शनिवार, 2 जनवरी 2016

किताबी पत्रकार नहीं पत्रकारिता की समझ पैदा करने में मदद करे।



नमस्कार
इस लिंक का अब मैं क्या कर सकता हूं. कैंप तो खत्म हो गया है। मेरे को पत्रकारिता जनसंचार के प्रिंट मीडिया टीवी पत्रकारिता और न्यू मीडिया के किसी भी विषय पर संवाद करने को कह सकती है। पर मेरा पंसदीदा व्याख्यान पहले पत्रकारिताऔर इसमें आ रहे छात्रों के बीच की तैयारी समझ और मीडिया को लेकर मन में व्याप्त अंर्तविरोध और तिलिस्म को खत्म कर जरूरी टिप्स पर केंद्रित रहता है। कभी एक सप्ताह का व्यावहारिक प्रशिक्षण और उसकी रूपरेखा पर हो तो घर क्लास रूम और आपसी सहयोग से बेहतर करने की सामूहिक कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी को बताने पर हो सकता है। किस तरह फेसबुक पर एक पेज बनाकर तमाम छात्र रोजाना अपनी पसंद के अनुसार या पेज के कैरेक्टर के अनुसार खबरों को पोस्ट करके फ्री में अपनी 7मता दक्षता और अपनी गुणवत्ता को बढा सकते है इस कौशल का विकास करे। रोजाना पांच न्यूज लिखने की आदक का अभ्यास हो जिसमें दो दो न्यूज सिंगल और डबल कॉलम का हो और एक खबर लंबी या स्पेशल हो। इन खबरो को आप पेपर में खबर पढकर ही लिखे। इसी तरह की आदि इत्यादि बहुत सारी तैयारी के टिप्स पर काम करने की जरूरत है, ताकि वे खुद को किताबी पत्रकार की बजाय स्वनिर्मित पत्रकार की तरह खुद को विकसित कर सके। पत्रकारिता की पढाई से ज्यादा जरूरी है कि पहले एक सेमेस्टर में पत्रकार बनाने की जरूरतों आवश्यकताओं और लेखन की अनिवार्यता से लैस किया जाए। पत्रकारिता की समझ और पत्रकार की जिम्मेदारी दायित्व जरूरत और खबरों के प्रति उसकी ललक और खबर की प्रस्तुति से अपनी पहचान को आत्मसात करना सीखे। पहले सत्र में ही पत्रकारिता के प्रकार खबरों की विभिन्नता और पत्र पत्रिकाओं में अंतर चरित्र और हर प्रकार की दैनिक सांद्य वीकली पॉपनाईटली मंथली से लेकर अलग अलग कैरेक्टर यानी बाल पत्रिका कार्टून नारी युवा धार्मिक समाचार साहित्यिक खेल सिनेमा पर्यटन शैक्षिक कंपटीटिव प्रतियोगिता व्यस्क पत्रिका सेलेकर रहन सहन बिजनेस लाईफस्टाईल या गर की साजसज्जा रीयल स्टेट या इसी तरह की आधुनिक जीवन से संबंधित पत्रिकाओं को लेकर अलग अलग तरह की पत्रकारिता को भी विश्लेषित करना जरूरी है, ताकि पत्रकारिता के व्यापक दायरे को पहले छात्र समझ सके.
पहले की पत्रकारिता पेन कागज की होती थी।एक पत्रकार की समझ ही मुख्य होता था। मगर अब तो पेनलेस पत्रकारिता का दौर है। अपनी आंख की बजाय कैमरे की आंख से विजुअल के अनुसार की पत्रकारिता की स्क्रिप्ट लिखी जाती है। । फिर पत्रकारिता के अलग मापदंड और विभाग यानी विचार सेक्शन और इंटरटेनमेंट सेक्शन की कार्यप्रणाली और आजकल सबसे ज्यादा लोगों की दिलचस्पी पर खरा उतरने के लिए सामूहिक प्रयास टीम वर्क के बारे में भी जानना आवश्यक है।
इसी तरह के तमाम प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए चात्रों को बताना आवश्यक हो। उसकी रूचि के महत्व के देखते हुए उसके बारे में बताना और जैक ऑफ ऑल बट मास्टर ऑफ नन को लेकर भी बताना जरूरी है। मेरे ख्याल से पत्रकारिता जनसंचार के इतिहास पर भी पहले सेमेस्टर में खासा जोर देना जरूरी है।
खैर बहुत सारी बकवास कर दी मैने . मैं खुदको रोकता हूं नहीं तो अभी और लंबा भाषण हो जाएगा। मगर इन तमाम पहलू को संयोजित कर पहले सेमेस्टर को इस तरह प्लान करना चाहिए कि चात्र मीडिया या पत्रकारिता के कल आज और कल के बारे में जान सके। इस सेमेस्टर के बाद मेरे ख्याल से छात्र इस तरह तैयार हो जाएगा कि हम फिर जिस प्रसंग पर भी गप्प करेंगे तो वो उसकी पकड में होगा । तब उसकी दिलचस्पी अधिक होगी.रोजाना न्यूज सूची बनाना (पेपर में छपी खबर के अनुसार और पांच न्यूज लिखने का अभ्यास हो। हर छात्र का अपना ब्लॉग हो जिसका हर 15 -15 दिन पर पोस्ट खबरों का मूल्यांकन हो ताकि छात्र की समझ और दिलचस्पी का खुलासा हो।
शेष फिर एक नियोजित करीके से पाठ्यक्रम और तैयारी को विकसित किया जाए तो निसंदेह यहां के छात्र हॉर्स की तरह दौडेंगे।
मगर क्षमा के साथ यह मेरा विचार है जरूरी नहीं कि सब सहमत हो । आपको एक पत्रकार बनने और बनाने की इस वैज्ञानिक प्रणाली को उछित और तर्कसंगत मानती हो तो विवि में इस सुझाव को जरूर रखेंगी। किताबी पत्रकार बनना या ना बनना एक समान होता है। ।
शेष फिर 
आपके सुझाव की उम्मीद रखूंगा।
सादर
आपका
अनामी
asb.deo

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