शुक्रवार, 19 जून 2020

चीन के खिआफ़ ज़ब अटलजी उबल पड़े /विवेक शुक्ला






जब अटल जी ने 1962 में भेड़ों के
साथ चीनी एंबेसी को घेरा


अटल बिहारी वाजपेयी  ने चीन के साथ 1962 में जंग के समय चीनी दूतावास पर दर्जनों भेड़ो के साथ प्रदर्शन किया था। दरअसल तब चीन ने भारत पर एक हास्यास्पद आरोप लगाया था कि उसने सिक्किम की सीमा से 800 भेड़ें चुरा ली है।  चीन ने भारत से उन भेड़ों को वापस करने की मांग की थी। चीन की इस मांग के जवाब में अटल जी ने  प्रदर्शन की अगुवाई की थी। वे तब तक लोकसभा के सदस्य थे और अपने ओजस्वी भाषणों के चलते देशभर में अपनी पहचान बना चुके थे। उन दिनों साउथ दिल्ली के लक्ष्मी बाई नगर में भास्कर राममूर्ति रहते थे। उन्हें याद है कि उनके  एरिया के भी बहुत से लोगों ने अटल बिहारी वाजपेयी के उस प्रदर्शन भी भाग लिया था। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे  कि विस्तारवादी चीन भेड़ों के मसले पर विश्व युद्ध चाहता है। हजारों  प्रदर्शनकारियों ने चीनी दूतावास के अंदर घुसने की भी कोशिश की थी। कई प्रदर्शनकारी 1960 मेें स्थापित चीनी दूतावास की दिवारों पर चीन के खिलाफ नारे भी लिख आए थे।

1962,सायरन, बंकर और लोधी रोड

दिल्ली की 60-65 वसंत देखी चुकी पीढ़ी भूली नहीं है चीन के साथ हुई 1962 की जंग। तब पंडारा रोड, सुंदर नगर, भारती नगर,लोधी रोड, करोल बाग़ जैसे तमामं इलाकों में स्थानीय लोग घरों के आगे बने पार्कों में जेड आकार की खाइयां बनाने लगे थे। लेखक और व्यंग्यकार रविन्द्र कुमार बताते हैं कि
वे तब 15 जनपथ पर रहते थे। तब केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ही सरकारी बंगलों के बाहर खाई ( बंकर) बना रही थी। उसी की तरफ से
 खिड़की दरवाजों पर काला पेंट कराया गया था और खिड़की दरवाजों के शीशों के ऊपर एक्स आकार का ब्राउन पेपर  चिपकाया गया था। अखबारों में साइरन के कोड आते थे और उसकी एक दो बार की ड्रिल भी याद है। छोटी अवधि का साइरन एलर्ट के तौर पर, तुरन्त लाइट्स ऑफ करें। रेडियो आदि बंद।

‘हकीकत’ और जंग में जीत के लिए प्रार्थनाएं

भोगल के एक बौद्ध विहार में नियमित रूप से सत्संग होता था जंग में भारत की जीत के लिए। उसमें शामिल होने वाले लोग रोज धन एकत्र करके  राष्ट्रीय रक्षा कोष को देते थे। बाकी मंदिरों,गुरुद्वारों,गिरिजाघरों और मस्जिदों में भी प्रार्थनाएं हो रही थीं।
 बॉलीवुड कहां पीछे रहने वाला था। चेतन आनन्द ‘हक़ीकत’ ले आये। दिल्ली इस फिल्म को देखने टूट पड़ी थी। इसकी पब्लिसिटी कुछ इसी तरह की गई थी कि चेतन आनंद ने सीमा  पर जाकर इस फिल्म की शूटिंग की है। कुछ दूर से सीन लिये भी थे सरहद के। । धर्मेन्द्र, सुधीर, मैकमोहन भूपेन्द्र, बलराज साहनी, जयंत, प्रिया राजवंश ने तहलका मचा दिया था। कैफी आज़मी ने कलम तोड़ देशभक्ति के गाने लिखे थे इसमें। ये फिल्म शीला और प्लाज़ा पर भी लगी थी । कहते हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो  ने चेतन आनंद से कहा, 'पुत्तर, 1962 के चीन युद्ध में हमारे पंजाब के कई जवान शहीद हो गए हैं, तुम शहीदों पर क्यों नहीं फिल्म बनाते?' चेतन आनंद ने कहा, 'शहीदों पर बनी फिल्म को कौन देखेगा और इसमें कौन पैसा लगाएगा?' कैरो ने कहा, 'यदि शहीदों पर फिल्म बनाई तो पूरा पंजाब तुम्हारे साथ खड़ा रहेगा। बोलो, फिल्म का बजट कितना होगा?' इसके बाद चेतन आनंद ने हकीकत बनाई थी।
Navbharatimes- vivek Shukla

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