बुधवार, 15 जुलाई 2020

रवि अरोड़ा की नजर से......



जादू की झप्पी

रवि अरोड़ा

बहुत दिनो के बाद मित्र मंडली से मिला । कोरोना के भय के बावजूद हम सब आपस में जम कर गले मिले । इसी दौरान एक मित्र ने कहा कि यारों को गले भी न लगा सकें , एसी ज़िंदगी भी किस काम की । यार दोस्त गले मिलते रहें तो कोरोना भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा । वाक़ई बहुत अच्छा लगा मित्रों को गले लगा कर । यूँ तो रोज़ ही फ़ोन पर बात होती थी । वीडियो चैटिंग भी अक्सर करते थे मगर फिर भी बहुत कुछ अधूरा अधूरा सा था । कहीं किसी बात की कमी थी जो गले लगते ही कही उड़नछू हो गई । हालाँकि बाद में हमने तय किया कि सोशल डिसटेंसिंग की सलाह हमारे भले के लिए ही है और हमें हर सूरत इसका पालन करना चाहिये । इस मौक़े पर हमने जम कर इस मुई बीमारी को गालियाँ भी दी जिसके कारण हम अपनों को गले भी नहीं लगा पा रहे । यार दोस्तों के बीच ही नहीं घर के भीतर भी दिलो दिमाग़ पर एक भय सा तारी रहता है और हम सभी लोग माँ-बाप और बीवी बच्चों से भी दूर दूर की राम राम करने को मजबूर हो रहे हैं । काम धंधे हैं नहीं , नौकरियाँ ख़तरे में हैं , स्कूल कालेज बंद हैं और ऊपर से यह सोशल डिसटेंसिंग ?  अब यार दोस्त गले लगे तो अहसास हुआ कि पिछले कई महीनों से हम क्या मिस कर रहे थे ।

किताबों में पढ़ा था कि बोलियों व भाषाओं के इजाद से पहले इंसान देह की भाषा बोलता था । ज़ाहिर है कि प्यार के इजहार को गले लगाना उसने तभी सीखा होगा । यह गले लगाना हमारे डीएनए में एसा रच बस गया कि धरती का कोई भी कोना हो, कोई  ही देश अथवा संस्कृति हो , गले लगाने को संप्रेषण के ज़बरदस्त माध्यम के रूप में उसने अपनाये रखा । माँ के पहले स्पर्श और आलिंगन पर तमाम रिसर्च हुईं और प्रेमी प्रेमिका के गले मिलने पर हज़ारों-लाखों कवितायें लिखी गईं । बाज़ारी ताक़तों ने साल में एक दिन बक़ायदा आलिंगन के नाम कर दिया और हमसे हग डे ही मनवाना शुरू कर दिया । आध्यात्मिक व्यक्ति कहते हैं कि आलिंगन आत्मा की खुराक है और इसमें एसा कुछ है जो दिखता नहीं मगर अपना काम करता है । केलीफ़ोरनिया यूनिवर्सिटी ने भी अपनी रिसर्च में दावा किया कि गले लगने से मस्तिष्क में आक्सिटोसिन हार्मोन बनते हैं जो तनाव और दुःख को कम करते हैं । इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का एसा संचार होता है जो समस्याओं से जूझने की ताक़त हमें प्रदान करती है । यह रिसर्च कहती है कि महिलाओं पर इसका प्रभाव पुरुषों के मुक़ाबले अधिक होता है । महान मनोविश्लेशक सिग्मंड फ्रायड इसे कैथारसिस का नाम देते हैं तो डाक्टर इसे लव थेरेपी, अफ़ेक्शन थेरेपी और सिम्पेथेरेपी कहते हैं ।

कुछ साल पहले एक फ़िल्म देखी थी मुन्ना भाई एमबीबीएस । फ़िल्म में नायक संजय दत्त जादू की झप्पी यानि गले लगा कर लोगों का इलाज करता है । दुनिया भर के तमाम बड़े नेता भी आलिंगन का महत्व समझते हैं और दूसरे देश के अपने समकक्ष नेता को मिलने पर गले लगाते हैं । प्रधानमंत्री मोदी जी तो जादू की झप्पी देने में सबसे आगे हैं और पंजाबी में कहें तो घुट कर ज़फ़्फ़ी डालते हैं । अब पता नहीं गीतकार गुलज़ार साहब किस रौ में लिख गए कि हाथ से छू के इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो तथा सिर्फ़ अहसास है ये रूह से महसूस करो । गुलज़ार साहब आप विद्वान हैं अब आप ही बताइये कि गले लगाए बिना रूह प्यार को महसूस करे भी तो कैसे ?  समझाइए तो सही कि देह की भाषा को कोई कब तक दरकिनार करे और कैसे ? चलिये अपनी तो आप लोग जानो मैं तो राँझे की हीर की भाँति सुबह शाम गुनगुना रहा हूँ- नी मैं घुट घुट माराँ ज़फ़्फ़ियाँ , मेरे दिल नू चाह चढ़े और कोरोना के दफ़ा होने का बेसब्री से इसी लिए भी इंतज़ार कर रहा ताकि अपनो से घुट कर ज़फ़्फ़ी पा सकूँ ।

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