सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

बजट पर वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया की प्रतिक्रिया

 🔴 वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया , यूनियन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति 


🔵 वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया, ने केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के बजट में, मीडिया व मीडियाकर्मियों के लिये, एक भी घोषणा नही करने की निंदा की है । 


🌐 वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया , ने किसान आंदोलन कवर कर रहे , पत्रकारों पर पुलिस अत्याचार की निंदा की है । यूनियन ने सिंघु बॉर्डर से पुलिस द्वारा पकड़े गए पत्रकार मंदीप पुनिया, को तुरंत रिहा करने व उसके खिलाफ आपराधिक मामले को वापिस लेने की मांग की है । 


⚫ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया, ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर, फेक न्यूज़ चलाने वाले पत्रकारों को किसी भी तरह का सहयोग नही करने का फैसला लिया है। 


🟡 वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया, ने मीडिया में विदेशी विनिवेश (FDI )के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का फैसला लिया है। 


🟠 वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया , ने मीडिया से GST , हटाने की मांग की है। 


नई दिल्ली, 1 फरवरी/ देश के पत्रकारों के शीर्ष संगठन, वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया, सम्बद्ध भारतीय मज़दूर संघ, ने केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के बजट में मीडिया व मीडियाकर्मियों के लिये, एक भी कोई घोषणा नही करने की निंदा की है, और उसपर केंद्र सरकार के रवैये पर दुख जताया है। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनूप चौधरी के अनुसार , आज के बजट से ये साफ हो गया है, कि देश के ज्यादातर नेता , मीडियाकर्मियों को समाज का हिस्सा नही मानते है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल व देश मे लगे लॉक डाउन से मीडिया उद्योग की हालात खस्ता हो गए है। इस उद्योग के हालात खराब होने से, देशभर में विभिन्न समाचार पत्रों के प्रकाशन बंद हो गए और वहां कार्य कर रहे पत्रकारों की या तो छंटनी हो गयी या उनकी तनख्वाह में कटौती कर दी गयी। सैंकड़ो स्माल व मीडियम न्यूज़पेपरो का प्रकाशन बंद हो गया। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनूप चौधरी के अनुसार , ऐसे समय मे केंद्र सरकार को मीडिया को ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन देने चाहिये थे, लेकिन केंद्र सरकार ने कोरोना काल मे मीडिया को एकतरह से विज्ञापन देने में भी कटौती शुरू कर दी। हैरानी की बात है कि कोरोना काल मे जहाँ लगातार लोग इसका शिकार होकर मृत्यु के आगोश में जा रहे थे, उसी दौरान केंद्र सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय से जुड़े , डीएवीपी विभाग 2 पॉलिसियां लेकर आयी। एक ऑनलाइन मीडिया की और दूसरी प्रिंट मीडिया की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मीडिया की विज्ञापन पालिसी का फायदा ज्यादातर बड़े पोर्टल चलाने वाले गैर मीडिया घरानों व प्रिंट मीडिया की पालिसी का फायदा सिर्फ बड़े मीडिया घरानों को ही होगा। श्री चौधरी ने केंद्र सरकार से दोनों पॉलिसियों को रद्द करके उसकी जगह नयी पोलिसी लाने की मांग की है। श्री चौधरी ने मीडिया से जीएसटी हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस समय ये उद्योग बढेगा, उसी तरह से उसमे पत्रकारों के लिये नौकरियां बढ़ेंगी। नए प्रकाशन शुरू होंगे। श्री चौधरी ने मीडिया में एफडीआई पर भी रोक लगाने की मांग की है। 


    यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव श्री नरेन्द्र भंडारी  ने किसान आंदोलन के दौरान सिंघु बॉर्डर पर अपने रिपोर्टिंग ड्यूटी को अंजाम दे रहे पत्रकार मंदीप पुनिया की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये निर्भीक पत्रकार मंदीप , धरने पर बैठे किसानों को स्थानीय चंद लोगो द्वारा प्रताड़ित करने व इस मामले में स्थानीय पुलिस की खबरों के जरिये पोल खोल रहा था। श्री भंडारी के अनुसार , दिल्ली के बॉर्डर्स पर बैठे किसानों की कवरेज कर रहे ऑनलाइन मीडिया के पत्रकारों के समक्ष स्थानीय प्रशासन तरह तरह की बाधाएं खड़ी कर रहा है । श्री भंडारी ने पुलिस से पत्रकार मंदीप के खिलाफ मुकदमो को वापिस लेने व उसे तत्काल रिहा करने की मांग की है । 


   यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री संजय कुमार उपाध्याय के अनुसार , देश मे कई पत्रकार, फेक न्यूज़ का सहारा लेकर , झूठी खबरे चला रहे है। उन्होंने कहा कि यूनियन फेक न्यूज़ चलाने वाले पत्रकरो के कभी भी समर्थन में खड़ी नही होगी।

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