शनिवार, 27 अगस्त 2016

मूंगफली से टीबी का उपचार संभव








मूंगफली से टीबी का इलाज


प्रस्तुति-  दीपाली पाराशर
मूंगफली से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ता है
मूंगफली से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ता है

अनुसंधानों में पाया गया है कि मूंगफली में पाए जाने वाला एक रसायन तपेदिक यानि टीबी के इलाज में कारगर साबित हो सकता है.

टीबी अब भी सर्वाधिक जानलेवा रोगों में से एक है. हर साल दुनिया भर में 20 लाख से ज़्यादा लोग टीबी का शिकार बनते हैं.

हालाँकि टीबी पैदा करने वाले जीवाणु के संपर्क में आने पर भी अधिकांश लोगों में संक्रमण के संकेत नहीं दिखते.

आर्जिनाइन की अतिरिक्त ख़ुराक से इलाज ज़्यादा असरदार साबित हो सकता है क्योंकि यह रसायन शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता को मज़बूत करता है
डॉ. थॉमस शॉन
यानि इससे यह ज़ाहिर होता है कि शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली टीबी के जीवाणुओं का बख़ूबी मुक़ाबला करती है.

समझा जाता है कि शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली को एकजुट करने में नाइट्रिक ऑक्साइड नामक रसायन की अहम भूमिका होती है.

और वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी रसायन की कमी के कारण लोग टीबी का शिकार बनते हैं.

यानि सिद्धांत रूप में देखें तो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ा कर लोगों को टीबी से बचाया जा सकता है.

शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ाने का एक तरीक़ा है आर्जिनाइन नामक तत्व के कैप्सुल का सेवन. आर्जिनाइन एमीनो एसिड का एक प्रकार है जो मानव शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को अंजाम देता है.

और मूंगफली में आर्जिनाइन की अच्छी ख़ासी मात्रा पाई जाती है.

परीक्षण

स्वीडन के लिंकोपिन विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों ने इथियोपिया में टीबी के 120 रोगियों पर इस सिद्धांत का परीक्षण किया.

रोगियों को चार सप्ताह तक अन्य दवाओं के साथ आर्जिनाइन वाले कैप्सुल या उससे मिलते जुलते कैप्सुल दिए गए.

जिन्हें आर्जिनाइन की ख़ुराक दी गई उन पर उपचार का ज़्यादा असर दिखाई दिया.

तेज़ खांसी जैसे लक्षणों में जल्दी सुधार देखा गया. इसी तरह थूक की जाँच में टीबी के जीवाणुओं के स्तर में कमी देखी गई.

इस परीक्षण के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि आर्जिनाइन थेरेपी की मदद से टीबी के इलाज के समय में कमी लाई जा सकती है.

मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. थॉमस शॉन ने बीबीसी को बताया, "इस बात पर ग़ौर किया जाना चाहिए कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चार एंटीबायोटिक दवाओं की ख़ुराक के ज़रिए टीबी के इलाज की अनुशंसा कर रखी है, वह अब भी महत्वपूर्ण है."

उन्होंने कहा, "आर्जिनाइन की अतिरिक्त ख़ुराक से इलाज ज़्यादा असरदार साबित हो सकता है क्योंकि यह रसायन शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता को मज़बूत करता है."

विशेषज्ञों ने कहा है कि जहाँ आर्जेनाइन दवा के रूप में आसानी से या सस्ते में उपलब्ध नहीं हो वहाँ मूंगफली से इसका काम लिया जा सकता है.

डॉ. शॉन ने कहा, "मूंगफली में वसा जैसे अन्य पौष्टिक तत्व भी होते हैं, जोकि रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं."

अनुसंधान की रिपोर्ट यूरोपियन रेसपाइरैटरी जर्नल में छपी है.

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