सोमवार, 17 मई 2021

लॉक डाउन में मधुशाला / महाकवि व्हाट्सप्प अज्ञात

 🥃मधुशाला नए रूप में🥃



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*कोई मांग रहा था देशी,*

*और कोई फॉरेन  वाला।*

*वीर अनेकों टूट पड़े थे,*

*खुल चुकी थी मधुशाला।*


*शासन का आदेश हुआ था,*

*गदगद था ठेके वाला।*

*पहला ग्राहक देव रूप था,*

*अर्पित किया उसे माला।*


*भक्तों की लंबी थी कतारें,*

*भेद मिटा गोरा काला।*

*हिन्दू मुस्लिम साथ खड़े थे,*

*मेल कराती मधुशाला।*


*चालीस दिन की प्यास तेज थी,*

*देशी पर भी था ताला।*

*पहली बूंद के पाने भर से,*

*छलक उठा मय का प्याला।*


*गटक गया वो सारी बोतल,*

*तृप्त हुई उर की ज्वाला।*

*राग द्वेष सब भूल चुका था,*

*बाहर था वो अंदर वाला।*


*हंस के उसने गर्व से बोला,*

*देख ले ऐ ऊपर वाला।*

*मंदिर मस्जिद बंद हैं तेरे,*

*खुली हुई है मधुशाला।*


*पैर बिचारे झूम रहे थे,*

*आगे था सीवर नाला।*

*जलधारा में लीन हो गया,*

*जैसे ही पग को डाला।*


*दौड़े भागे लोग उठाने,*

*नाक मुंह सब था काला।*

*अपने दीवाने की हालत,*

*देख रही थी मधुशाला।*

🍷🍻🥂


*मंदिर-मस्जिद बंद कराकर ,*

*लटका विद्यालय पर ताला !*

*सरकारों को खूब भा रही ,*

*धन बरसाती मधुशाला !!* 😐


     *डिस्टेंसिंग की ऐसी तैसी ,*

     *लाकडाउन को धो डाला !*

     *भक्तों के व्याकुल हृदयों पर*

     *रस बरसाती मधुशाला ।।*😐


*बन्द रहेंगे मंदिर मस्ज़िद ,*

*खुली रहेंगी मधुशाला।*

*ये कैसे महामारी है ,*

*सोच रहा ऊपरवाला ।।*😐

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