मंगलवार, 5 जनवरी 2021

*मुरादनगर की घटना / दिनेश श्रीवास्तव *

 कुण्डलिया- *मुरादनगर की घटना*/ दिनेश  श्रीवास्तव 


                  *सरकारी तंत्र*

                       (१)

*भ्रष्टाचारी तंत्र का,एक अनूठा खेल*।

*लिंटर गिरा धड़ाम से,सामग्री बेमेल* ।।

*सामग्री बेमेल,हुआ रिश्वत का खेला*।

*मरे लोग चौबीस,उठा है आज झमेला*।।

*कहता सत्य दिनेश,तंत्र सारा सरकारी*।

*घुसखोरी में लिप्त,बना है भ्रष्टाचारी*।।

                     

                       (२)


*ठेकेदारी का हुआ,जब सत्ता से मेल*।

*सामग्री निर्माण में,तब तब होता खेल*।।

*तब तब होता खेल,मिलावट भारी होती*।

*मरते हैं फिर लोग,और जनता तब रोती*।।

*करता विनय दिनेश,तंत्र सुधरे सरकारी*।

*बंद करो उत्कोच,जहाँ हो ठेकेदारी*।।


                      (३)


*योगी- मोदी देखिए,कैसा है यह तंत्र*।

*इनको भी कुछ दीजिये,ऐसा कोई मंत्र*।।

*ऐसा कोई मंत्र,तंत्र सुधरे सरकारी*।

*हो उत्कोचन बंद,सँभल जाएँ अधिकारी*।।

*पूछे आज दिनेश,व्यवस्था कब तक होगी*।

*सुधरेगा कब तंत्र,बताओ मुझको योगी*।।

                        (4)


*बोलो मोदी कुछ यहाँ, अपने मन की बात*।

*गई जान चौबीस की,कौन लगाया घात*।।

*कौन लगाया घात, मौन को तोड़ो अपने*।

*कर दो अब तो बंद,दिखाना दिन में सपने*।।

*सत्ता-भ्रष्टाचार,गाँठ को अब तो खोलो*।

*करता विनय दिनेश,आज तुम मन की बोलो*।।


                  *दिनेश श्रीवास्तव*

                     *ग़ाज़ियाबाद*

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