बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

भुरी बाई

भूरी बाई  लोक कलाकार 

भूरी बाई एक भारतीय भील कलाकार हैं। मध्य प्रदेश में झाबुआ जिले के पिटोल गाँव में जन्मी भूरी बाई भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूह भीलों के समुदाय से हैं । उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार, शिखर सम्मान द्वारा कलाकारों को दिए गए सर्वोच्च राजकीय सम्मान सहित कई पुरस्कार जीते हैं।

भुरी बाई
जन्मपिटोल झाबुआमध्य प्रदेश

पितौल की भूरी बाई अपनी चित्रकारी के लिए कागज तथा कैनवास का इस्‍तेमाल करने वाली प्रथम भील कलाकार थी। भारत भवन के तत्‍कालीन निदेशक जे. स्‍वामीनाथन ने उन्‍हें कागज पर चित्र बनाने के लिए कहा। भूरी बाई ने अपना सफर एक समकालीन भील कलाकार के रूप में शुरू किया। उस दिन भूरी बाई ने अपने परिवार के पैतृक घोड़े की चित्रकारी की और वह उजले कागज पर पोस्‍टर रंग के स्‍पर्श से उत्‍पन्‍न प्रभाव को देखकर रोमांचित हो उठी। ‘‘गांव में हमें पौधों तथा गीली मिट्टी से रंग निकालने के लिए काफी मेहनत करनी होती थी। और यहां, मुझे रंग की इतनी सारी छटाएं तथा बना-बनाया ब्रश दिया गया।’’ शुरू में भूरी बाई को बैठकर चित्रकारी करना थोड़ा अजीब लगा। किंतु चित्रकारी का जादू शीघ्र ही उनमें समा गया।

भूरी बाई अब भोपाल में आदिवासी लोककला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर काम करती हैं। उन्‍हें मध्‍यप्रदेश सरकार से सर्वोच्‍च पुरस्‍कार शिखर सम्‍मान (1986-87) प्राप्‍त हो चुका है। 1998 में मध्‍यप्रदेश सरकार ने उन्‍हें अहिल्‍या सम्‍मान से विभूषित किया।

भूरी बाई का कहना है कि हरेक बार जब भी वह चित्र बनाना शुरू करती हैं तो वह अपना ध्‍यान भील जीवन और संस्‍कृति के विभिन्‍न पहलुओं पर पुन: केंद्रित करती हैं और जब कोई विशेष विषय-वस्‍तु प्रबल हो जाती है तो वह अपने कैनवास पर उसे उतारती हैं और उनके चित्रों में जंगल में जानवर, वन और इसके वृक्षों की शांति तथा गाटला (स्‍मारक स्‍तंभ), भील देवी-देवताएं, पोशाक, गहने तथा गुदना (टैटू), झोपडि़यां तथा अन्‍नागार, हाट, उत्‍सव तथा नृत्‍य और मौखिक कथाओं सहित भील के जीवन के प्रत्‍येक पहलू को समाहित किया गया है। भूरी बाई ने हाल ही में वृक्षों तथा जानवरों के साथ-साथ वायुयान, टेलीविजन, कार तथा बसों का चित्र बनाना शुरू किया है। वे एक दूसरे के साथ सहज स्थिति में प्रतीत हो रहे हैं।

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