’ को गाया। साल १९५८ में प्रदर्शित वी. शांताराम की फिल्म नवरंग में महेन्द्र कपूर ने सी.रामचंद्र के संगीत निर्देशन में ‘आधा है चंद्रमा रात आधी’ से बतौर गायक अपनी पहचान बना ली। इसके बाद महेन्द्र कपूर ने सफलता की नई उंचाइयों को छुआ और एक से बढक़र एक गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


उनका गाया मेरे देश की धरती.... गीत सुनने पर लगता है जैसे वह किसी ठेठ पंजाबी गांव से गाया जा रहा हो. उनकी आवाज में वह बात थी जो श्रोताओं को पंजाब के गांवों, खेतों और ढाबों में ले जाती थी और यही कारण है कि उनके गाए देशभक्ति गीत बेहद लोकप्रिय हुए। मनोज कुमार की फिल्म उपकार का गीत मेरे देश की धरती., पूरब और पश्चिम का गीत भारत का रहने वाला हूं जैसे महेन्द्र कपूर के लिए ही लिखे गए हों।


महत्वपूर्ण बात है कि महेन्द्र कपूर ने रफी, तलत महमूद, मुकेश, किशोर कुमार, हेमंत कुमार जैसे चर्चित गायकों के दौर में सफलता हासिल की। यह वह दौर था जब लोग रफी और किशोर दा के अलावा किसी तीसरे की आवाज को सुनना खास पसंद नहीं करते थे।


महेन्द्र कपूर के यादगार गीतों में गुमराह फिल्म का चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाए हम दोनों., हमराज का नीले गगन के तले धरती का प्यार पले., किसी पत्थर की मूरत से., तुम अगर साथ देने का वादा करो. जैसे कई गाने शामिल हैं, लेकिन देशभक्ति गीत और उनकी आवाज जैसे एक-दूसरे के पूरक थे। महेन्द्र कपूर बी आर चोपड़ा के पसंदीदा गायकों थे। उनकी धूल का फूल, हमराज, गुमराह, वक्त, धुंध जैसी तमाम फिल्मों को अपनी आवाज दी और तमाम भजन भी गाये, इसके अलावा उनकी आवाज से सजा महाभारत का शीर्षक गीत अथ श्रीमहाभारत कथा.....श्रोताओं के जेहन में आज भी ताजा है।


महेंद्र कपूर को १९६८ में “उपकार” फिल्म के गीत मेरे देश की धरती सोना उगले.. के लिए सर्वश्रेष्ठ पा‌र्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके अलावा तीन फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड भी मिले।


पहला १९६३ में “गुमराह” फिल्म के गीत चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं.. 

दूसरा १९६७  में “हमराज” फिल्म के नीले गगन के तले.. 

तीसरा १९७४ में "रोटी कपड़ा और मकान" के और नहीं बस और नहीं . .

बाद में उन्हें पद्मश्री और महाराष्ट्र सरकार के लता मंगेशकर सम्मान से भी नवाजा गया।


२७ सितंबर, २००८ को दिल का दौरा पड़ने से महेन्द्र कपूर का निधन हो गया और भारतीय फिल्म संगीत जगत के एक सितारे का अंत हो गया.


स्त्रोत : गूगल

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