शनिवार, 25 अप्रैल 2020

रवि अरोड़ा की कलम से ःसब




गुड्डी की कहानी

रवि अरोड़ा
अजब इत्तेफ़ाक है कि कल रात ही कथित तौर पर धीरूभाई अम्बानी के जीवन पर बनी फ़िल्म ‘ गुरु ’ देखी और कल ही उनके बड़े बेटे मुकेश अम्बानी को एशिया के सबसे अमीर आदमी का ख़िताब मिल गया । अभिषेक बच्चन, एश्वर्या राय और मिथुन चक्रवर्ती द्वारा अभिनीत फ़िल्म गुरु को हालाँकि अधिकृत रूप से धीरूभाई अम्बानी की जीवनी तो कभी नहीं कहा गया  मगर फ़िल्म में दिखाई गई अनेक बातें धीरूभाई के जीवन से मेल खाती थीं , एसा जानकारों का दावा है । पैट्रोल पम्प पर काम करने से लेकर देश के सबसे बड़े उद्यमी बनने तक देश के नेताओं से अपनी नज़दीकी का धीरूभाई ने कैसे फ़ायदा उठाया । कैसे उस समय के लाइसेंस राज को अपने हित में साधा । इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी की निकटता धीरूभाई ने कैसे हासिल की और इंडियन एक्सप्रेस के मालिक रामनाथ गोयनका से धीरूभाई की पहले दोस्ती और फिर दुश्मनी क्यों हुई , यह सब नाम बदल कर बड़ी ख़ूबसूरती से इस फ़िल्म में दिखाया गया है । उन्ही धीरूभाई का बड़ा बेटा मुकेश अम्बानी अब यदि देश ही नहीं वरन पूरे महाद्वीप का सबसे अमीर आदमी बन गया है तो इसमें आश्चर्य कैसा ? हाँ मामूली सी हैरानी अवश्य होती है कि कोरोना संकट में जब सबके कारोबार चौपट हैं और जिस दौर में हर पैसे वाला अपना सिर पकड़ कर बैठा है , उस संकट की घड़ी में भी मुकेश अम्बानी की गुड्डी ऊपर कैसे चढ़ रही है ?

अब आप अख़बार में छपी ख़बर मुझे न बतायें , वह तो मैंने भी पढ़ ली है कि फ़ेसबुक के मार्क जुबरकर ने मुकेश अम्बानी की कम्पनी जियो के दस फ़ीसदी शेयर ख़रीद लिए हैं और जियो को 43 हज़ार 574 करोड़ रुपये का निवेश मिलने से ही मुकेश अम्बानी की कम्पनी रिलाइंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर उछल गये और उनकी सम्पत्ति बढ़ गई तथा उनकी सम्पत्ति 4.7 अरब डालर बढ़ गई । जनाब मैं तो बस यह हिसाब लगा रहा हूँ कि फ़ेसबुक से पैसे भी मिल गये और अपने शेयर का दाम बढ़ने से मुनाफ़ा अलग हुआ, क्या दिमाग़ है बंदे का । अब रिलाइंस इंडस्ट्रीज में 47.25 फ़ीसदी निजी हिस्सेदारी होने से आधा फ़ायदा तो उनके अपने ही घर में गया । बेशक कोरोना की वजह से हाल ही में उनका शेयर नौ सौ रुपये गिरा था और उन्हें 937 करोड़ डालर का नुक़सान भी हुआ था मगर अब उसकी भी भरपाई हो गई और उनकी सम्पत्ति कुल 49.2 अरब डालर हो गई है । बेशक मुकेश अम्बानी कह यही रहे हैं कि फ़ेसबुक और जियो की इस साझेदारी से देश के लाखों किराना व्यापारियों को फ़ायदा होगा और घर बैठे किरयाना का सामान मिलने से करोड़ों उपभोगताओं को भी लाभ होगा मगर अपने को विश्वास नहीं हो रहा । अजी दूसरों के फ़ायदे के लिए काम करने वाले आदमी तो मुकेश अम्बानी हैं नहीं । दूसरों का भला उनके दिमाग़ में होता तो कोरोना काल में केवल पाँच करोड़ रुपया ही प्रधानमंत्री राहत कोश में न देते । वह भी तब रतन टाटा 15 सौ करोड़, पेटीएम जैसी छोटी कम्पनी के शेखर शर्मा 5 सौ करोड़ , अडानी ने सौ करोड़ और वेदांता के अनिल अग्रवाल जैसे उनके सामने कहीं भी न टिकने वाले लोग सौ करोड़ दे रहे हैं ।

अब आप और हम कुछ भी सोचें अथवा कहें यह तो आसमान पर थूकने जैसा ही होगा । तमाम सरकारें जिस आदमी की जेब में हों , तमाम मीडिया हाउस जिसके पैसे पर चलते हों , उसके बाबत हमारी किसी भी बात का मतलब ही क्या है ? सच कहूँ तो अब उनके उस छोटे भाई अनिल अम्बानी पर तरस आता है जिसकी आर्थिक स्थिति अब मुकेश अम्बानी के घर जितनी भी शायद नहीं रही । एसा होता भी क्यों नहीं ? अनिल अम्बानी ने मुलायम सिंह, अमर सिंह, सुब्रत राय सहारा और अमिताभ बच्चन जैसे उन लोगों से दोस्ती की जिनका सूरज अस्त हो रहा था और मुकेश अम्बानी हमेशा उगते सूरज के साथ रहना ही पसंद करते हैं । बालकनी में ताली-थाली बजाना और दीया जलाना उन पर जँचता भी है । अब यही तो है धीरूभाई अम्बानी की असली विरासत ।

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