बुधवार, 24 अगस्त 2016

संस्कृत ही जीवन है




 

 

कर्नाटक स्थित मत्तूरु गाँव

कर्नाटक स्थित मत्तूरु गाँव एक ऐसा गाँव है जहां का बच्चा बच्चा संस्कृत में बात करता है फिर चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान ! इस गांव में रहने वाले सभी लोग संस्कृत में ही बात करते हैं ! तुंग नदी के किनारे बसा ये गांव बेंगलुरु से ३०० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ! इस गांव में संस्कृत प्राचीनकाल से ही बोली जाती है ! हालांकि बाद में यहां के लोग भी कन्नड़ भाषा बोलने लगे थे, लेकिन ३३ साल पहले पेजावर मठ के स्वामी ने इसे संस्कृत भाषी गांव बनाने का आह्वान किया ! जिसके बाद गाँव के लोग संस्कृत में ही वार्तालाप करने लगे !
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1981-82 तक इस गाँव में राज्य की कन्नड़ भाषा ही बोली जाती थी ! कई लोग तमिल भी बोलते थे, क्योंकि पड़ोसी तमिलनाडु राज्य से बहुत सारे मज़दूर क़रीब 100 साल पहले यहाँ काम के सिलसिले में आकर बस गए थे ! मत्तूरु गांव में ५०० से ज्यादा परिवार रहते हैं, जिनकी संख्या तकरीबन ३५०० के आसपास है ! गांव के कई संस्कृतभाषी युवा आईटी इंजीनियर हैं ! यह युवा बड़ी बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं ! कुछ सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो कुछ बड़े शिक्षा संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं ! विदेशों से भी कई लोग संस्कृत सीखने के लिए इस गांव में आते हैं !

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