शनिवार, 16 मई 2020

रवि अरोड़ा की नजर में...






पीपीई किट लड्डू और चूरा

रवि अरोड़ा

एसके महेश्वरी वार्ड संख्या 94 यानी सूर्य नगर  क्षेत्र से भाजपा पार्षद हैं । इससे पूर्व उनकी पत्नी भी क्षेत्र से पाँच साल भाजपा पार्षद रही हैं । श्री महेश्वरी की गिनती शहर के चुनिंदा उद्यमी नेताओं में भी होती है । आजकल वे बहुत दुःखी हैं । उनका कहना है कि कोरोना संकट के समय में भी सरकारी विभाग गिद्ध बने हुए हैं । गिद्ध तो लाशों को खाता है मगर यह लोग ज़िंदा आदमियों को खा रहे हैं । हाल ही में उन्होंने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट लिखी और आरोप लगाया कि कोरोना से बचाव की पीपीई किट की टेस्टिंग के लिये ओर्डिनेंस फैक्टरी में सही उत्तम प्रोडक्ट के बावजूद भी उद्यमी लगभग एक-एक महीने से स्वीकृति का इंतज़ार कर रहे हैं जबकि दलालों के काम 2-3 दिनों में हो रहे हैं। बक़ौल उनके बिना रिश्वत के इस संकट में भी सरकारी तंत्र काम नहीं कर रहा है और अफ़सरों को रिश्वत भी कम से कम तीन लाख रुपये चाहिये । दुखी भाजपा पार्षद पूछते हैं कि क्या ये है मोदी व योगी की सरकार का जलवा ? वे बताते हैं कि उद्यमियों ने एन 95 मास्क पच्चीस रुपये में और सर्जिकल मास्क केवल दो रुपये में देने का प्रस्ताव दिया था सरकार को। उद्यमी इस कार्य को केवल देश की सेवा के रूप में करना चाहते थे। फिर भी उनसे रिश्वत माँगी जा रही है । भाजपा नेता का यह भी कहना है कि आज भी 32 से 40 परसेंट तक रिश्वत ली जा रही है । नाराज़ पार्षद कहते हैं कि देश के उद्यमियों के परम उत्पीड़न के बावजूद हो रहे काम का झूठा क्रेडिट लेना बन्द करे सरकारें।

अपनी बात कहने के लिये उसे दूसरे के मुँह में डालने की कभी मेरी आदत नहीं रही । ख़बर लिखते समय बेशक सामने वाले और पीड़ित का पक्ष ज़रूर उद्धृत करता हूँ मगर आज पूरी बात पीड़ित के हवाले से ही करने का मन है । क्या करूँ यदि एसा न करूँ तो आरोप लगेगा की मैं मनगढ़ंत बात कर रहा हूँ । मगर अब जब उद्यमी और भाजपा नेता ख़ुद यह बात कह रहा हो तो मुझे कोई सफ़ाई देने की भी ज़रूरत नहीं  है। यह नेता भी कोई छुटभैया नहीं है और दिग्गज केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह समेत अनेक बड़े लोगों में उनकी उठ-बैठ है ।

जनता को अपने आख़िरी सम्बोधन में मोदी जी ने कहा था कि आज भारत प्रतिदिन दो लाख पीपीई किट बना रहा है । मगर ग़ाज़ियाबाद के उद्यमी कहते हैं कि इससे अधिक तो हम इसी शहर में बना सकते हैं , बशर्ते कोई एसा हमें करने दे । बता दें कि जनपद में बारह उद्योग यह किट बनाने में सक्षम हैं । उद्यमी नेता ने बताया कि मानक के अनुरूप पीपीई किट तैयार करने मे नौ सौ रुपये की लागत आती है मगर सस्ती के चक्कर में बिना मानकों वाली किट सात-आठ सौ रुपये में सप्लाई की जा रही हैं । नगर में सिविल डिफ़ेंस, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और पुलिस इनकी ज़रूरतानुसार ख़रीद कर रही है । प्रावधान यह है कि किट का कपड़ा केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत पाँच कम्पनियों का ही हो और उसके साथ अच्छी क्वालिटी का चश्मा और दस्ताने , इस्तेमाल के बाद किट को डिस्पोस करने का बैग व जूतों का कवर भी उसके साथ हो मगर इन मानकों को दरकिनार किया जा रहा है । नियमानुसार पीपीई किट की सिलाई पर भी टेप लगाया जाता है और ज़िप की भी ओवरलेपिंग होती है मगर इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं है । नियम यह भी है कि इस्तेमाल के बाद किट को भट्टी में जलाया जाये मगर एसा हो भी रहा है अथवा नहीं , यह कोई नहीं देख रहा है । एसके महेश्वरी तो यह भी कह रहे हैं कि कई जगह इस्तेमाल की हुई किट की भी पुनः बिक्री हो रही है और इसे पहनने वाले स्वास्थ्य कर्मी भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं । बात पूरी तरह भाजपा नेता के हवाले से करूँ तो बक़ौल उनके रिश्वत का खेल ऊपर तक हो रहा है और लड्डू फूट रहा है तो चूरा भी न जाने कहाँ कहाँ तक बँट रहा है । कहिये भक्तों अब क्या कहते हैं ?





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