शनिवार, 25 जुलाई 2020

एनकाउंटर कथा :: बात दूर तक जाती क्यों नहीं / दयानंद पाण्डेय




बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी

पुलिस इनकाउंटर से जान बचा कर मुलायम सिंह यादव इटावा से साइकिल से खेत-खेत दिल्ली भागे  वाली पोस्ट से जो भी लोग असहमत हैं , उन से एक ही बात कहनी है कि गाली-गलौज करने के बजाय , मुलायम सिंह यादव के पास जाएं। मुलायम सिंह यादव अभी जीवित हैं। के सी त्यागी अभी जीवित हैं। शरद यादव अभी जीवित हैं। शिवपाल सिंह यादव अभी जीवित हैं। और भी तमाम लोग इस घटना के साक्षी हैं। अकेले मैं ही नहीं जानता इस बात को। इन सभी लोगों से संपर्क कर लें। अपने नेता मुलायम सिंह यादव से संपर्क कर लें। मुलायम सिंह इन घटनाओं से कभी इंकार नहीं कर सकते। किसी सूरत इंकार नहीं कर सकते। मुलायम सिंह यादव की हिस्ट्री शीट और डकैती ,  हत्या के 32 मामलों की खबर अक्टूबर , 1984 में इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता दोनों में पहले पेज पर छपी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के दफ्तर जा कर उसे देख लें।

18 फरवरी , 1998 को एक भयंकर सड़क दुर्घटना के कारण वर्ष 2000 में डाक्टरों की सलाह पर मैं रिपोर्टिंग से अलग हो गया। यह दुर्घटना भी मुलायम सिंह के कवरेज में जाते समय हुई। मुलायम सिंह यादव तब संभल से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। मेरे साथ उस दुर्घटना में हिंदुस्तान के जय प्रकाश शाही और अंबेसडर कार के ड्राइवर की एट स्पाट मृत्यु हो गई थी। सीतापुर के खैराबाद में ट्रक और मेरी अंबेसडर कार की आमने-सामने की टक्कर थी। मैं भी मौत से लड़ कर लंबे इलाज के बाद लौटा था। 22 बरस हो गए इस बात को । तब से कहीं किसी नेता से नहीं मिला। इधर-उधर जाने की , परिक्रमा की मेरी आदत नहीं रही कभी । इस बीच सिर्फ एक बार मुलायम सिंह यादव से जुलाई , 2015 में भेंट हुई है। जान लीजिए कि मुलायम सिंह यादव के साथ कई यात्राएं की हैं। दर्जनों इंटरव्यू किए हैं। फिर भी मुलायम सिंह यादव से कभी कुछ लिया नहीं है। एक पैसे की कोई कृपा नहीं ली है। न कोई एक काम करवाया है। उलटे उन्हें दिया ही है।

अखिलेश यादव की तो परछाई भी नहीं देखी है। और यह बाप-बेटे किसी स्वाभिमानी लेखक , पत्रकार को दे भी क्या सकते हैं भला। हां , मुलायम सिंह यादव अपनी तमाम कमियों और कमज़ोरियों के बावजूद एक चीज़ देना जानते हैं , वह है सम्मान। सम्मान मुझे भी वह देते हैं। भटके हुए , गाली-गलौज करने वाले यादव ब्रिगेड को यह बात अच्छी तरह जान लेना चाहिए।

फिर चुनौती दे कर कह रहा हूं , यादव ब्रिगेड से कि अगर इस पोस्ट में कोई एक बात भी उन्हें गलत लगती है तो अदालत में मुझ पर मुकदमा करें। मुकदमा करेंगे तो पाएंगे कि अभी तक जो तमाम बातें ढंकी-छुपी हैं , वह भी बाहर आएंगी। देर-सवेर वैसे भी आएंगी ही। भगवान राम और कृष्ण की बातें नहीं छुपीं तो मुलायम सिंह यादव या कोई और क्या चीज़ हैं। अभी उन के अरबों रुपए के आर्थिक साम्राज्य की , कई-कई परिवार की कहानियां आनी शेष हैं। तो यादव ब्रिगेड के लोगों , होश में रहिए। मर्यादित भाषा में रहिए। नहीं बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी।

रही बात सत्ता की तो मुलायम सिंह यादव के परिवार में सत्ता में लौटने की आस अब वैसे ही है जैसे भरी रात में सूर्योदय की आस। अपनी तमाम नालायकी में अखिलेश यादव नामक मुलायम सिंह के पुत्र ने डस लिया है , सत्ता का योग। तो होश में रहिए। अभद्र भाषा और अमर्यादित शब्द इस्तेमाल कर मुलायम सिंह यादव का और नुकसान मत कीजिए। उन की बुढ़ौती खराब करने के लिए इतनी उछल-कूद मत कीजिए। यह विनम्र सलाह है। बाकी आप का अपना विवेक है , अपनी लंठई है। मन करता है तो चालू रखिए। फिकर नाट !

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