गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

आजमगढ़ में भी बिखरीं पड़ी हैं स्वतंत्रता संग्राम नायकों की वीर गाथाएं / अरविंद सिंह

 चौरी चौरा ही नहीं आजमगढ़ में भी बिखरीं हैं स्वतंत्रता संग्राम नायकों की वीर गाथाएं, जिन्हें न तो संरक्षित किया गया और नहीं उन्हें याद किया गया..


०-31 जनवरी-2020 को एजेएफ की मांग पर तत्कालीन जिलाधिकारी एनपी सिंह ने दिया था सीडीओ और पर्यटन विभाग को कार्यवाही का आदेश

० एक साल बाद भी नौकरशाही के कान पर जूं तक नहीं रेंगा.

० आज भी उपेक्षित है शहीदी स्थल और महानायकों की जन्मस्थल

० कलेक्टर को आजमगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के संकलन और संरक्षण में कोई रूचि नहीं

० स्वतंत्रता संग्राम सर्किट में नहीं शामिल हो सका आजमगढ़

० चौरी चौरा के शताब्दी वर्ष पर देशभर के शहीद स्थल पर होने है राष्ट्रीय कार्यक्रम,

० एजेएफ इसके लिए पहले से भी कर चुका है पहल. 


@ अरविंद सिंह


उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात और अज्ञात महानायकों की स्मृति और उनकी गाथाओं का सर्वेक्षण, शोध संकलन और प्रकाशन की अभूतपूर्व कार्ययोजना बनायी है. यहीं नहीं स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं का शिलापट्टों एवं म्यूलर के माध्यम से प्रस्तुत करना है. उनकी फोटो और अभिलेख प्रदर्शनी, लाइट और साउंड का कार्यक्रम, कवि सम्मेलन, नाट्य समारोह, स्वतंत्रता संग्राम के साहित्य एवं पुस्तक की प्रदर्शनी, शहीद स्थलों पर राष्ट्रधुन तथा दीप प्रज्ज्वलित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम की तिथियों में शहीद स्थलों और स्मारकों पर कार्यक्रम का आयोजन करना है. यह कार्यक्रम 2 फरवरी-2021से 4 फरवरी-2022 तक चलना है.

लेकिन आजमगढ़ में न तो किसी शहीद की स्मृति स्थल की टोह ली गयी और नहीं उनकी वीरगाथा को संकलित करने की मुहिम चलायी गयी. जबकि आजमगढ़ जर्नलिस्ट फेडरेशन ने पिछले 30 जनवरी, 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी को ज्ञापन देते हुए उनसे आजमगढ़ के शहीद स्थलों के सौन्दर्यीकरण और संकलन, संरक्षण की मांग की, तथा शहीदों के ग्राम स्थलों के थानों और विकास खंडों में उनके नाम का शिलालेख लगवाने का अनुरोध किया था. जिस पर उन्होंने सीडीओ, पुलिस अधीक्षक और पर्यटन विभाग को कार्यवाही के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन आजमगढ़ की नौकरशाही इस पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी. बल्कि एजेएफ ने इस पर उनका कई बार ध्यान आकृष्ट भी कराया और वर्तमान जिलाधिकारी राजेश कुमार से उनके आगमन के समय ही इसका उल्लेख किया था.

आज भी देख सकते हैं हमारी मांग को.. और उस समय की समाचार की कवरेज को... 


'आजमगढ़ जर्नलिस्ट फेडरेशन' (AJF) की 6सूत्री मांगों को जिलाधिकारी आजमगढ़ एनपी सिंह ने गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आदेश जारी कर दिया है कि यथासीघ्र इन मांगों पर विभागीय स्तर पर कार्यवाही की जाए और उस कार्यवाही से जिलाधिकारी को अवगत भी कराया जाए।

बताते चलें कि विगत 30 जनवरी को 'आजमगढ़ जर्नलिस्ट फेडरेशन' एजेएफ ने आजमगढ़ के इतिहास, पौराणिक इतिहास,1857 की क्रांति के इतिहास आदि को संजोने और सहेजने के लिए 6सूत्री मांगपत्र (ज्ञापन) संयोजक अरविंद सिंह के नेतृत्व में वसीम अकरम, महेंद्र सिंह, उपेंद्रनाथ मिश्रा, डा०माधुरी सिंह, रामअवध यादव,प्रशांत राय,गोविंद दुबे,अभिषेक नीरज,राजीव सिंह,आदि लोगो ने देकर अनुरोध किया था। 

इन मांगों में #पहला-1857 की क्रांति में शहादत दिए क्रांतिकारियों को उनके क्षेत्रों यथा-संबंधित थानों, ब्लाकों, तहसीलों में शिलालेख लगाया जाए,जिससे की उनकी क्रांति को स्थानीय जनता जान सके और अपने क्षेत्र पर,अपने नायकों पर गर्व कर सके। राष्ट्रीयता की भावना प्रबल हो सके।

#दूसरा-कुंवर सिंह उद्यान में महान स्वतंत्रता सेनानी वीर कुंवर सिंह की मूर्ति लगाया जाए।

#तीसरा-मेहता पुस्तकालय को उसकी पुरानी समृद्धि और कलेवर दिया जाए।

#चौथा-1857 की महान क्रांति के नायकों, जिनके नेतृत्व में आजादी की लडा़ई लड़ी गयी,ऐसे आजादी के नायकों का स्मृति स्थल,शहीद स्थल का निर्माण कराया जाए।

#पांचवीं-जनपद के कोने कोने में बिखरे ऐतिहासिक चिन्हों, प्रतीकों,दस्तावेजों को संरक्षित. किया जाए ,जिससे इतिहास अध्ययन के साथ न्याय हो सके।

#छठवीं-जनपद में पौराणिक अध्ययन, ऐतिहासिक अध्ययन,1857 की क्रांति का अध्ययन,पुरा अवशेषों का अध्ययन, लोक विधाओं का समग्र अध्ययन हेतु शोधपीठ की स्थापना की जाए।

उल्लेखनीय है कि एजेएफ ने आजमगढ़ महोत्सव के समय जनपद के कोने कोने पर बिखरे इतिहास का संकलन किया था और उनका महोत्सव में चित्र प्रदर्शनी तथा पौराणिक, ऐतिहासिक दस्तावेजों का प्रदर्शन किया गया था,जिससे जनपद की जनता अपने क्षेत्र और जनपदीय इतिहास को जान सकी । इसी समय टीम एजेएफ को अनेक ऐसे दस्तावेज और पुरा,ऐतिहासिक,क्रांति आदि के चिन्ह,प्रतीक मिले थें,जिन्हें संरक्षित किए जाने की आवश्यकता थी।जिसको लेकर एजेएफ का एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिलकर मांग किया था।इसी क्रम में लोकप्रिय और साहित्यिक अभिरुचि वाले जिलाधिकारी ने एजेएफ की मांगों को न केवल गंभीरता से लिया बल्कि इसकी महत्वपूर्ण मांगों पर अमल करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी,अपर जिलाधिकारी प्रशासन, प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय,जिला विद्यालय निरीक्षक, पुलिस अधीक्षक को अविलंब अपने अपने विभाग से संबंधित मांगों को लेकर कार्य-योजना बनाने और अपने विभागीय स्तर पर दिए जा रहे योगदान को बताने का निर्देश जारी किया है।यही नहीं सबसे महत्वपूर्ण यह कि इन मांगों पर क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी गोरखपुर परिक्षेत्र गोरखपुर क्या योगदान दे सकता है इसकी विस्तृत आख्या और प्रस्ताव अविलंब देने का निर्देश भी डीएम ने दिया है, जिसे आवश्यकता अनुसार जिलाधिकारी द्वारा शासन को भी भेजा जा सकता है। जनपद के इतिहास, पौराणिक इतिहास और क्रांति के इतिहास का संकलन,संयोजन और संरक्षण की यह सबसे गंभीर और बड़ी कोशिश जिलाधिकारी द्वारा की जा रही है। यह आजादी के बाद पहली बार इतने संजीदा ढंग से प्रयास किया जा रहा है, जिसकी आधार भूमि एजेएफ ने तैयार किया था और है ।इसके लिए एजेएफ के संयोजक पत्रकार अरविंद कुमार सिंह, पत्रकार वसीम अकरम, महेंद्र सिंह, रामअवध यादव,एसके दत्ता,दुर्गा प्रसाद राय,धनन्जय राय,अभिषेक सिंह नीरज,उपेंद्रनाथ मिश्रा,पवन कुमार सिंह,विवेक राजपूत आदि संकलन टीम का अद्भुत योगदान है।

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