मंगलवार, 26 जनवरी 2021

तुलनात्मक विश्लेषण का गलत चेहरा / कबीर

 आजाद हिन्द फौज/  तुलनात्मक विश्लेषण का गलत चेहरा 


सबसे ज़्यादा दुखद यह है कि नेहरू वर्सेस पटेल के नाम से , गांधी वर्सेस भगत सिंह के नाम से या फिर नेताजी वर्सेस नेहरू के नाम से संघियो ने क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान और देश को बरगलाने की कोशिश की है । 


आज़ाद हिंद फ़ौज की नेताजी ने चार रेजिमेंट बनायी थी। #गांधी_ब्रिगेड जिसकी कमान कर्नल इनायत कियानी के हाथ में थी । #नेहरू_ब्रिगेड की कमान कर्नल गुरुबक्श सिंह ढिल्लों के हाथ में थी । #आज़ाद_ब्रिगेड जिसकी कमान गुलज़ारा सिंह के हाथ में थी । #सुभाष_ब्रिगेड जिसकी कमान कर्नल शाहनवाज़ ख़ान के हाथ में थी । 


अब आप ही सोचिए कि जो व्यक्ति अपनी फ़ौज की ब्रिगेड भी गांधी , अबुल कलाम आज़ाद और नेहरू के नाम से बना रहा था , क्या उसका नेहरू या गांधी या आज़ाद से कोई झगड़ा हो सकता था ?? उन्होंने हेडगेवार , गोवलालकर या सावरकर के नाम से कोई ब्रिगेड क्यों नहीं बनायी ??


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आज़ाद हिंद फ़ौज के सैनिक जो बंदी बना लिए गए थे उनके विरुद्ध 5 नवम्बर , 1945 को लाल क़िला में मुक़दमा शुरू हुआ । अंग्रेज सरकार ने ढिल्लों , सहगल और शाहनवाज़ पर मुक़दमा शुरू किया आपको पता है कि बचाव पक्ष के वकील कौन थे ?? बचाव पक्ष के वकील थे पंडित जवाहर लाल नेहरू और आसफ़ अली । कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और देश के आम नागरिकों ने चारों तरफ़ से लाल क़िला घेर लिया । आसमान में नारा बुलंद हुआ : 


चालीस करोड़ों की आवाज़ , 

ढिल्लों , सहगल , शाहनवाज़ ।


यह भी एक इत्तिफ़ाक़ ही है कि फ़िल्म स्टार शाहरुख़ ख़ान शाहनवाज़ ख़ान के परिवार से आते हैं जिन्हें आए दिन सरकार के समर्थक देशद्रोही के ख़िताब से नवाज़ते हैं ।


नेताजी और गांधी जी में वैचारिक मतभेद थे , नेहरू और नेताजी में भी थे , नेहरू और पटेल में भी थे , लेकिन यह केवल विचारो तक सीमित थे , असल में सभी एक दूसरे का बहुत आदर सम्मान करते थे । नेताजी के प्लेन हादसे की खबर सुनकर नेहरू आँसुओ से रोए थे । यह सम्बन्ध संघियो की समझ से बहुत दूर की चीज़ है क्यूँकि वो मतभेद को केवल दुश्मनी ही समझते हैं और मानते भी है । आज जो लोग सत्ता में हैं , उनका आचरण इस बात की गवाही भी देता है कि कैसे उन्होंने विरोध की हर आवाज़ को देश का दुश्मन घोषित कर दिया है ।


नेहरू या गांधी को गाली देने से अच्छा यह है कि तथाकथित राष्ट्रवादी लोग यह बताए कि नेताजी के साथ उनके आदर्श नेताओ के सम्बन्ध कैसे थे ?? श्यामाप्रसाद मुखर्जी से नेताजी के सम्बन्ध कैसे थे ? हेडगेवार या कोई दूसरा संघी ढिल्लों , सहगल और शाहनवाज़ का मुक़दमा लड़ने खड़ा हुआ था क्या ?? आज़ाद हिंद फ़ौज में कितने संघी भर्ती हुए थे ?? आज़ाद हिंद फ़ौज में भर्ती ना होने की मुहिम किसने चलायी थी ?? कब तक उधार के नायकों से काम चलाओगे ?? कोई नायक अपने प्रिय संगठन का भी तो गिना दो जिसने स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान दिया हो ।


यहाँ यह भी याद दिलाना ज़रूरी है कि अगर आज नेताजी और उनके सिपाहसलार ढिल्लों , सहगल और शाहनवाज़ ज़िंदा होते और सरकार का विरोध कर रहे होते तो इन्हें भी आईटी सेल के मज़दूर ख़ालिस्तानी , आतंकवादी और अर्बन नक्सल पुकार रहे होते क्यूँकि सत्ता में बैठे लोग व्यक्ति की विचारधारा और आस्था कपड़ों और नामों से ही तय करते हैं । 


नोट : भगत सिंह और नेताजी सोशलिस्ट विचारधारा से थे जो आज सत्ता पक्ष की नज़रों में सबसे ज़्यादा अखरती है । 


#जय_हिंद

#नेताजी_सुभाष_चंद्र_बोस

#बुद्ध _से_कबीर_तक से साभार

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