बुधवार, 30 सितंबर 2020

महात्मा गाँधी पर दो ग़ज़लें / डॉ. वेद मित्र शुक्ला

 *महात्मा गाँधी पर केंद्रित दो ग़ज़लें* 

- डा. वेद मित्र शुक्ल 

सहायक प्रोफ़ेसर, अंग्रेजी विभाग

राजधानी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय

राजा गार्डेन, नई दिल्ली – 110015

मोब.: 9599798727 

(1)

खुद को ही जिसने होम किया उसका तो जीवन यज्ञ रहा,

अंतिम जन को जो जान गया सच में वह इक सर्वज्ञ रहा।


अपने तो अपने ही थे पर दूजों की भी परवाह रही,

दुश्मन के अच्छे भावों को जो समझ सका मर्मज्ञ रहा।


जिसने जीवन में सत्य, अहिंसा और प्रेम को सीख लिया,

फिर कौन ज्ञान जो नहीं रहा, वह इस जग में तत्वज्ञ रहा।


जो कुछ भी है उस मालिक का फिर लेन-देन को क्यों झगड़े,

दुनियावी लाभ-हानि की चिंता को कब वह गणितज्ञ रहा।


जन-जन की सेवा को जिसने हरि की सेवा था मान लिया,

उसको जग भुला सके कैसे, युग बीते किन्तु कृतज्ञ रहा।


(2)

गाँधी जैसा बनते-बनते जिन्ना और जवाहर बनते,

बिरले ही होते हैं जो कुछ सत्ता से हो बाहर बनते।


बातें करना राजा से यों आँख दिखाकर कहाँ सरल पर,

बातें करते आँख मिला जो घोर निशा में दिनकर बनते।


दुनियादारी छोड़ विरागी और संत बनना आसां है,

पर, गाँधी सा होंगे कितने जो जग में ही रहकर बनते।


बुद्ध हुए थे या फिर गाँधी जिनकी दुनिया में तो साहिब,

लोग जरायम छोड़ा करते और अहिंसक नाहर बनते।


सोचो कुछ करने को जब भी सच्चाई इक पैमाना हो,

कहते सच तो शिव होता है औ शिव से सब सुंदर बनते।


अपने अंतरतम की सुनकर धीरे ही पर चलते कुछ तो,

क्यों लोगो के हाथों में हम बस इक बेबस मोहर बनते।

18 टिप्‍पणियां:

  1. शानदार अभिवयन्जना है आपकी। आप स्तुत्य हैं।

    जवाब देंहटाएं
  2. भावपूर्ण और ज्ञान का बोध कराती हुई दो संपूर्ण रचनाएं।
    सराहनीय गुरु जी।
    - आपका शिष्य दीपक

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय दीपक, धन्यवाद। आप स्वयं कवि हैं आपके शब्द मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

      हटाएं
  3. महात्मा गांधी जी की जयंती पर उनके आदर्शों पर, इससे सुंदर भावाव्यक्ति और श्रद्धांजलि नहीँ हो सकती।

    जवाब देंहटाएं
  4. गांधी जयंती पर आपकी इन दो गजलों ने गांधी जी को चरित्रार्थ कर दिया।
    हार्दिक बधाई सर 🙏

    जवाब देंहटाएं
  5. गांधी जी को जानने का सफल प्रयास

    जवाब देंहटाएं