सोमवार, 23 नवंबर 2020

तीसरी कसम की कसम / भारत यायावर

 तीसरी कसम उर्फ़ या अर्थात्?/ भारत यायावर 





उर्फ़ और अर्थात् दोनों भिन्न-भिन्न अर्थों के व्यंजक शब्द हैं।


 फणीश्वरनाथ रेणु ने अपनी प्रसिद्ध कहानी ' तीसरी कसम अर्थात् मारे गए गुलफाम ' का सृजन परती परिकथा के लेखन के बाद किया था।


इस कहानी में उनकी सृजनात्मक प्रतिभा का चरमोत्कर्ष दिखाई देता है।


कथा की सूक्ष्म बारीकियों से युक्त यह कहानी बार-बार पढ़ी जाकर भी हर बार अपनी नई अनुगूंज से अंतर्मन को झकझोर देती है।


 मरे हुए मुहूर्तों की आवाज़ पीछा करती रहती है।


मन के मीत का मिलना दुर्लभ संयोग है और बिछड़ जाने की पीड़ा ज़िंदगी भर सालती रहती है।


 तीसरी कसम कहानी के शीर्षक के साथ प्रारम्भ से यह विडंबना रही है कि जब यह कहानी " अपरम्परा " पत्रिका में पहली बार (१९५८)छपी और १९५९ में  फणीश्वरनाथ रेणु के पहले कहानी-संग्रह " ठुमरी " में संकलित हुई तो रेणु जी ने उर्फ नहीं अर्थात का प्रयोग किया था। मैंने भी अर्थात् का ही हर जगह प्रयोग किया है। किन्तु मोहन राकेश, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर, रवीन्द्र कालिया , महेश दर्पण से लेकर अनेकानेक लेखक और संपादक उर्फ के दीवाने हैं और  "तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम" ही लिखते-बोलते और छापते रहे। आलोचक गण भी उर्फ ही लिखते हैं।सभी का मानना है कि अर्थात की जगह उर्फ ही अच्छा लगता है।


   अर्थात् का अर्थ होता है यानी या दूसरे शब्दों में।अर्थात् का अर्थ है मतलब ।तीसरी कसम का मतलब ही है गुलफाम का मारा जाना । तीसरी कसम यानी मारे गए गुलफाम।तीसरी कसम, ही दूसरे शब्दों में, मारे गए गुलफाम है।


   उर्फ़ का अर्थ होता है : अधिक प्रचलित या प्रसिद्ध नाम,पुकारू या बांग्ला में कहें डाकनाम, उपनाम को भी उर्फ कहते हैं। यह एक अरबी भाषा का शब्द है जो हिंदी में भी प्रचलित है।मेरा सर्टिफिकेट का नाम भारत कुमार सिंह है, लेकिन मैं जातिवाचक और दबंगई से भरपूर सिंह को अपने मूल नाम से हटाकर और यायावर जोड़कर भारत यायावर लिखने लगा। मेरे बेटों के उपनाम भी यायावर हैं। इस तरह जब मैं मूलनाम लिखता हूं तो साथ में उर्फ भारत यायावर भी लिखता हूँ ।


  फणीश्वरनाथ रेणु भाषा के मर्मज्ञ थे।उनका लेखन बेहद अर्थव्यंजक है। इस कहानी के शीर्षक में ही अर्थ की कितनी बारीकी है।


   हिरामन दो बार भीषण मुसीबत में फंसता है और कसम खाता है कि चोरबाजारी का सामान तथा बांस अपनी बैलगाड़ी में नहीं ढोएगा। हिरामन भोलाभाला इन्सान है। वही गुलफाम है। गुलाब की तरह पवित्र, मासूम ! तीसरी कसम वह प्रेम में घायल होकर खाता है। मारे गए गुलफाम क्योंकि उसे उल्फत भी रास नहीं आई। घनानंद के शब्द लेकर कहें कि अत्यंत सीधे प्रेम के रास्ते पर वह चलता है। जहां झूठ-फरेब नहीं। कोई सयानापन नहीं। नारी के प्रति उसमें उदात्त मानवीय संवेदना है।प्रेम के अनुपम अनुभव से आप्लावित हृदय की करुण पुकार के रूप में उसकी यह तीसरी कसम है। यह उसके बुझे मन और भावनाओं के आहत होने से आर्तनाद के रूप में स्थापित तीसरी कसम है। इस मारे गए गुलफाम का तात्पर्य है तीसरी कसम।


   रेणु के चाहने वालों की संख्या बहुत है।उनसे मेरा आग्रह है कि तीसरी कसम और मारे गए गुलफाम के बीच में अर्थात अवश्य लगाएं।

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