मंगलवार, 19 मई 2020

अमृतसर अमरिंदर और आपरेशन BS / त्रिलोकदीप




जब मैं अमृतसर में कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिला तो वह शिरोमणि अकाली पार्टी मे थे। वहां वह आपेरशन ब्लू स्टार के बाद के हालात का जायज़ा लेने के लिए आये हुए थे। उनके साथ मेरा यह चित्र उसी समय का है। मैं ने जब उनसे पूछा कि आपका परिवार तो पुश्तैनी कांग्रेसी है और 1980 का लोकसभा  चुनाव भी आप कांग्रेस की टिकट पर जीते हैं तो उस पार्टी से विरिक्ति क्यों। उन्होंने कहा इसका बड़ा सीधा जवाब है कि ऑपेरशन ब्लू स्टार ने हर सिख की आत्मा को झिझोड़ दिया है और वह विरोधी औऱ विद्रोही तेवरों में आ गया है। इसलिए पहले मैं ने लोकसभा की मेम्बरशिप से इस्तीफा दिया, कुछ वक़्त तक आत्ममंथन करता रहा और उसके बाद मैंने अकाली पार्टी जॉइन की। मेरा यह मानना रहा है कि कड़े कदमों के उठाने से जब किसी समस्या का समाधान हो सकता हो  तो उसकी जगह फ़ौज को स्वर्ण मंदिर में भेजकर सिखों की भावनाओं को आहत करने की क्या ज़रूरत थी। राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह भी इस फौजी कार्रवाई से बहुत दुखी हैं लेकिन वह अपने जज़्बात ज़ाहिर नहीं कर सकते। इसके बात भी गाहेबगाहे उनसे मुलाकातें होती रहीं। कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रकाश सिंह बादल और सुरजीत सिंह बरनाला की सरकारों में मंत्री रहे। वहां भी उन्हें ऊब होने लगी तो उन्होंने  1991 में अपनी अकाली पार्टी (पंथक) का गठन किया।  उसकी टिकट पर चुनाव भी लड़ा लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। आखिरकार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी पंथक पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। उन्हें राजिंदर कौर भट्टल के स्थान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

एक बार फिर कांग्रेस में शामिल होकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी को मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह 2007 से 2012  तक पहली बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने। 2012 में चुनाव हार जाने के बाद हिम्मत नहीं हारी। वह अपने राज्य में पार्टी प्रमुख बने रहे औऱ कड़ी मेहनत कर 2017 का चुनाव शानदार तरीके से जीता। इसमें उन्होंने प्रशांत किशोर की रणनीति का भी अनुसरण किया। 117 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने 77 सीटों पर जीत हासिल की। इसीप्रकार 2019 के लोकसभा चुनाव में 13 में से 8 सीटों पर जीत दर्ज कर पार्टी का मनोबल बढ़ाया। इससे कांग्रेस पार्टी में कैप्टन साहब का रुतबा बढ़ गया। पार्टी का कोई भी बड़ा नेता उनकी अवहेलना नहीं कर सकता आज हालत यह है कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के विकल्प के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।

कोरोना का मुकबला जिस तरीक़े और सख्ती से  से कैप्टन अमरिंदर सिंह कर रहे हैं दूसरा शायद ही कोई मुख्यमंत्री कर रहा होगा। कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए जहां दूसरे हिस्सों में लॉकडौन लगाया गया वहां अमरिंदर सिंह ने पूरे पंजाब को कर्फ्यू के हवाले कर दिया। वह जानते थे कि किस तरह से पंजाब को कोरोना की मार से बचाया जा सकता है। विदेश से पंजाब में आने वाले लोगों की संख्या अधिक है। कैसे उन्हें पहले क़वारन्टीन में रखा जाये। बाद में नांदेड़ में हुज़ूर साहब से आने वाले श्रद्धालुओं पर सख्ती बरती गयी। इस बात की भी कोशिश हुई कि1पंजाब से मजदूर पलायन न करें। उन्होंने कुछ छोटे कारखाने शुरू करवा दिये और खेतों में फसल काटने में उनकी मदद ली गयी।ज़रूरतमंद लोगों के घर तक पुलिस को राशन पहुँचाने की ज़िम्मेदारी दी गयी।वैसे भी पंजाब के लोगों में प्रतिरोधक क्षमता बहुत है।वे लोग प्याज, लौंग, अदरक, लहसुन, हल्दी आदि का इस्तेमाल अपने खाने में बखूबी करते हैं। ये मसाले कोरोना के दुश्मन माने जाते हैं। उनका पुलिस को यह सख्त आदेश था कि किसी को तंग न करो लेकिन उन्हें एक जगह इकट्ठा मत होने दो। इस निर्देश का पंजाब में माकूल असर देखा गया। शायद यही वजह है कि पंजाब में कोरोना से ठीक होने वालों का प्रतिशत 50 के आसपास है। पहली बार 18 मई को पंजाब में लॉकडौन लगा है। लोगों में चहल पहल है लेकिन पुलिस फिर भी मुस्तैद है। कोरोना पर यह कप्तानी कंट्रोल भी अमरिंदर सिंह की मजबूत लीडरशिप का परिचायक माना जाता है।

पंजाब को मैंने बहुत कवर किया है दिनमान में रहते हुए विशेषकर। इन सारे अवसरों पर शम्मी सरीन मेरे साथ मेरे साये की तरह रहा।कैप्टन अमरिंदर सिंह से मैं उन्हीं की बदौलत मिल पाया। पहले इसके अकाली नेता संत हरचंदसिंह लोंगोवाल, संत जरनैल सिंह भिंडरावाले या तलवंडी अथवा तोहड़ा से मुलाकातें भी शम्मी सरीन के कारण ही सम्भव हो पायी थीं। आतंकवादियों के कई ठिकानों में वह  मेरे साथ जाया करते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के मेरे सहयोगी सुभाष किरपेकर की भी शम्मी पूरी मदद किया करते थे। उनका इससे बड़ा समर्पण और क्या होगा कि जिन दिनों गैरसिखों को पंजाब में निशाना बनाया जा रहा था शम्मी सरीन मेरे साथ कदम से कदम मिला कर चला करते थे। वह दिनमान और संडे मेल दोनो जगह मेरे सहयोगी रहे।  रिटायर होने के बावजूद  आज भी मुझे उनकी पहले जैसी ही आत्मीयता प्राप्त है। पंजाब में कोरोना के बारे में बहुत सी जानकारी मुझे उन्हीं से प्राप्त हुई है। आभार शम्मी सरीन। स्वस्थ रहो, यही मेरी दिली दुआ है। मुझे तुम पर गर्व है।

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