बुधवार, 7 अक्तूबर 2020

4 मिले 64 खिले

 *ये चमत्कार हिंदी में ही हो सकता है …!!*


*चार मिले चौसठ खिले, बीस रहे कर जोड़!*

*प्रेमी-प्रेमी दो मिले, खिल गए सात करोड़!!*


मुझसे एक बुजुर्गवार ने इस कहावत का अर्थ पूछा। काफी सोच-विचार के बाद भी जब मैं बता नहीं पाया, तब मैंने कहा – बाबा आप ही बताइए, मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा।


तब एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ बाबा समझाने लगे – 


देखो भाग्यवान, यह बड़े रहस्य की बात है – *चार मिले –* मतलब जब भी कोई मिलता है, तो सबसे पहले आपस में दोनों की आंखें मिलती हैं। इसलिए कहा, चार मिले।


फिर कहा, *चौसठ खिले –* यानि बत्तीस-बत्तीस दांत – दोनों के मिलाकर चौसठ हो गए – इस तरह “चार मिले, चौसठ खिले” – हुआ!


*“बीस रहे कर जोड़”* – दोनों हाथों की दस उंगलियां – दोनों व्यक्तियों की 20 हुईं – बीसों मिलकर ही एक-दूसरे को प्रणाम की मुद्रा में हाथ बरबस उठ ही जाते हैं!


वैसे तो शरीर में रोम की गिनती करना असम्भव है, लेकिन मोटा-मोटा अर्थात् अनुमानतः साढ़े तीन करोड़ कहते हैं कहने वाले। तो कवि ने अंतिम रहस्य भी प्रकट कर दिया *– “प्रेमी प्रेमी दो मिले – खिल गए सात करोड़!”*


ऐसा अंतर्हृदय में बसा हुआ प्रिय व्यक्ति जब कोई मिलता है, तो रोम-रोम खिलना स्वाभाविक ही है भाई।


जैसे ही कोई ऐसा मिलता है, तो कवि ने अंतिम पंक्ति में पूरा रस निचोड़ दिया – *“खिल गए सात करोड़”* यानि हमारा रोम-रोम खिल जाता है!


भई वाह, आनंद आ गया। हमारी हिंदी कहावतों में कितना सार छुपा है। एक-एक शब्द चाशनी में डूबा हुआ। 👌😊

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें