सोमवार, 30 नवंबर 2020

अंजू शर्मा की पोस्ट से.... हम हमेशा कहते हैं #अनुवाद, लेखन से अधिक श्रमसाध्य और महत्वपूर्ण कार्य है। यह न केवल किसी भी रचना को पुनः रचने जितना महती कार्य है अपितु भावानुवाद की चुनौती के चलते कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि एक अनुवादक एक साथ दो भाषाओं के प्रति न्याय करने की जिम्मेदारी से जुड़ा होता है। दो भाषाओं के बीच इसी तरह के #सेतु के रूप में वरिष्ठ लेखक, अनुवादक Subhash Neerav जी पिछले 40 वर्षों से साधनारत हैं। दस्तक के माध्यम से हम उनके #पंजाबी भाषा से किये गए उत्कृष्ट हिंदी अनुवादों को आप तक पहुँचाते रहे हैं, पर अब मौका है कि आप सीधे अनुवादक से जुड़ें और जानिये कि इन बीते चार दशकों में वे किन चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। एक अनुवादक को कैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है या उनकी इस लंबी अनुवाद यात्रा में कौन कौन से #पड़ाव आते रहे हैं, उनके अनुभव, उपलब्धियाँ और खास क्षणों को जानने का यह अच्छा अवसर है तो जुड़ना न भूलिये। भाषान्तर : सुभाष नीरव 29 नवंबर 2020, रविवार रात 8 बजे दस्तक संवाद के पेज पर (लिंक नीचे दिया गया है) https://www.facebook.com/दस्तक-संवाद-104405177946085/ || परिचय || सुभाष नीरव (मूल नाम : सुभाष चन्द्र) कथाकार, कवि एवं अनुवादक गत 40 वर्षों से हिन्दी-लेखन व अनुवाद-कार्य में संलग्न। प्रकाशित कृतियाँ एवं अन्य विवरण :  छह कहानी संग्रह हिंदी में (‘दैत्य तथा अन्य कहानियाँ’, ‘औरत होने का गुनाह’, ‘आख़िरी पड़ाव का दु:ख’, ‘रंग बदलता मौसम’, ‘लड़कियों वाला घर’ और ‘सुभाष नीरव : ग़ौरतलब कहानियाँ’)। एक कहानी संग्रह पंजाबी में – ‘सुभाष नीरव दीआं चौणवियां कहाणियाँ’ प्रकाशित। तीन कविता संग्रह (‘यत्किंचित’, ‘रोशनी की लकीर’ व 'बिन पानी समंदर'), तीन लघुकथा संग्रह (‘कथा बिन्दु’, ‘सफ़र में आदमी’ एवं ‘बारिश तथा अन्य लघुकथाएं’), दो बाल कहानी संग्रह(‘मेहनत की रोटी’ और ‘सुनो कहानी राजा’)। हिंदी में पाँच कहानी संग्रहों का संपादन ‘चंद कदम’, ‘कितने गुलमोहर’, ‘कहानी है कि खत्म नहीं होती’, 'गूँगे नहीं शब्द हमारे' और 'अँधेरे में उजास'।  ‘मेहनत की रोटी’(बाल कहानी), ‘कमरा’ व ‘रंग-परिवर्तन’ (लघुकथा) तथा ‘आख़िरी पड़ाव का दु:ख’(कहानी) प्राइमरी एवं स्नातक स्तर के विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल। अनुवाद कार्य :  पंजाबी से करीब 600 कहानियाँ, 200 लघुकथाओं और 400 कविताओं का अनुवाद। इसके अतिरिक्त 50 से अधिक साहित्यिक पुस्तकों (कहानी, कविता, उपन्यास, आत्मकथा और लघुकथा) का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित जिनमें 8 पुस्तकें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत से प्रकाशित। कुछ कविताओं और कहानियों का हिन्दी से पंजाबी में अनुवाद प्रकाशित।  हिन्दी की प्रसिद्ध कथा मासिक ‘कथादेश’ के जुलाई 2000 में प्रकाशित ‘पंजाबी कहानी विशेषांक’ में 90 प्रतिशत से अधिक अनुवाद-कार्य में विशेष सहयोग। कैनेडा से प्रकाशित होने वाली हिन्दी प्रचारिणी सभा की अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका ‘हिन्दी चेतना’ के पंजाबी कहानी विशेषांक ‘पाँच देशों की पंजाबी कथाएँ’ (अप्रैल-जून 2016) तथा हिन्दी के जानी-मानी पत्रिका ‘मंतव्य’ (लखनऊ) के अंक -9 के ‘पंजाबी कहानी अंक’ का अतिथि संपादन एवं अनुवाद, जिसमें देश-विदेश की उत्कृष्ट 24 पंजाबी कहानियों और उससे संबंधित आलेखों का अनुवाद कार्य भी शामिल। सम्मान : अनुवाद के लिए भारतीय अनुवाद परिषद, नई दिल्ली के “डॉ. गार्गी गुप्त द्विवागीश पुरस्कार 2016-17” से सम्मानित। लघुकथा लेखन व अनुवाद के लिए ''माता शरबती देवी स्मृति पुरस्कार 1992'', ''मंच पुरस्कार, 2000'', ''श्री बलदेव कौशिक स्मृति सम्मान-2013'’। ‘रंग बदलता मौसम’ कहानी के लिए राजस्थान पत्रिका द्वारा ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार, 2011’ । *** https://www.facebook.com/दस्तक-संवाद-104405177946085/


हम हमेशा कहते हैं #अनुवाद, लेखन से अधिक श्रमसाध्य और महत्वपूर्ण कार्य है।  यह न केवल किसी भी रचना को पुनः रचने जितना महती कार्य है अपितु भावानुवाद की चुनौती के चलते कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि एक अनुवादक एक साथ दो भाषाओं के प्रति न्याय करने की जिम्मेदारी से जुड़ा होता है।  दो भाषाओं के बीच इसी तरह के #सेतु के रूप में वरिष्ठ लेखक, अनुवादक Subhash Neerav जी पिछले 40 वर्षों से साधनारत हैं। 


दस्तक के माध्यम से हम उनके #पंजाबी भाषा से किये गए उत्कृष्ट हिंदी अनुवादों को आप तक पहुँचाते रहे हैं, पर अब मौका है कि आप सीधे अनुवादक से जुड़ें और जानिये कि इन बीते चार दशकों में वे किन चुनौतियों का सामना करते रहे हैं।  एक अनुवादक को कैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है या उनकी इस लंबी अनुवाद यात्रा में कौन कौन से #पड़ाव आते रहे हैं, उनके अनुभव, उपलब्धियाँ और खास क्षणों को जानने का यह अच्छा अवसर है तो जुड़ना न भूलिये।


भाषान्तर : सुभाष नीरव

29 नवंबर 2020, रविवार

रात 8 बजे


दस्तक संवाद के पेज पर (लिंक नीचे दिया गया है)

https://www.facebook.com/दस्तक-संवाद-104405177946085/


||  परिचय ||


सुभाष नीरव 

(मूल नाम : सुभाष चन्द्र)

कथाकार, कवि एवं अनुवादक


गत 40 वर्षों से हिन्दी-लेखन व अनुवाद-कार्य में संलग्न।


प्रकाशित कृतियाँ एवं अन्य विवरण :

 छह कहानी संग्रह हिंदी में (‘दैत्य तथा अन्य कहानियाँ’, ‘औरत होने का गुनाह’, ‘आख़िरी पड़ाव का दु:ख’, ‘रंग बदलता मौसम’, ‘लड़कियों वाला घर’ और ‘सुभाष नीरव : ग़ौरतलब कहानियाँ’)। एक कहानी संग्रह पंजाबी में – ‘सुभाष नीरव दीआं चौणवियां कहाणियाँ’ प्रकाशित। तीन कविता संग्रह (‘यत्किंचित’, ‘रोशनी की लकीर’ व 'बिन पानी समंदर'), तीन लघुकथा संग्रह (‘कथा बिन्दु’, ‘सफ़र में आदमी’ एवं ‘बारिश तथा अन्य लघुकथाएं’), दो बाल कहानी संग्रह(‘मेहनत की रोटी’ और ‘सुनो कहानी राजा’)। हिंदी में पाँच कहानी संग्रहों का संपादन ‘चंद कदम’, ‘कितने गुलमोहर’, ‘कहानी है कि खत्म नहीं होती’, 'गूँगे नहीं शब्द हमारे' और 'अँधेरे में उजास'।

 ‘मेहनत की रोटी’(बाल कहानी), ‘कमरा’ व ‘रंग-परिवर्तन’ (लघुकथा) तथा ‘आख़िरी पड़ाव का दु:ख’(कहानी) प्राइमरी एवं स्नातक स्तर के विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल। 


अनुवाद कार्य :

 पंजाबी से करीब 600 कहानियाँ, 200 लघुकथाओं और 400 कविताओं का अनुवाद। इसके अतिरिक्त 50 से अधिक साहित्यिक पुस्तकों (कहानी, कविता, उपन्यास, आत्मकथा और लघुकथा) का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित जिनमें 8 पुस्तकें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत से प्रकाशित। कुछ कविताओं और कहानियों का हिन्दी से पंजाबी में अनुवाद प्रकाशित।

 हिन्दी की प्रसिद्ध कथा मासिक ‘कथादेश’ के जुलाई 2000 में प्रकाशित ‘पंजाबी कहानी विशेषांक’ में 90 प्रतिशत से अधिक अनुवाद-कार्य में विशेष सहयोग। कैनेडा से प्रकाशित होने वाली हिन्दी प्रचारिणी सभा की अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका ‘हिन्दी चेतना’ के पंजाबी कहानी विशेषांक ‘पाँच देशों की पंजाबी कथाएँ’ (अप्रैल-जून 2016) तथा हिन्दी के जानी-मानी पत्रिका ‘मंतव्य’ (लखनऊ) के अंक -9 के ‘पंजाबी कहानी अंक’ का अतिथि संपादन एवं अनुवाद, जिसमें देश-विदेश की उत्कृष्ट 24 पंजाबी कहानियों और उससे संबंधित आलेखों का अनुवाद कार्य भी शामिल।


सम्मान : अनुवाद के लिए भारतीय अनुवाद परिषद, नई दिल्ली के “डॉ. गार्गी गुप्त द्विवागीश पुरस्कार 2016-17” से सम्मानित। लघुकथा लेखन व अनुवाद के लिए ''माता शरबती देवी स्मृति पुरस्कार 1992'', ''मंच पुरस्कार, 2000'', ''श्री बलदेव कौशिक स्मृति सम्मान-2013'’। ‘रंग बदलता मौसम’ कहानी के लिए राजस्थान पत्रिका द्वारा ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार, 2011’ ।


***


https://www.facebook.com/दस्तक-संवाद-104405177946085/

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विनोद दुआ सा कोई नहीं

 जाना तो एक दिन सबको है पर इस तरह कोई छोड़ जाए, रूला जाए तो कैसे कोई सहे. कैसे मान लें कि जिस व्यक्ति को देखते देखते टीभी पत्रकारिता सीखे, ज...