बुधवार, 1 सितंबर 2021

ये उन दिनों की बात हैं जब.....

 *यदि आपने* 

बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी देखी है।

दलान को समझा है।

ओसारा जानते हैं।

दुवारे पर कचहरी (पंचायत) देखा हैं।

राम राम के बेरा दूसरे के दुवारे पहुंच के चाय पानी किये हैं।

दतुअन करने से पहले मुंह जुठारे हैं।

दिन में दाल-भात-तरकारी जरूर 

खाये हैं।

संझा माई की किरिया का मतलब समझते हैं।

रात में दिया और लालटेम जलाकर उसकी रौशनी में पढ़ाई किये हैं।

बरहम बाबा का स्थान आपको मालूम है।

डीह बाबा के स्थान पर गोड़ धरे हैं।

तलाव (ताल) के किनारे और बगइचा के बगल वाले पीपर और स्कूल के रस्ता वाले बरगद के भूत का किस्सा (कहानी) सुने हैं।

बसुला समझते हैं।

फरूहा जानते हैं।

कुदार चलाये हैं।

दुपहरिया मे घूम-घूम कर आम, जामुन, अमरूद खाये हैं।

दुरजोधना का असली नाम दुर्योधन जानते हैं।

बारी बगइचा की जिंदगी जिये हैं।

चिलचिलाती धुप के साथ लूक के थपेड़ों में बारी बगइचा में ओल्हवा-पताल और चिर्री-पाती खेले हैं।

पोखरा-गड़ही किनारे बैठकर लंठई किये हैं।

पोखरा-गड़ही किनारे खेत में बैठकर 5-10 यारों की टोली के साथ कुल्ला मैदान हुए हैं।

गोहूं, अरहर, मटरिया  का मजा लिये हैं

अगर आपने जेठ के महीने की तीजहरिया में तीसौरी भात खाये हैं,

अगर आपने सतुआ का घोरुआ पिआ है,

अगर आपने बचपन में बकइयां घींचा है।

अगर आपने गाय को पगुराते हुए देखा है।

अगर आपने बचपने में आइस-पाइस खेला है।

अगर आपने जानवर को लेहना और सानी खियाया है।

अगर आपने ओक्का बोक्का तीन तलोक्का नामक खेल खेला है।

अगर आपने घर लीपते हुए देखा है।

अगर आपने धान गोहू ओसाते  देखा है।

अगर आपने गुर सतुआ, मटर और गन्ना का रस के अलावा कुदारी से खेत का कोन गोड़ा है।

अगर आपने पोतनहर से चूल्हा पोतते हुए देखा है।

अगर आपने कउड़ा तापा है।

अगर आप ने दीवाली के बाद दलिद्दर खेदते देखा है।

अगर आप मकई के खेत मे मचान के ऊपर  टिन पिट कर चिड़िया भगाया है।

अगर आपने धूल भड़ी सड़को पर हवागड़ी(मोटड गाड़ी) के पीछे भागा है।

अगर आपने नमक-मिर्चा लेकर चना या खेसारी के खेत मे बैठ कर उसका फुनगी तोड़कर खाया है ।


ये उन दिनों की बात है जब मॉल मेट्रो मोबाइल मल्टीप्लेक्स मोटर गाड़ी मल्टीनेशनल कम्पनी  मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट औऱ बिल्डिंग  का चलन औऱ फैशन नहीं था. सारिश्तों meमान के लिए दुकानों की कमी थी. आदमी के पसंद आदमी के लिए समय था  यानी जिंदगी में सुकून था. 


*तो समझिये की आपने एक शानदार और अद्भुत ज़िंदगी जी है, क्योंकि आज उपरोक्त चीजें विलुप्तप्राय होती जा रही हैं या हो चुकी है।*

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