शनिवार, 25 जुलाई 2020

जननायक दशरथ मांझी


माउन्टेनमैन के रूप में ख्यात
जननायक #दशरथ_मांझी के हाथों लोकार्पित, मेरे जनगीत-संग्रह #रावण_ऐसे_नहीं_मरेगा के लोकार्पण की रिपोर्ट आप मित्रों के ध्यानार्थ  ....

गया (18 फरवरी, 2001) : स्थानीय युवा कवि प्रवीण परिमल रचित जनगीत संग्रह #रावण_ऐसे_नहीं_मरेगा का लोकार्पण साहित्यकार एवं किसान- नेता #त्रिवेणी_शर्मा_सुधाकर की अध्यक्षता में जननायक #दशरथ_मांझी  के हाथों 'द नॉर्थ फेस पब्लिक स्कूल', गया के प्रांगण में संपन्न हुआ।
    जनसाहित्य का लोकार्पण श्रमजीवियों के एक रहनुमा द्वारा कराए जाने को एक नई परंपरा की शुरुआत बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि रावण एक प्रवृत्ति है जो लंकापति के सर्वनाश के बाद भी जीवित है।
     कार्यक्रम को संचालित करते हुए कवि अरुण हरलीवाल ने कहा कि परिमल के जनगीतों का जनसंस्करण वांछित दिशा में एक सार्थक पहल है और इसे एक जननायक द्वारा लोकार्पित कराना अबतक की संभवत: पहली घटना है।
    जनकवि नागार्जुन द्वारा बस्तियों में घूम- घूमकर या ट्रेनों में सफ़र करते हुए  अपनी कविताओं को आम जनता के बीच पहुँचाने के बारे में चर्चा करते हुए प्रलेस के जिला इकाई के सचिव कृष्ण कुमार ने कहा कि परिमल कविता को आम जनता का हथियार बनाने का काम कर रहे हैं।
    हिंदी साहित्य सम्मेलन, गया के महामंत्री डॉ राधानंद सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्यात दशरथ मांझी द्वारा लगभग 30 वर्षों में पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि कवि- कर्म भी पत्थर तोड़ने जैसा ही है और परिमल इस दिशा में खरे उतरते हैं। उन्होंने आगे कहा कि परिमल की कविताओं में संतृप्त संवेदनशीलता है।
    जलेस के उपसचिव सत्येंद्र कुमार (अब प्रलेस में) ने इस गोष्ठी को एक ऐतिहासिक घटना बताते हुए कहा कि ऐसे समय में जबकि कला का बाजारीकरण किया जा रहा है, अधिकांश महानायक बिक चुके हैं अथवा खरीदे जा चुके हैं, हमें अपना महानायक अपने बीच से ही तलाशना होगा।
     जलेस के सचिव कृष्ण चंद्र चौधरी ने एक जननायक द्वारा जनगीतों के इस जनसंस्करण को लोकार्पित किए जाने को एक महत्वपूर्ण घटना बताया और कहा कि परिमल की कविताओं में जनसंघर्ष और जनआस्था की स्पष्ट प्रतिध्वनि है।
     वयोवृद्ध साहित्यकार राधा कृष्ण राय ने आयोजित गोष्ठी को गया जिले के साहित्य के इतिहास में एक स्वर्णिम पृष्ठ की संज्ञा देते हुए कहा कि लोकार्पित पुस्तक की रचनाएँ देश के आम आदमी की धड़कन हैं। उन्होंने यह भी विश्वास प्रकट किया कि संकलित सभी रचनाएँ  जनता के हाथों तक नौरत्न के रूप में पहुंचेंगी।
    प्रलेस के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह 'सुरेंद्र' ने कहा कि परिमल की यह पुस्तक साहित्य और आम जनता के बीच की दूरी को बहुत हद तक कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
   मुख्य अतिथि #दशरथ_मांझी ने कहा कि वे ही शब्द साहित्य हैं जिनसे जनता को ताकत मिले और परिमल की यह किताब जमीनी जनता के लिए एक आवश्यक अस्त्र है।
     इस अवसर पर डॉ रामकृष्ण मिश्र, डॉ शिवशंकर प्रसाद, महबूब नज़र, नदीम जाफ़री, अवधेश प्रभास, फ़िरदौस गयावी, सुमंत, विजय कुमार सिन्हा, नागेंद्र पाठक नटवर, उदय शंकर, कुमार कांत, दिलीप कुमार पाठक एवं हरेंद्र गिरि 'शाद' जैसे साहित्यकारों के अलावा शंभू शरण, अभय,  विमलेन्दु चैतन्य, आनंद मिश्रा तथा श्याम भंडारी जैसे पत्रकारों एवं छायाकारों की उपस्थिति रही।
         ▪अरुण हरलीवाल

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