रविवार, 26 जुलाई 2020

कारगिल कथा


Navbharatimes/ Dil se Delhi

कारगिल के वीर और विलेन कौन

विवेक शुक्ला

अगर बात कारगिल युद्ध की होगी तो शहीद कैप्टन अनुज नैयर, कैप्टन हनीफु्द्दीन, विजयंत थापर जैसे भारतीय सेना के जांबाज  वी रों की याद तो आएगी ही।  इनके शौर्य को कौन भूला सकता है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, धौला कुआं के छात्र रहे कैप्टन अनुज नैयर के नाम पर जनकपुरी में एक सड़क है। जाट रेजिमेंट के कैप्टन अनुज नायर नेकारगिल जंग में टाइगर हिल्स सेक्टर में अपने  साथियों के घायल होने के बाद भी मोर्चा सम्भाले रखा था। उन्होंने दुश्मनों को धूल में मिलाकर इस सामरिक चोटी को शत्रु के कब्जे से मुक्त करवाया था। उन्होंने टाइगर हिल्स सेक्टर की एक महत्वपूर्ण चोटी ‘वन पिंपल’ की लड़ाई में अपने 6 साथियों के शहीद होने के बाद भी मोर्चा सम्भाले रखा था। गम्भीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने अतिरिक्त कुमुक आने तक अकेले ही दुश्मनों से लोहा लिया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना इस सामरिक चोटी पर  वापस कब्जा करने में सफल रही।
 इस वीरता के लिए कैप्टन अनुज को मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े सैनिक सम्मान ‘महावीर चक्र’ से नवाजा गया।  कैप्टन अनुज नैयर का परिवार जनकपुरी में ही रहता है । वे इधर ही पले-बड़े। वो 7 जुलाई,1999 को दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे। उनके पिता दिल्ली यूनिवर्सिटी में टीचर थे।

मयूर विहार में है कैप्टन हनीफु्द्दीन मार्ग

और मयूर विहार में है कैप्टन हनीफु्द्दीन  मार्ग। वे मयूर विहार में ही पले-बढ़े थे। कैप्ट्न हनीफु्द्दीन राजपूताना राइफल्स् के  अफसर थे। शिवाजी कॉलेज से मिस्टर शिवाजी का खिताब जीतने वाले कैप्टन हनीफु्द्दीन वेस्टर्न म्यूजिक में दिलचस्पी रखते थे।
 कैप्टन हनीफु्द्दीन  ने करगिल की जंग के समय तुरतुक में शहादत हासिल की थी। करगिल के तुरतुक की ऊंची बर्फ से ढंकी पहाड़यों पर बैठे दुश्मन को मार गिराने के लिए हनीफु्द्दीन गोलाबारी के बावजूद आगे बढ़ते रहे थे। उनके नाम पर मयूर विहार में एक सरकारी स्कूल भी है।

  नोएडा के सेक्टर 18 में कैप्टन विजयंत थापर मार्ग है। वे करगिल युद्ध में देश के लिए कुर्बानी देने वाले सबसे कम उम्र के जांबाज थे। और आपको लोधी रोड़ में मिलेगा स्कावड्रन लीडर अजय आहूजा पार्क। उस युद्ध के समय अजय आहूजा को जिम्मेदारी दी गई कि वे एलओसी पर पाकिस्तानी सेना के ठिकानों की जानकारी लेकर आएं। अजय आहूजा अपने मिग-21 विमान से एलओसी के ऊपर उड़ने लगे। इस क्रम में स्कावड्रन लीडर अजय आहूजा पाकिस्तान की सरहद में दाखिल हो गए। तब ही एक बम का गोला उनके विमान से टकराया। वे पाकिस्तानी सीमा में ही कूद पड़े। वहां पर शत्रु से दो-दो हाथ करते हुए वे 27 मई 1999 को शहीद हो गए।

 खैर,राजधानी में ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग संभवत: पहली सड़क है जो किसी योद्धा के नाम पर रखी गई। ये बात 1963 की है। चीन के साथ युद्ध के बाद लक्ष्मी बाई नगर रोड हो गई ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग। इसका नामकरण करने के लिए देश के तब के रक्षा मंत्री यशवंत राव चव्हाण खुद आए थे।

कारगिल का विलेन भी दिल्ली वाला

यह याद रखना होगा कि कारगिल में पाक  घुसपैठ की योजना को अन्तिम रूप देने वाला भी दिल्ली वाला था । उसका नाम  परवेज़ मुशर्रफ़ था । उसके पिता भारत सरकार  में नौकरी करते थे और उन्हें टैगोर रोड में सरकारी घर मिला हुआ था ।
 मुशर्रफ़ का परिवार  1947 में  कराची चला गया था । कारगिल की घुसपैठ के बाद वो भारत के सरकारी दौरे पर दिल्ली आये थे  2001 में । तब वो दरिया गंज में स्थित अपने जन्म स्थान में भी गये थे । वो भारत आने के तुरंत बाद राजघाट भी गये थे। राजघाट में बापू की समाधि पर फूल चढ़ाने के बाद वहाँ पर रखी विज़िटर  बुक पर लिखते वक़्त  उनके हाथ कांप रहे थे। उस दिन दिल्ली में लगातार बारिश हो रही थी । वो जुलाई का ही महीना था। वो 14 जुलाई को दिल्ली आए थे। vivek Shukla

 pictures Captain Anuj Nayar and Captain Hanifuddin.
   सम्पादित लेख पिछ्ले साल पब्लिश हुआ था।



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