मंगलवार, 18 अगस्त 2020

धोनी की धमक बनी रहेगी हमेशा/ उदय वर्मा

 स्वतंत्रता दिवस पर जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर देश को कठिन से कठिन चुनौतियों पर विजय पाने का मंत्र दे रहे थे, तब भारत को क्रिकेट में सबसे ज्यादा विजय दिलाने वाले कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह रहे रहे थे। प्रधानमंत्री के भाषण में अगर ओज और भविष्य के सपने थे तो धौनी की घोषणा में संवेदनाओं की ऐसी नमी थी, जिसे देशवासियों ने भरे मन से स्वीकार किया। वैसे अनुमान लगाया गया था कि धौनी विश्व कप के बाद कभी भी अपने सन्यास की घोषणा कर कर सकते हैं, लेकिन संभवत: वह इस वर्ष विश्व कप टी 20 खेलना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने सन्यास की घोषणा रोक रखी थी । कोरोना के कारण जब यह टूर्नामेंट स्थगित कर दिया तब उन्होंने अपना बल्ला और गलब्स टांगने में ज्यादा देर नहीं की। धौनी की घोषणा के बाद धाकड़ बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी उनका अनुसरण किया और अपने सन्यास का ऐलान कर दिया। वैसे दोनों आईपीएल खेलेंगे और क्रिकेट प्रेमी उनके खेल का लुत्फ उठा सकेंगे।

   महेन्द्र सिंह धौनी का अवतरण ऐसे समय में हुआ था, जब भारतीय टीम में स्टार खिलाड़यों की भरमार थी। सौरव गांगुली और सचिन तेन्दुलकर टीम को जीतने की कला में पारंगत बनाने में जुटे थे और भरतीय टीम एक नये रूप में ढल रही थी। ऐसे में धौनी का भारतीय टीम में आगमन जितना रोमांचक था उतनी ही उपलब्धियां से भरा उनकी कप्तानी का दौर रहा। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम न केवल टेस्ट में नम्बर वन बनी, बल्कि टी-20 और वन-डे विश्व कप जीत कर विश्व क्रिकेट की दुनिया दे।को चकाचौंध कर दिया।अपने चौदह वर्षों के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जीवन में धौनी एक अच्छे नेतृत्वकर्ता, बेहतर बल्लेबाज, श्रेष्ठ विकेटकीपर और विनम्र इंसान के रूप में अपनी अलग छवि गढ़ने में भी सफल रहे ।

   लीक से हट कर सोचने, खेलने और फैसले लेने के हौसलों के कारण ही उन्होंने अपने खेल सफर में सफलताओं के एक के बाद एक कई कीर्तिमान स्थापित किये। टी - 20 , वन डे विश्व कप और चैम्पियन ट्राफी विजय उनकी बड़ी उपलब्धियों की कहानी खुद कहती है। पिछले एक दशक में भारतीय टीम एक नये आत्म विश्वास से लैस हुयी है और इसमें धौनी का बड़ा योगदान रहा है। धौनी क्रिकेट की परम्परा में नहीं बंधते, वह उन्मुक्त रहना चाहते हैं, जिसकी इजाजत क्रिकेट नहीं देता। फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि वह सम्पूर्ण क्रिकेटर नहीं हैं। बल्कि यह कहना ज्यादा संगत होगा कि उनसे एकाकार हो कर ही क्रिकेट सम्पूर्ण होता है। वस्तुतः भारत की नयी युवा टीम को गढ़ने में और टीम इंडिया को बुलन्दियों तक पहुंचाने में धौनी की उल्लेखनीय भूमिका और योगदान उन्हें भारत के सफल क्रिकेट कप्तानों और खिलाड़ियों की कतार में सबसे आगे खड़ा करने के लिए पर्याप्त है। 

 धौनी को अपने अन्य समकलीनों से अलग इस लिये कहा जा सकता है क्योंकि वह प्रतिकूल परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने में कुछ ज्यादा ही उस्ताद हैं। उन्हें रन बना कर मैच जीताने वाले खिलाड़ियों की  श्रेणी में रखा जाता है। यही कारण है कि उन्हें भारत के सर्वोत्तम फिनिशर के रूप में भी पहचाना जाता है और कहा जाता है कि धौनी जैसा कोई नहीं। धौनी जिस कालखंड के खिलाड़ी हैं, उसे क्रिकेट के इतिहास में धौनी युग के नाम से जरूर जाना जायेगा।

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