शनिवार, 12 जून 2021

कोरोना काल की कथाएं

 📛  #कोरोना_काल_की_50_सच्ची_घटनाओं_पर_आधारित_किताब ~ #पलायन • #पीड़ा • #प्रेरणा ~ #लेखक = #मयंक_पाण्डेय



🦑  #27_मार्च_ 2020 को वैश्विक महामारी कोरोना से पहली जंग जीत कर "जादव" ने विश्व रिकॉर्ड बनाया। 

📚 यह किताब "कोरोना काल" का एक जीवित दस्तावेज है, आँखों के सामने घूमती एक वीडियो रील है, बोलता हुआ वर्तमान और भविष्य का इतिहास है। हर जागरूक और संवेदनशील व्यक्ति को यह अनूठी किताब जरूर पढ़ना चाहिए और अपने छोटे छोटे समूहों में इस पर व्यापक चर्चा भी करना चाहिए।

🔥 #ये_किताब_करुण_क्रंदन_है, #करोड़ों_लोगों_का ••••

●●● 135 करोड़ देशवासियों को समर्पित अपनी इस किताब की शुरुआत में मयंक लिखते हैं कि ~ " यह कहानी है 'अनकहे भारत' की, जो हमारे सामने होकर भी हमे स्पष्ट नही दिखती। 2020 की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी का आगमन हुआ और मार्च आते आते इसने भारत में अपनी भयावहता दिखानी शुरू कर दी। टीवी, समाचार पत्र और सोशल मीडिया पर लाॅकडाउन के नियम, सोशल डिस्टैन्सिंग, मास्क के प्रयोग तथा पलायन की खबरों की ही चर्चा रही। सिर पर गठरी लिए पत्नी और बच्चों के साथ सड़को पर हजारों किलोमीटर चल रहे मजदूरों की खबरों और तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया।"

● ••••• "इतिहास गवाह है कि विस्थापन और पलायन ने हमेशा एक नए वर्ग को जन्म दिया है। •••• 1947 के विभाजन मे भारत आए विस्थापित वर्ग ने धीरे धीरे स्वयं को स्थापित किया और कुछ ही वर्षों में देश के विकास मे अग्रणी भूमिका निभाई। ••••• हालाँकि भारत में कोरोना काल में हो रहा पलायन क्षणिक था, पलायनजनित पीड़ा मजदूरों के जेहन में हमेशा रहेगी और इसके दूरगामी परिणाम हमें आने वाले वर्षों में दिखेंगे"। 

● •••••• "कोरोना काल में घोषित लॉकडाउन में मुख्यतः दो वर्गों ने संघर्ष किया और इसकी पीड़ा सहन की। एक तो वह थे, जो सड़कों पर चलाएमान थे और अपने घरों की ओर••• और दूसरे वह थे, जो अपने घरों में रहकर परिस्थितिजन्य पीड़ा झेल रहे थे। इन दोनों ने लॉकडाउन के समय जो सहा, वह भयावह है और जिस जिजीविषा से परिस्थितियों का सामना किया, वह अपरिमेय है"।

● ••••• "लॉकडाउन के दौरान सामने आती हर मर्मस्पर्शी कहानी के पीछे एक ऐसी अनूठी दास्तान है, जो बहुत कुछ सोचने को विवश करती है। •••• इन सच्ची घटनाओं में हमने 'पीड़ा के इंद्रधनुष' देखे हैं। इन विभिन्न घटनाओं में दर्द की परिणति तो थी ही,  पर साथ ही साथ उम्मीद की किरण भी थी"।  

● •••••• "इस किताब के माध्यम से हर एक की जिंदगी को प्रभावित करती उस 'पीड़ा के इंद्रधनुष' को आपके सामने लाने का एक प्रयास कर रहा हूँ। ••••• अक्सर सुनता हूँ कि हमारे देश में 33 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं।  इस बारे में मुझे ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मैंने 1-2 करोड़ ऐसे लोगों को जरूर महसूस किया, जिनमें देवत्व के गुण विद्यमान हैं। यह प्रयास उसका 'अनकहे भारत' के बारे में बताने का है, जिस पर हमें गर्व है, जो हमारा अभिमान है"।

●● #लेखकीय_परिचय~ गोरखपुर में जन्मे मयंक पाणडेय ने एलएलबी और एल एल एम की परीक्षाओं में विश्वविद्यालय में टॉप किया। वर्ष 2007 में प्रथम प्रयास में ही बिहार न्यायिक सेवा में चयनित हुए। उसके बाद वर्ष 2009 में वे भारतीय राजस्व सेवा(IRS) मे चयनित हुए। इस किताब को लिखते समय वे गुजरात के सूरत में संयुक्त आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। इनके लेख और कहानियां समय-समय पर विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। "पलायन पीड़ा प्रेरणा" हिंदी साहित्य में इनका प्रथम प्रयास है।

● #मयंक_पाण्डेय लिखते हैं कि ~ "हर व्यक्ति का संघर्ष उसके जीवन का आत्मीय और अद्वितीय पहलू होता है। हम अक्सर सुनते हैं कि अमुक व्यक्ति ने विपरीत परिस्थितियों में सफलता पाई या साहसिक कार्य किया और हम उससे प्रेरित होते हैं। कोरोना महामारी में घोषित लॉकडाउन के दौरान मैंने कई ऐसी घटनाओं को देखा, जिन्होंने संघर्ष के मायने ही बदल दिए। हर कहानी एक नई प्रेरणा, एक नई पीड़ा और एक नई पृष्ठभूमि के साथ सामने आ रही थी। यह किताब उन संघर्षों की की कलम बद्ध श्रंखला है, जो किसी परीक्षा, खेल या व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के लिए नहीं, वरन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए किए गए हैं। ये प्रयास है, उस भारतीय संस्कार को आपके सामने लाने का, जिसके परिणाम स्वरूप लोगों ने संघर्ष कर रहे जरूरतमंदों की तन मन धन से मदद की॥"

●● #पलायन_पीड़ा_प्रेरणा ~ यह शीर्षक ही आम पाठक को चौंकाने के लिए काफी है। किताब पढ़कर निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि ~ इस किताब में आपको देवत्व दर्शाने वाले देवपुरुष दिखेंगे, तो दहाड़ते हुए दानव भी द्रष्टगोचर होंगे। आम-जन की पीड़ा को साझा करने वाले संवेदनशील इन्सान हैं, तो रक्त पिपासु भेड़िए भी अपने खूँख्वार रूप में मौजूद हैं। मददगार हाथ हैं, तो जिंदा इन्सान के जिस्म से माँस नोच लेने वाले गिद्ध भी है, जो मनुष्य योनि में जन्मे हैं। परोपकारी सज्जन हैं, तो दुराचारी दुर्जन भी मौजूद हैं। 

● कमोबेश यह किताब आपको वो सारे मंजर दिखाती है, वो करुण कथा सुनाती है, जो अब तक या तो आपने यत्र तत्र अपने परचितों के मुँह से सुनी है या अपनी आँखों से देखी है। सभी 50 सच्ची घटनाओं को जानने के लिए तो आपको किताब पढ़ने की जहमत उठानी ही पड़ेगी, फिर भी आपकी जिज्ञासा की सान्त्वना के लिए अति संक्षिप्त रूप मे कुछ घटनाएँ प्रस्तुत हैं:~~~•••

1️⃣ सबसे लंबे पलायन का वर्ल्ड रिकॉर्ड~ 6 प्रदेशों की सड़कों को पार करते छाले वाले दो जख्मी पाँव ~ असम के नौगांव जिले के जादव गोगोई की 25 दिनों में की गई 2800 किलोमीटर की साहसिक यात्रा के सामने जार्ज मीगन का लगभग 2500 दिनों में बनाया विश्व रिकॉर्ड बौना पड़ गया। 27 मार्च को जादव ₹ 4000 की जमा पूंजी के साथ वापी से 2800  किलोमीटर दूर स्थित नौगांव के लिए निकल पड़े।••••• बिहार में सड़क के किनारे सोते समय किसी ने जादव का पैसा, मोबाइल फोन इत्यादि चुरा लिया। जेब में फूटी कौड़ी तक नहीं थी और लंबी यात्रा तब भी बाकी थी। ••••  पत्नी और बच्चों से मिलने का जुनून चला रहा था दो जख्मी कदमों को। •••• भूख प्यास: जो मिल गया, उसी को मुकद्दर समझ लिया। •••• लंबी यात्रा, पैरों में छाले, पैसे मोबाइल की चोरी हो जाने के बावजूद जादव का मनोबल कम नहीं हुआ। 25 दिनों की 2800 किलोमीटर लंबी,6 राज्यों (गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और असम ) से होकर गुजरने वाली यात्रा में जादव ने ऐसा साहसिक कारनामा किया, जो कल्पना से भी परे है। ••••• इन 25 दिनों में जादव ने जहाँ मानवता के कारण मदद के लिए बढ़े हाथ देखे, वहीं एक गरीब मजदूर की जेब में हाथ डालकर उसकी जमा पूंजी चुराने वाले कायर नाकारा हाथों को भी महसूस किया।  दुनिया दोनों प्रकार के लोगों से भरी हुई है।"

2️⃣ "कांधे पर पुत्र की लाश लिए आज का हरिश्चंद्र"~ "कांधे पर बेटे की लाश, दौड़ चला पिता बदहवास" कोरोना संक्रमण के समय घोषित लॉकडाउन के दौरान कंधे पर बेटे की लाश लिए अंबाला से पीलीभीत जा रहे एक ऐसे व्यक्ति का मामला सुर्खियों में आया,  जिसने पूरे समाज की ऑंखें नम कर दीं। यह मजबूर पिता कई दिन पहले अंबाला से अपने 4 साल के बीमार पुत्र को लेकर अपने गृह जनपद पीलीभीत के लिए निकला था। 15 मई को उसके बीमार बच्चे ने दम तोड़ दिया।••••  रास्ते में किसी राहगीर ने उसे बताया कि अगर इस बच्चे के मौत की खबर किसी को लग गई, तो सबसे पहले शव का पोस्टमार्टम होगा। पोस्टमार्टम के बाद तुम्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। •••  यह जानकर कम पढ़े लिखे इस मजदूर के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके सामने उसके नन्हे से बेटे की लाश के साथ चीर फाड़ होने का दृश्य घूमने लगा। उसका मन अभी यह भी नहीं मान पाया था कि जिस नन्हे को उसने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसका शव पिता के कंधे पर है। •••• खाली पेट खाली जेब ऊपर से पुत्र बिछोह ? पुत्र के शव को चार नहीं, एक कांधा ? इस बेबस पिता का कर्तव्य बोध और पुत्र के शव को अपने गृह जनपद तक ले जाने का जुनून ही था, जिसकी बदौलत यह मजदूर अपने प्रयास में सफल हुआ।

3️⃣ गोद में शिशु और चिता पर पति का पुतला~ डेढ़ वर्षीय पुत्र को गोद में लेकर कराया पति के पुतले का दाह संस्कार •••• दिल्ली से पति का शव लाने का पैसा नहीं था। •••••• ढाक के पत्ते और कुश से बनाया पति के शव का पुतला •••• सब इंस्पेक्टर ताहिर हुसैन ने ब्राह्मणों को बुलाकर मंत्रोचार के साथ कराया दाह संस्कार। •••• इस लौह महिला के पति की मौत से शुरू हुआ संघर्ष पति के दाह संस्कार पर ही खत्म नहीं होता है, उसकी परीक्षा तो अब शुरू होगी, जब उसे चार नन्हे बच्चों की परवरिश करनी होगी।

4️⃣ दिव्यांग बच्चे के लिए चोरी~  "पिता वह शख्स होता है, जो बच्चे के सपनों को पूरा करने के लिए अपने सपनों को कुर्बान करता है"। ऐसे ही एक पिता ने अपने विकलांग बच्चे के लिए किसी के घर के बरामदे से साइकिल चुराई और वहाँ पर एक पत्र लिख कर छोड़ दिया कि हो सके तो मुझे माफ कर देना, अपने विकलांग बच्चे को बरेली तक ले जाने के लिए मजबूरी में ऐसा करना पड़ा है।

5️⃣ विश्व का पहला और आखरी व्यापार~  वेश्याओं का घर गाँव नहीं होता है। वे लाकडाउन  में कहाँ पलायन करतीं ? ••••  उनका सर्वस्व है रेड लाइट एरिया ••••• विश्व का पहला धंधा, जिसमें वंशवाद नहीं होता ••••• जिस्म एक बिकता है, कमीशन कई लोग लेते हैं सांसारिक रिश्तों की सच्चाई से नफरत ••••  एक्चुअल सेक्स की जगह वर्चुअल सेक्स ••••• 

6️⃣ सिर पर वैधव्य और कंधे पर दिव्यांग~  नन्हे दिव्यांग को 'कांवर' पर लाद कर चले 1200 किलोमीटर पैदल। घटना मध्य प्रदेश की। •••• माँ ने ठाना, तो कुदरत ने भी माना •••• विधवा माँ और दो भाइयों का समर्पित परिवार •••• 10 दिनों में 10 जन्म की पीड़ा •••• दिव्यांगों के प्रति समाज का एक हिस्सा आज भी भावनात्मक विकलांग है ••••।

7️⃣ कफन हटा कर माँ  को जगाता शिशु~  रेलवे स्टेशन पर पड़ी माँ की लाश का वायरल वीडियो •••• संस्कारी बहू ने लॉकडाउन में लांघी देहरी ••••  माँ के शव से खेलता रहा बच्चा ••••• माँ-बाप की देहरी के पास बेटी ने तोड़ा दम ••••• पूरे देश की नम हुई आँखें। •••• यह एक माँ के संघर्ष और त्याग की ऐसी अविस्मरणीय कहानी है, जिसमें मंजिल पर मर कर भी माँ जीत गई और यह समाज हार गया।

8️⃣ बेटों ने ठुकराया, समाज ने अपनाया •••• बांद्रा के अंधेरे में भटकती वृद्धा को दिल्ली स्टेशन पर मिली उजाले की किरण ••••• 5 बच्चों के बावजूद अनाथ 70 वर्षीय लीलावती ••••• बांद्रा स्टेशन से वायरल लीलावती की कथा पूरे देश ने जाने •••••• बांद्रा की अकेली लीलावती को दिल्ली में मिले कई बेटे ••••• समाज भूल रहा है माँ बाप को सर्वोच्च स्थान देने की परंपरा ••••• वृद्ध आश्रमों की बढ़ती संख्या मानवता पर कलंक। ••••• हमें यह समझना होगा कि यह सिर्फ हमारे घर परिवार के बुजुर्ग नहीं हैं, बल्कि एक विरासत भी हैं। इन्होंने सिर्फ हमारे लिए ही नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए भी बहुत कुछ किया है। ••••• लीलावती दादी के लिए समाज का आगे आना उम्मीद की एक नई किरण दिखाता है।

9️⃣ पिता के लिए माँ बनी तेरी 13 वर्षीय बेटी ~ घायल पिता को साइकिल में बैठा कर 8 दिन चली 13 साल की बच्ची ••••• पिता के लिए माँ बन गई उनकी प्यारी बेटी। •••• 21वीं सदी में भी बेटे बेटी में फर्क करने वालों के लिए ज्योति का संघर्ष एक संदेश है कि अपनी तुच्छ मानसिकता से बाहर निकलो ••••।

🔟 अस्पतालों से शव उधार नहीं मिलते ~ लोगों की मदद से माँ ने किया पुत्र का अंतिम संस्कार ••••• ममता हारी, क्रूर नियति जीती ••••• पैसे नहीं थे, तो बेटे की लाश लेने से किया इनकार •••••• रूढियों को धता बताते माँ ने दी पुत्र की चिता को आग••••। •••••  जिस पुत्र के सर पर सेहरा बांधने का सपना इस माँ की आँखों में संजोया था, उस पुत्र के सिर के पास उस माँ ने घंट फोड़ा। अश्रुपूर्ण आँखों से अंतिम क्रिया करते वक्त भी यह माँ प्रार्थना कर रही थी कि पुत्र की आत्मा को शांति मिले ••••।

⭕ किताब के लेखक ने 50 सच्ची घटनाओं में से 4 घटनाओं को #प्रेरणा शीर्षक के अंतर्गत विशेष रूप से रेखांकित किया है। इन चारों के पात्रों का अति संक्षिप्त विवरण भी पाठकों के समक्ष आना ही चाहिए ~~~•••

💮 #विकास_खन्ना : संघर्ष और मानवता का स्वर्णिम पन्ना •~• अमेरिका में रह रहे भारतीय का अप्रतिम राहत कार्य ••••• कोरोना महामारी से मानव सभ्यता के संघर्ष का जब भी जिक्र होगा, तब एक नाम विकास खन्ना का होगा, जिसके बगैर इस लड़ाई की चर्चा अधूरी मानी जाएगी। 6 महीनों में (अप्रैल-सितंबर)  भारत के 125 शहरों में 5 करोड़ खाने के पैकेट्स 5 लाख चप्पलें और 30 लाख सेनेटरी पैड इत्यादि वितरित करके विकास खन्ना ने विश्व रिकॉर्ड बनाया है। ••••• माँ, दादी और चूल्हे की आँच ने गढ़ा विकास खन्ना •••••• माँ के वात्सल्य ने पाँव में बाँधी गति ••••• लारेंस गार्डेन की नींव: 24 कुर्सियाँ 24 प्लेट •••• गुरुजनों ने पहचाना भारत के इस कोहिनूर को ••••• सीगल पक्षी से प्रेरणा लेकर भरी अमेरिका की उड़ान ••••• क्रिसमस की उस स्याह सर्द रात में आश्रय ढूँढते विकास •••••• शेल्टर होम ने दिखाया नया रास्ता •••••• विकास के जुनून ने उन्हें बनाया 'मिशेलिन स्टार' •••••• विकास खन्ना: कोरोना काल में परहित की तमन्ना ••••• उत्तर प्रदेश में खाना बनवाता विश्व का महान शेफ ••••• पिछले 28 साल से रोजा रखते विकास ने ईद पर बनाया विश्व रेकार्ड ••••• कोरोना से लड़ाई में भी माँ बिन्दू ने विकास को लड़खड़ाने नहीं दिया ••••• सफेद साड़ी मे लिपटी वृंदावन की विधवाओं को सौंपा अंजुरी भर 'रंग' ••••• मुम्बई के डब्बे वालों के लिए उत्सव बने विकास •••••• किन्नर, सेक्स वर्कर, ट्रांसजेंडर : दुत्कारे जाने का दर्द विकास को पता है ••••• मदद, सहारे तथा प्रेम की अनगिनत कथाएँ •••••। विकास खन्ना का पूरा जीवन 135 करोड़ भारतीयों के लिए ~ संघर्ष, जुनून, मानवता, समर्पण तथा देश प्रेम का जीवंत उदाहरण है •••••।

💮 #सोनू_सूद : कोरोना के ऊसर में बादल सा वजूद ~ रील लाइफ से रियल लाइफ तक •••• विरासत में मिला सेवा भाव : सोनू सूद का प्रारंभिक जीवन •••• छात्र जीवन में ही की शादी •••••• योग्य इंजीनियर ने लिया फिल्मों में अभिनेता बनने का जोखिम •••••• सोनू सूद का फिल्म जगत में संघर्ष : शिखर पर रहीं निगाहें ••••• जीवन कहीं से भी शुरू हो सकता है : पंजाबी मुंडे की साउथ में धमाकेदार शुरुआत •••• सोशल मीडिया बना सहारा ••••• सोनू सूद बन गए असली हीरो •••••• किसी ने भगवान, तो किसी ने फरिश्ता बताया •••••• हर दिल पे राज चलता है, सोनू सूद का •••••• 177 महिलाओं को हवाई जहाज से घर पहुँचाया ••••• देश की सीमा पार भी की मदद •••••• सोनू की कार्यशैली~ मैनेजमेंट और प्रशासन के लिए रोल मॉडल •••••••• एक समानांतर सरकार बन गए सोनू सूद •••••• सिर्फ इंसान ही नहीं, जानवरों की भी मदद की ••••••• सोनू का जन्मदिन 3 लाख को रोजगार •~~~• ऐसी हजारों कहानियाँ हैं,  जिनके सूत्रधार सोनू सूद हैं और जो हम तक आ ही नहीं पायीं हैं। माँ सरोज सूद के वात्सल्य में पले और मुंबई में संघर्ष किए सोनू सूद का कोरोना काल में किया गया यह योगदान इस देश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। इस महान प्रयास के लिए सोनू सूद और उनके परिवार को अनंत साधुवाद •••••।

💮 कोरोना महामारी के समय में देश की विभिन्न सेवाओं से जुड़े कई सारे ऑफिसर आगे आए और लोगों की मदद करने का बीड़ा उठाया। इन लोक सेवकों ने अपनी ड्यूटी के अलावा लोगों की मदद करने का काम शुरू किया। ••••• 'पैडवूमन' बनीं भारतीय राजस्व सेवा की 'अमनप्रीत पासी' ••••• कोरोना संक्रमण के समय दिल्ली में ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत अमन प्रीत पासी ने साथियों के साथ मिलकर पूरे देश में 11लाख सेनेटरी पैड वितरित किए।  अपनी एकाउंटिंग स्केल से टैक्स चुरा रहे व्यापारियों की नींद उड़ाने वाली 'अमनप्रीत' देखते ही देखते गरीब और बेसहारा महिलाओं की "दीदी" बन गईं।  देश के प्रमुख मीडिया हाउस ने उन्हें "पैडवूमन" घोषित कर उनके कामों की सराहना की। ••••••  मानव सेवा को समर्पित दो बहनें ~ मेघा और रूपल भार्गव ~  राजस्थान के जयपुर की दो बहनों, रूपल और मेघा के एनजीओ "समर्पण" ने इस महामारी के दौरान गरीबों को राशन देने, भोजन वितरित करने, महिलाओं को सेनेटरी पैड वितरित करने और बच्चों को नोटबुक देने जैसे कई कार्यों को अंजाम दिया।  इस समूह ने सेक्स वर्करों, ट्रांसजेंडरों और यहाँ तक कि पुलिस प्रशासन को मास्क, सैनिटाइजर आदि बाँटने का काम किया। •••••• करुणा : देश की विभिन्न सेवाओं में कार्यरत सिविल सेवकों का सामूहिक प्रयास ~ कोरोना महामारी से देश की लड़ाई के समय देश में कार्यरत 29 विभिन्न सिविल सेवाओं के लोग एक मंच पर आए और उन्होंने इसे नाम दिया "करुणा"। •••••  वैभव जैन : जीवन का मकसद ही परोपकार ~ मुंबई में भारतीय राजस्व सेवा में एडिशनल कमिश्नर के पद पर कार्यरत वैभव जैन ने जीने का मकसद ही देश की मदद को बना लिया। ••••••  सब कुछ भूल चुके 75 वर्षीय वृद्ध को दिया नया जीवन •••••• दो अनजान परिवारों में बनाया खून का रिश्ता •••• वैभव जैन के प्रयास ने एक जरूरतमंद की जान बचाने के साथ ही साथ दो अनजान व्यक्तियों के बीच खून का रिश्ता भी स्थापित किया, जो हर रिश्ते से बड़ा होता है। •••••  देश सेवा के लिए आगे आए और तन मन धन समर्पित करने वाले इन हजारों कर्म वीरों को शत शत नमन •••••।

💮 टाटा : महात्मा गाँधी से कोरोना तक •~• सुबह की चाय से लेकर रात के नमक तक ~ कोरोना महामारी से उपजे संकट के समय 1500 करोड़ रुपये देने की घोषणा ••••• पहले सेवा, फिर व्यापार : यही मूलमंत्र है टाटा का •••••• कोरोना संक्रमण और टाटा ग्रुप •~• मेडिकल स्टाफ को निजी सुरक्षा उपकरण •••• कोरोना पीड़ित मरीजों के लिए रेस्पिरेटरी सिस्टम ••••• ज्यादा लोगों की स्रकीनिंग के लिए टेस्टिंग किट •••• संक्रमित मरीजों के लिए बेहतर सुविधाएँ ••••• हेल्थ वर्कर और आम जनता को प्रशिक्षित और जागरूक करने के लिए •••• पहले देश, फिर व्यवसाय ••••• "टाटा" सिर्फ एक व्यावसायिक समूह नहीं है, बल्कि "टाटा" नाम है, देश के भरोसे का, देश की तरक्की का, टाटा नाम है, देश के स्वाबलंबन का, टाटा नाम है देश की वैज्ञानिक सोच का और टाटा नाम है~ मानव सेवा का •••••।

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