शनिवार, 29 मई 2021

पापाजी प्रिसेंज पार्क में / विवेक शुक्ला

 पापाजी प्रिसेंज पार्क में  / विवेक शुक्ला


इंडिया गेट के ठीक सामने प्रिंसेज पार्क में इन दिनों सन्नाटा घना है। कारण कोरोना की चेन को ध्वस्त करने के लिए लगा लॉकडाउन है। अब भी इधर कुछ बुजुर्ग हैं जिन्हें याद है जब पृथ्वीराज कपूर इधर के एक फ्लैट में रहा करते थे। ये उन दिनों की बातें हैं जब वे राज्यसभा के 1952-1960 के बीच नामित सदस्य थे। इन लोगों को यह भी याद है जब पृथ्वीराज कपूर का  निधन (29 मई 1971) हुआ था।


 मतलब आधी सदी गुजर गई भारतीय सिनेमा के पुराण पुरुष को संसार से विदा हुए। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु  के आग्रह पर ही वे सांसद बनने के लिए राजी हुए थे। वे पृथ्वीराज कपूर की कला और संस्कृति जैसे सवालों पर सलाह लिया करते थे। दरअसल देश नया-नया स्वतंत्र हुआ था।


 उसकी कला- संस्कृति को लेकर किस तरह की नीति रहेगी, इन बिन्दुओं पर दोनों शिखर हस्तियों में चर्चाएं तीन मूर्ति भवन में होती थीं। माना जाता है कि पृथ्वीराज कपूर ने ही नेहरु जी से आग्रह किया था कि राजधानी में एक श्रेष्ठ नाट्य विद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए। उसके बाद ही नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की 1959 में स्थापना हुई। 


दोनों की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति आस्था निर्विवाद थी। इसलिए ही दोनों का एक-दूसरे को लेकर सम्मान का भाव था। पृथ्वीराज कपूर संसद के सत्र के समय अवश्य दिल्ली में होते थे। सत्र की समाप्ति के बाद वे वापस मुंबई लौट जाते थे। वहां पर उन्हें अपनी फिल्मों की शूटिंग को पूरा करना होता था। 


दिल्ली में वे सांसद बनने से पहले अनेक बार अपनी नाट्य मंडली के साथ रीगल में नाटकों को मंचन कर चुके थे। एक दौर में रीगल में नाटक भी खेले जाते थे। हिन्दी सिनेमा के पहले ‘पापाजी’ का राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 1960 को खत्म हो गया। उसके कुछ समय बाद बाद ही मुगले ए आजम रीलिज हो गई। तब वे  दरियागंज के गोलचा सिनेमा में अपनी फिल्म को देखने और दर्शकों का रिस्पांस जानने की गरज से आए थे। मुगले ए आजम में उनके किरदार को जिस तरह से पसंद किया जा रहा था उससे वे प्रसन्न थे।


 पृथ्वीराज कपूर सच में बड़े ही जिज्ञासु किस्म के मनुष्य  थे। वे 1963 में दरियागंज में घटा मस्जिद के पास स्थित उस विशाल हवेली को देखने आते हैं, जिधर उनके सबसे छोटे पुत्र शशि कपूर के करियर के शुरूआती दौर की फिल्म हाउस होल्डर की शूटिंग हुई थी। इस फिल्म के निर्देशक जेम्स आइवरी और  निर्माता इस्माईल मर्चेंट थे।


 हाउस होल्डर फिल्म में दिल्ली के दो मुख्य प्रतीक जंतर मंतर और जामा मस्जिद उभरते हैं। ये एक क्लासिक फिल्म थी और इसने शशि कपूर को एक बेहतरीन कलाकार के रूप में स्थापित किया था। बहरहाल, पृथ्वीराज कपूर को यकीन ही नहीं हो रहा था कि किसी फिल्म की शूटिंग एक हवेली में हो सकती है। जिस हवेली में हाउस होल्डर की लगभग सारी शूटिंग हुई थी वह आकाशवाणी के गुजरे दौर के शानदार समाचार वाचक स्वर्गीय श्री जयदेव त्रिवेदी के परिवार की थी। 


जानने वाले जानते हैं कि पृथ्वीराज कपूर का 1960 के बाद दिल्ली आना-जाना कम होता गया। लेकिन उनके कुनबे के सदस्य यहां आकर बसते रहे। पृथ्वीराज कपूर की सबसे छोटी बहन शांता धवन गुरुग्राम में आकर बस गईं हैं। शांता जी पृथ्वीराज कपूर को भापा जी ही कहती रही हैं। पृथ्वीराज कपूर के बड़े पुत्र राज कपूर की पुत्री रीतू के बाद दिल्ली में राज कपूर की पौत्री करिश्मा कपूर का विवाह हुआ। पर वह विवाह सफल नहीं रहा। राज कपूर के मंझले पुत्र ऋषि कपूर की बेटी रिदिमा कपूर साहनी की शादी साउथ दिल्ली के एक बिजनेसमैन भरत साहनी से हुई है।  शशि कपूर की बेटी संजना कपूर का विवाह लेखक और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट वाल्मिकी थापर से हुआ। संजना और वाल्मिकी मालचा मार्ग में रहते हैं। मतलब दिल्ली में पृथ्वीराज कपूर का परिवार अलग-अलग जगहों पर है।

Navbharatimes 27 मई 2021

 Vivek shukla

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