गुरुवार, 23 जुलाई 2020

कृष्ण मेनन का रास्ता / विवेक शुक्ला


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कृष्ण मेनन का रास्ता

साउथ- नॉर्थ ब्लॉक और संसद भवन के डिजाइनर हरबर्ट बेकर, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नाडीज जैसी शख्सियतें रही हैं  इस सड़क के दोनों तरफ बने सरकारी बंगलों में। इसका पहले नाम हैस्टिंगस रोड था। फिर कर दिया गया कृष्ण मेनन मार्ग। भारत के पूर्व रक्षा मंत्री वी.के.कृष्ण मेनन के नाम पर।

सड़क का नाम बदलने के साथ ही कृष्ण मेनन की आदमकद मूर्ति भी स्थापित लग गई। क्या इमली,नीम और जामुन के पेड़ों से लबरेज इस सड़क का नाम कृष्ण मेनन मार्ग होना चाहिए, ये सवाल पूछने का मन करता है जब भारत-चीन की फौजें आमने- सामने होती है?

चीन से 1962 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना की कमजोर तैयारियों के लिए कृष्ण मेनन को खलनायक माना गया था। उस जंग में हमारे सैनिक कड़ाके की ठंड में पर्याप्त गर्म कपड़े पहने बिना लड़े थे। उनके पास दुश्मन से लड़ने के लिए आवश्यक शस्त्र भी नहीं थे।

जंग में भारत उन्नीस रहा था। चीन ने भारत के एक बड़े हिस्से पर कब्जा किया। फिर विजय लक्ष्मी पंडित और गोबिन्द बल्लभ पंत जैसे कद्दावर कांग्रेसियों की मांग के आगे प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को झुकना पड़ा।  मेनन की नेहरू कैबिनेट से छुट्टी हुई। ये सारी बातें अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।

जयराम रमेश ने दि मैनी लाइव्स ऑफ वी.के.कृष्ण मेनन में लिखा है कि मेनन जब 1957 में रक्षा मंत्री बने तो देश में उनकी नियुक्ति का स्वागत हुआ था। उम्मीद बंधी कि मेनन और सेना प्रमुख कोडन्डेरा सुबय्या थिमय्या की जोड़ी रक्षा क्षेत्र को मजबूती देगी। पर यह हो ना सका मेनन के एरोगेंट व्यवहार के कारण। चीन युद्ध के आठ सालों के बाद कृष्ण मेनन के 10 अक्तूबर, 1974 के निधन तुरंत बाद उनके नाम पर एक अति विशिष्ट क्षेत्र की सड़क समर्पित कर दी गई।

तब की सरकार के गृह मंत्रालय से नई दिल्ली नगर पालिका (एनडीएमसी) को सूचित कर दिया गया कि हैस्टिंगस रोड का नाम कृष्ण मेनन मार्ग होगा। इसलिए आवश्यक कदम उठा लें। आवश्यक कदमों में शामिल होता है साइन बोर्डो पर लिखे पुराने नाम के स्थान पर नए नाम लिखना आदि।

दिल्ली तब चौंकी अवश्य थी जब सरकार का ये फैसला आया था। अभी हाल ही भारत-चीन के बीच झड़प हुई। हमारे 20 शूरवीर शहीद हो गए। क्यों ना उनमें से किसी के नाम पर कृष्ण मेनन मार्ग का नाम रख दिया जाए? राजधानी में 1962 की जंग के एक नायक ब्रिगेडियर होशियार सिंह के नाम पर लक्ष्मीबाई नगर में एक सड़क 1963 से है।

 अगर सर्वानुमति बन जाए तो कृष्ण मेनन मार्ग का नाम 1962  की जंग के किसी योद्धा के नाम पर रखने पर विचार हो सकता है।
बात यहां पर ही खत्म नहीं होती। अपनी राजधानी में 1984 के दंगों के एक बड़े गुनाहगार धर्मदास शास्त्री के नाम पर पटेल नगर में एक सड़क है। जरा अपने दिल पर हाथ रखकर पूछें कि क्या ये सही है ?
Vivek Shukla 23 July 2020

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