शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

लॉक डाउन में इनके साथ / विवेक शुक्ला



Navbharatimes


सुकून एयरपोर्ट से

सटे गांव का

जब सब लॉकडाउन से पैदा हुए हालातों के कारण अब उकताने लगे हैं, तब इस गांव के वाशिंदों को यह दौर कहीं न हीं राहत दे रहा है। इन्हें धरती और आकाश से पैदा होने वाले स्थायी कोलाहल से छुटकारा मिला हुआ है। आइये आपको ले चलें शाहबाद मोहम्मदपुर गांव। ये इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईजीआई) से बिल्कुल लगा हुआ है। इसे तीन तरफ से एयरपोर्ट ने घेरा हुआ है। इसकी और नंगल देवत गांवों की जमीन पर एयरपोर्ट आबाद हुआ था। एयरपोर्ट के लिए जमीनें 80 के दशक के शुरू में अधिग्रहित की जाने लगी थीं।
जाहिर है, जब एयरपोर्ट बन रहा था तो गांव वालों ने नहीं सोचा था कि ये उनकी रातों की नींद ही छीन लेगा। अब एक अनुमान के मुताबिक, इधर रोज एक हजार विमान आते-जाते हैं। दुनिया के दस सबसे बिजी एयरपोर्ट में से एक हैं आईजीआई । रात दसेक बजे के बाद शाहबाद मोहम्मदपुर  गांव का आकाश जगमगा रहा होता है विमानों की रोशनी से। तब इंटरनेशनल फ्लाइट अपनी मंजिल की तरफ निकल रही होती हैं। अब आप सोच लें इन गांव वालों की व्यथा को। गांव में शादी के बाद आने वाली बहुओं को  एडजेस्ट करने में वक्त लगता है। आंख लगती ही नहीं। खैर, गांव वालों  को लॉकडाउन ने गुजरा हुआ वक्त याद दिला दिया है जब विमानों की आवाजाही से इनका जीना मुहाल नहीं था। पर इन्हें सिर्फ आसमान से होने वाली ध्वनि से ही परेशानी नहीं होती। शाहबाद मोहम्मदपुर गांव को चौथी तरफ से घेरा हुआ है रेलवे स्टेशन ने । ये भी काफी बिजी रूट पर है। इधर गरीब रथ, पूजा एक्सप्रेस, दिल्ली-जयपुर और दिल्ली- रेवाड़ी रूट की ट्रेनों के अलावा मालगांडियां भी चलती रहती हैं।

बात यहां ही खत्म नहीं होती। इसके नीचे से गुजरती है मेट्रो रेल। लेकिन इससे गांव वालों को कोई दिक्कत नहीं है। मेट्रो की लाइन अंडरग्राउंड है। इसके बाद बिजवासन गांव है और फिर शुरू हो जाती है गुरुग्राम की सीमा। यानी आप हरियाणा में दाखिल कर जाते हैं। शाहबाद मोहम्मदपुर और इससे सटे दूसरे गांवों में बोलचाल की भाषा में हरियाणवी का पुट साफ महसूस देगा। इधर घूमते हुए समझ आ जाता है कि यहां का समाज अपनी परपराओं से जुड़ा हुआ है। आपको इधर लगभग सभी महिलाएं सिर को चुन्नी या साड़ी से ढ़के हुए ही दिखाई देंगी। शाहबाद मोहम्मदपुर

 का करीब 350 सालों तक का इतिहास मिलने का गांव वाले दावा करते हैं। जाट बहुल गांव में अन्य सभी 36 बिरादरियों के लोग खुशी-खुशी से रहते हैं।  कभी इधर के लोग अपनी खेती की उपज पर आश्रित थे। अब खेती बंद हो चुकी है। यहां एयरपोर्ट के बनने से पहले रबी की फसलें उगाई जाती थीं। गेंहू और बाजरा की खेती खासतौर पर की जाती थी। पर बदले हुए हालातों में नई पीढ़ी सरकारी और प्राइवेट नौकरियों कर रही है। ये सब लॉकडाउन में घरों में बंद हैं।

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