सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

कोरोना काल महाकाल और मैं : मनोहर मनोज


कोरोना काल और मेरी रचनात्मकता : मनोहर मनोज


वर्ष 2020 कमोबेश सबके लिए एक काला साल के रूप में दर्ज़ हुआ। मेरे लिए भी वह साल कई तरीके से बेहद उलझनपूर्ण और नैराश्य से परिपूर्ण रहा जिसका दुबारा स्मरण करने से भी डर लगता है। समय के सदुपयोग  के तौर पर  साल 2020  में मैंने दो किताबे पढ़ कर पूरी की और अपनी दो खंडो में लिखी किताब ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन का हिंदी अनुवाद पूरा किया।


 पढ़ी गयी ये दो किताबें थी लब्ध प्रतिष्ठित पत्रकार कुलदीप नायर की 400 पेज की  पुस्तक बियॉन्ड दी लाइन और दूसरा श्रीलाल शुक्ल की रागदरबारी। कुलदीप नायर की किताब में तो देश के  विभाजन , आज़ादी से लेकर आज़ादी बाद की सभी सरकारों में यूपीए तक का एक तरह से राजनितिक इतिहास दृष्टिगोचर हुआ जिसमे एक नहीं कई नहीं जाने गए किस्से और किस्सों के पीछे किस्से के खुलासे इस छह दशक पत्रकारिता करने वाले पत्रकार ने लिखी है। लेखक  कुलदीप नायर की निष्पक्ष और सक्रिय  पत्रकारता ने तो  मुझे व्यामोहित कर दिया। श्रीलाल शुक्ल की 350 पेज की पुस्तक रागदरबारी जिसका मैंने बड़ा नामसुना था. यह  एक अलग ट्रैक पर लिखी गयी  कहानी और आख्यान है।  इस पुस्तक में लेखक ने  समाज की पतनशीलता, पथभ्रष्टता और युगीन संस्कारो के संक्रमण का एक बहुआयामी समकालीन चित्रण किया। परन्तु लेखक  द्वारा शहर के पास के कस्बे गांव के चित्रण का आयाम ही पुस्तक में प्रमुखता लिए हुए है। इसमें लेखक ने गवार लोगो की दुश प्रवृतियों और मनोविकृतियों के चित्रण में तंज की अतिशयता दर्शायी है और अपनी लेखन ऊर्जा का कुछ ज्यादा ही उपयोग बल्कि दुरूपयोग कर दिया है। एक उपन्यास के तौर पर मुझे ये बोझिल लगा।


 तदन्तर मैंने अपनी दो वर्ष पूर्व अंग्रेजी में लिखीऔरप्रकाशित पुस्तक ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन के दोनों वॉल्यूम का हिंदी अनुवाद अभी अभी पूर्ण किया। करीब 800 पेज और करीब साढ़े तीन लाख शब्दों का अनुवाद काफी श्रमसाध्य , धैर्यसाध्य और संकल्पसाध्य  रहा जिस कार्य मे मेरे दो बार बीमार होने से काफी रूकावट आयी। 


जुलाई से अनुवाद कार्य शुरू किया जो ३० जनवरी को सम्पन्न  हुआ। इस पुरे अनुवाद का एक बार पूरा रिवाइज कार्य भी कर चूका हूँ। इस पुस्तक के हिंदी संस्करण निकलने की नसीहत समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार ने तब दी जब उन्होंने अंग्रेजी किताब ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पुस्तक चर्चा पर हुए आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यह कहा की इस पुस्तक को जब तक हिंदी प्रदेशो को आमजन की पट्टियों में नहीं पहुंचाया जायेगा तबतक इस पुस्तक का मूल उद्देश्य पूरा नहीं होगा।


 बताना चाहूंगा की सरकार , सिस्टम और समाज की सर्वाधिक बड़ी समस्या भ्रष्टाचार के हर पक्षों की तपसिल  से  व्याख्या करने वाली यह पुस्तक न केवल देश बल्कि दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी पुस्तक है। भ्रष्टाचार की इस संपूर्ण पुस्तक  का हिंदी अनुवाद कर एक बड़ी  रा हत महसूस कर रहा हूँ। 


कोरोना काल २०२० की वजह से यह पुस्तक अनुदित हो पाया अन्यथा इस भागमभाग में यह कार्य शायद नहीं हो पाता।अगर हालात अनुकूल रहे तो आपकी शुभकामनाओ से मैं  भारत की कृषकाय कृषि और ऑल मोड ऑफ मीडिया, एन  इल्ल्यूसिव फोर्थ एस्टेट  दो पुस्तक  हिंदी और अंग्रेजी में लिखने की परियोजना को अंजाम दूंगा। लेकिन यह साल अभी उन गतिविधियों को समर्पित होगा जिनपर ठीक पिछले साल मार्च में ब्रेक लग गया था।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें