रविवार, 22 नवंबर 2020

शौकत आज़मी कि याद में

 कामरेड शौकत आजमी को लाल सलाम/ कबीर  (यूपी )

शत शत नमन


प्रगतिशील लेखक संघ के अग्रणी नेता, सुप्रसिद्ध शायर व कम्युनिस्ट आंदोलन के महत्पूर्ण अगुवा कैफी आजमी की पत्नी शौकत आजमी आज ही के दिन इस दुनिया छोड़कर दूसरी दुनिया को रुखसत हुई थी ।

जब कैफी आजमी ने यह शायरी पढनी शुरू कि--

'कद्र अब तक तेरी तारीख ने जानी ही नहीं, तुझमें शोले भी हैं बस अश्क फिशानी ही नहीं। तू हकीकत भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं, तेरी हस्ती भी है इक चीज जवानी ही नहीं। अपनी तारीख का उन्वान बदलना है तुझे उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे...।'


हैदराबाद के एक मुशायरे में कैफी आजमी ने जैसे ही अपनी मशहूर नज्म 'औरत' को सुनाया, उस समय अपने भाई के साथ मुशायरे में पहली सफ (लाइन) में बैठीं शौकत, कैफी पर अपना दिल हार बैठीं। इस इश्क में वह यह भी भूल गईं कि उनकी मंगनी किसी और से हो चुकी है। अपनी मोहब्बत में उन्होंने हर इम्तेहान को पास किया और आखिर में शौकत, शौकत आजमी बन गईं। आजमगढ़ के फूलपुर के मेजवां में जन्मे मशहूर शायर, लेखक व गीतकार कैफी आजमी की पत्नी, मशहूर सिने तारिका शबाना आजमी और कैमरामैन बाबा आजमी की मां शौकत आजमी की मां थी।

शौकत आज़मी भी इप्टा के आयोजनों में काफी सक्रिय रहीं. उन्होंने इप्टा के कई नाटकों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं और इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

शौकत आजमी अभिनेत्री की भूमिका के अलावा मजदूर किसान आंदोलन को समर्पित सच्ची कम्युनिस्ट थी ।

शत शत नमन

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