मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

बजट : किसानों के लिए समर्पित! / ऋषभदेव शर्मा

बजट : किसानों के लिए समर्पित! / ऋषभदेव शर्मा 


वित्त मंत्री ने अपने नए बजट को देश के किसानों के लिए समर्पित बताते हुए यह यकीन दिलाने की भरपूर कोशिश की कि सरकार को सबसे ज़्यादा फिक्र किसानों की है। होनी भी चाहिए। क्योंकि आज भी देश की 60 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। कोई और वक़्त होता तो विपक्ष वित्त मंत्री के इस दावे पर ध्यान न भी देता, लेकिन एक ऐसे वक़्त जबकि  आंदोलनकारी किसान केंद्र सरकार को छकाने पर आमादा हैं, भला वह कैसे वित्त मंत्री को वाहवाही लूट ले जाने दे सकता है? सो, उसने हाथोंहाथ भांजी मार दी कि बड़ी बड़ी बातों और दूरगामी योजनाओं की घोषणाओं के बावजूद कृषि क्षेत्र को तुरंत राहत देने जैसा इस बजट में कुछ भी नहीं है। यह नकारात्मक दृष्टिकोण थोड़ा अजीब भले लगता हो, किसान आंदोलन का राजनैतिक लाभ लेने के लिए शायद ज़रूरी है।


खुद को किसान-हितैषी सिद्ध करने का आसान तरीका है कि सरकार और उसके बजट को किसान-द्वेषी घोषित कर दिया जाए। इसके बावजूद यह तो मानना पड़ेगा ही कि किसान आंदोलन के बीच पेश किए गए  'आम बजट- 2021' में  किसानों और खेती के लिए अहम ऐलान किए गए हैं। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की मोदी सरकार की  प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया गया है। 


कुछ सयानों के गले यह बात नहीं उतर रही है कि गाँव और किसानों की बात करते हुए वित्त मंत्री ने अपने आप को बीज, खाद और उपज तक ही सीमित क्यों नहीं रखा! दरअसल, वित्त मंत्री की नज़र ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास पर है। इसीलिए जब वे याद दिलाती हैं कि प्रधानमंत्री ने 8 करोड़ परिवारों को कई महीनों तक मुफ्त गैस मुहैया कराई और 4 करोड़ से अधिक किसानों, महिलाओं, गरीबों को सीधे नकद राशि मुहैया कराई है, तो वे कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए किए गए प्रयासों के लिए साधुवाद की अधिकारी बन जाती हैं। 


जगजाहिर है कि आंदोलनी किसानों की एक बड़ी माँग यह रही है कि सरकार उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य की लिखित गारंटी दे, अर्थात इसे कानून का रूप दे। प्रस्तुत बजट इस मुद्दे पर सरकार की सदाशयता को बाकायदा उजागर करता है। किसानों के लिए इसे खुशखबरी कहा जा सकता है कि वित्त मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य  को  बढ़ाकर उत्पादन लागत का 1.5 गुना करने की घोषणा की है। उन्होंने यह भी बताया कि "साल 2014 में हमने दाल की खरीदारी में 236 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस साल हमारी सरकार 10 हजार 500 करोड़ रुपए की दाल खरीदेगी। इसमें 40 गुना इजाफा हुआ है।" इसी प्रकार गेहूँ की सरकारी खरीद से 2020-21 में 43 लाख किसानों को लाभ मिलने वाला है। धान की  सरकारी खरीद से डेढ़ करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा। संदेश स्पष्ट है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुविधा समाप्त नहीं होगी। बल्कि कई ऐसी फसलों को भी इसके अंतर्गत लाया जाएगा जो अभी इससे बाहर हैं। 


इसके अलावा, वित्त मंत्री ने  उज्ज्वला योजना में और अधिक लाभार्थियों को बढ़ाए जाने का भी ऐलान किया।  उन्होंने याद दिलाया  कि सरकार  ने 4 करोड़ से अधिक किसानों और महिलाओं को सीधे नकद राशि दी है। कहना न होगा कि ये सारी योजनाएँ ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ी हैं। यही नहीं, स्वामित्व योजना को भी पूरे देश में लागू किया जाएगा तथा 'एग्रीकल्चर क्रेडिट टारगेट‘ को 16 लाख करोड़ तक किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'ग्रीन स्कीम' का भी ऐलान किया है, जिसमें कई फसलों को शामिल किया गया है। उन्होंने पांच फिशिंग हार्बरों को आर्थिक गतिविधि के 'हब' के रूप में तैयार करने का भी वादा किया है। 


उम्मीद की जानी चाहिए कि आंदोलनकारी किसान बजट के दर्पण में झलकती सरकार की सदाशयता को समझेंगे और मौजूदा गतिरोध को पार कर मध्य मार्ग पर चलने को राजी होंगे। 000

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