रविवार, 7 फ़रवरी 2021

गाइड की कहानी / रतन भूषण

 चलते चलते.../ गाइड में वहीदा रहमान नहीं होतीं / रतन भूषण 


देव आनंद और वहीदा रहमान की मुख्य भूमिका वाली फिल्म गाइड के बारे जितना कहा जाये, कम ही होगा।  इसके बारे में क्या क्या कहा जाए! कहानी कमाल की, गाने सुरीले, कलाकारों का अभिनय गज़ब का, फली मिस्त्री का एक एक फ्रेम खूबसूरत...। तभी तो इसने पचपन साल बाद भी दर्शकों पर अपना जादू चलाया हुआ है। 

यह फ़िल्म 6 फरवरी 1965 को रिलीज हुई थी। हिंदी फिल्मों की गाथा की अहम अंक फ़िल्म गाइड का निर्देशन गोल्डी यानी देव आनंद के भाई विजय आनंद ने किया था। इसकी कहानी अगर बेहद संक्षेप में कहा जाए तो गाइड राजू (देव आनंद) धोखाधड़ी के मामले में फंस जाता है। रिहाई के बाद उसे परिस्थितिवश संत बनना पड़ता है और इस काम में उसे सफलता तो मिलती है, लेकिन जान देकर। यह भारत के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी लेखक आर के नारायण के द गाइड नाम के उपन्यास पर आधारित थी। अंग्रेजी और हिंदी में बनी इस फ़िल्म को बांग्ला में भी बनाने का इरादा तब हुआ था। कुछ रील शूट भी हुआ, लेकिन बाद में इरादा बदल गया और यह बनी सिर्फ दो भाषाओं हिंदी और अंग्रेजी में। टेड डैनिअल्वस्की निर्देशित अंग्रेजी वर्जन में राजू जीवित होता है, जो बेहद फ्लॉप साबित हुई, लेकिन हिंदी वर्जन ने कमाल कर दिया। संगीतकार थे एस डी बर्मन, पटकथा विजय आनंद और पर्ल एस बक की थी। अभिनय किया था देव आनन्द, वहीदा रहमान, लीला चिटनिस, अनवर हुसैन, उल्हास, गजानन जागीरदार, रशीद ख़ान, किशोर साहू, प्रवीन कौल, मृदुला रानी, पूर्णिमा, कृष्ण धवन, प्रेम सागर, नर्बदा शंकर आदि ने।

देव आनंद निर्मित फ़िल्म गाइड के सभी गीत कर्णप्रिय हैं। आज फिर जीने की तमन्ना है..., दिन ढल जाये हाय रात न जाये..., गाता रहे मेरा दिल तू ही मेरी मंज़िल..., क्या से क्या हो गया बेवफा..., पिया तोसे नैना लागे रे..., मोसे छल किए जाए सइंया बेईमान..., तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं..., वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां..., हे राम हमारे रामचन्द्र... और अल्लाह मेघ दे पानी दे...। फ़िल्म की हीरोइन वहीदा रहमान ने इस बारे में कहा भी, फ़िल्म के सभी गीत सुरीले थे, लेकिन मैं अपनी रोज़ी की भूमिका से ज्यादा खुश इस बात को लेकर थी कि मुझे इस फ़िल्म में डांस करने का भरपूर अवसर मिला था। इससे पहले की मेरी सभी फिल्मों में ऐसे डांस नहीं थे। में खुद इस बात को लेकर सोचती थी कि मैंने बचपन से डांस की ट्रेनिंग ली है, लेकिन किसी मेकर ने उसका इस्तेमाल किसी फिल्म में अभी तक नहीं किया है। गाइड ने वह अवसर मुझे दिया। इस फ़िल्म में किये गए डांस और फ़िल्म की सफलता का फायदा यह हुआ कि उसके बाद सभी फिल्मकार, जिनकी फिल्में मैं कर रही थी, सबने मेरे ऊपर ऐसा गीत रखना शुरू कर दिया, जिसमें डांस की गुंजाइश हो। 

अब अहम बात यह कि जब इस फ़िल्म की कास्टिंग हो रही थी, तब देव आनंद, गोल्डी और चेतन आनंद के साथ ही अन्य अहम लोग भी बैठे थे। सभी कलाकारों का चयन हो गया, लेकिन वहीदा रहमान को लेकर मामला अटक गया। मसला यह था कि फ़िल्म दो भाषाओं में बनेगी और वहीदा की इंग्लिश जैसी चाहिए, वैसी नहीं है। देव के बड़े भाई चेतन आनंद का कहना था कि बेहतर होगा कि हम रोज़ी के रोल के लिए प्रिया राजवंश को लें। उनका आगे कहना हुआ कि हम इंग्लिश फ़िल्म बनाने जा रहे हैं तो ऐसी हीरोइन लें जिनके बारे में लोग जानें तो खराब न लगे। छठी तक की पढ़ाई करने वाली वहीदा अंग्रेजी फ़िल्म में काम करेगी? लोग सुनेंगे तो हंसेंगे। गोल्डी फ़िल्म के निर्देशक थे, लेकिन वे दोनों बड़े भाई के बीच में ज्यादा बोल नहीं सकते थे। ये वही प्रिया राजवंश थीं, जिन्होंने हक़ीक़त, हीर रांझा, हंसते ज़ख्म, कुदरत, हिंदुस्तान की कसम आदि फिल्मों में काम किया था। 

हालांकि गाइड के लिए अन्य कई हीरोइनों के नाम भी तब चर्चा में आये, लेकिन चेतन का प्रिया को फ़िल्म में रखने का उद्देश्य साफ था कि दोनों वर्जन के लिए वे सही साबित होंगी। प्रिया लंदन में पली-बढ़ी थीं। उनके फिल्मों में आने की कहानी भी दिलचस्प थी। बाईस साल की प्रिया जब लंदन में रह रहीं थीं, तब एक फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीर खींची, जो खूब चर्चा में आ गई। उनकी तस्वीर तब चेतन आनंद तक पहुंची और वो देखते ही प्रिया के दीवाने हो गए। उन दिनों वो अपनी फिल्म हकीकत के लिए नए चेहरे की तलाश में थे, तो उन्होंने फिल्म के लिए प्रिया को तुरंत साइन कर लिया। जबरदस्त हुस्न और अलग अंदाज का एक्टिंग करने वाली प्रिया ने अपने अभिनय सफर में फिल्में तो ज्यादा नहीं कीं, लेकिन अपनी दिलकश आवाज और अनोखी संवाद आदायगी की वजह से उन्होंने बहुत कम फिल्में करके भी लोगों को अपना दीवाना बना लिया था। इसलिए भी चेतन आनंद की पसंद थीं प्रिया, लेकिन इनके साथ एक दिक्कत थी और वह यह कि उन्हें डांस करना नहीं आता था। ज़रा सा भी नहीं, लेकिन वहीदा डांस में ट्रेंड थीं, तो देव आनंद ने अंत में गोल्डी से पूछा, गोल्डी, क्या तुम फ़िल्म से डांस का सीक्वेंस हटा सकते हो? गोल्डी ने कहा, नहीं, यही तो फ़िल्म की जान है। फिर रोज़ी को हम कैसे प्रूव करेंगे? 

गोल्डी के सवाल का जवाब न देव आनंद के पास था, न चेतन आनंद के पास। इस तरह वहीदा रहमान को मिल गयी उनके फिल्मी सफर की एक बड़ी फिल्म, जिसके जरिये उन्होंने खुद को बतौर हीरोइन साबित किया, उन्हें ख्याति मिली और हमें मिली एक खूबसूरत सदाबहार फ़िल्म गाइड...।

-रतन  भूषण 

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