शुक्रवार, 8 मई 2020

लालकोठी दरियागंज 110002








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दरियागंज की  कोठी

विवेक शुक्ला

दरियागंज मेन रोड से आप पटौदी हाउस की तरफ चलिए। वहां पर किसी से पूछ लें लाल कोठी का रास्ता। आपको तुरंत बता दिया जाएगा। इस लगभग एक हजार गज की कोठी के ड्राइंग रूम में तमाम तस्वीरे टंगी हैं।  कुछ में ऋषि कपूर, पिता राज कपूर और लाल कोठी के मालिक सेठ मदन लाल कपूर के साथ दिखाई दे रहे हैं। आर.के.बैनर की श्री 420, संगम, बूट पालिश, अवारा, मेरा नाम जोकर, बॉबी जैसी यादगार फिल्मों को रीलिज करने से पहले राज कपूर मिलते थे मदनलाल कपूर से। मदन लाल कपूर ही तय करते थे कि दिल्ली में फिल्म को किस-किस सिनेमा घर में रीलिज करना है। एक लंबे अरसे तक कपूर साहब दिल्ली-यूपी के सबसे बड़े फिल्म वितरक थे।

एक दौर था जब फिल्म वितरकों के गढ़ भागीरथ पैलेस में एक पता भी उनकी मर्जी के बिना नहीं हिलता था। वे नाज सिनेमा के मालिक भी थे। दिल्ली के फिल्मी दर्शकों की नब्ज से वे कायदे से परिचित थे। उन्होंने सोच-समझकर ही बॉबी को रीगल,चाणक्य,राधू वगैरह में रीलिज किया था। राज साहब और कपूर साहब में बातचीत ठेठ पंजाबी में हुआ करती थी। कपूर साहब देश के बंटवारे के बाद लाहौर से दिल्ली आए थे। बॉबी के रीलिज होने के बाद एक दिन डिंपल कपाडिया और ऋषि कपूर लाल कोठी आए। उनकी एक झलक पाने के लिए दिल्ली कुछ भी बलिदान देने के लिए तैयार थी। बड़ी मुश्किल से वे दोनों वहां से निकले थे।   

मदन लाल कपूर की 1997 में मृत्यु से पहले दिलीप कुमार भी अपनी फिल्मों के रीलिज होने से पहले लाल कोठी में दस्तक देते थे। कहते हैं कि कपूर साहब का 1955 में प्रदर्शित देवदास फिल्म के साथ दिलीप कुमार से अटूट संबंध बना था। उसके बाद ये रिश्ता गहरा होता चला गया। फिर मुगले-ए-आज़म, गंगा जमुना, राम और श्याम, विधाता, कर्मा और सौदागर तक मदन लाल कपूर उनकी फिल्मों की सफलता तय करने में एक खास रोल निभाते रहे।
ना जाने कैसे दिलीप कुमार के लाल कोठी में आने पर आसपास के इलाकों के तमाम लोगों को पता चल जाता था। उसके बाद लाल कोठी के इर्द-गिर्द सैकड़ों लोग जमा होने लगते ।सबकी एक ही चाहत होती कि किसी तरह ट्रेजेडी किंग के एक बार ‘दीदार’ हो जाएं।
 दिलीप साहब लाल कोठी से निकलने के बाद कुछ पलों के लिए अपने चाहने वालों के बीच जाते। उन्हें कभी-कभी कोई अपना यादगार डायलॉग भी सुनाकर खुश कर देते। एक बार उन्होंने नया दौर का डायलॉग ‘जिसके दिल में दगा आ जाती है ना, उसके दिल में दया कभी नहीं आती’ और एक बार मुग़ल-ए-आज़म का डायलॉग  ‘मोहब्बत जो डरती है वो मोहब्बत नहीं..अय्याशी है गुनाह है’ सुनाया था।

अब लाल कोठी में वीरानी छाई रहती है। अब इधर ना कोई फिल्मी सितारा आता और ना ही कोई फिल्मी सितारों की पार्टी आयोजित होती। अब मदन लाल कपूर की पत्नी यहां पर गुजरे वक्त की यादों के साथ दिन गुजार रही हैं।

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