गुरुवार, 26 नवंबर 2015

गरमी से जीव जंतुसमेत धरती बेहाल

 

 

 

 

 

 दिसंबर का महीना, सर्दी का नामोनिशान नहीं

Posted on: December 01, 2014 02:53 PM IST | Updated on: December 01, 2014 02:53 PM IST


नई दिल्ली। दिसंबर का महीना है, लेकिन सर्दी का नामोनिशान नहीं। हल्के-फुल्के कपड़े में धूप सेंकने वाला मौसम है। कायदे से दिसंबर में अच्छी-खासी ठंड होने लगती है मगर इस बार ऐसा नहीं है। इस गुनगुने मौसम का आनंद जरूर लें लेकिन बहुत खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मौसम की ये बेवफाई है खतरे की ग्लोबल घंटी।
धरती धीरे-धीरे गरम ग्रह में बदल रही है। दिल्ली में 28 नवंबर 5 साल का सबसे गरम दिन रहा। 5 साल में नवंबर के सबसे गर्म दिन के तौर पर 28 नवंबर का तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रहा। साल 2014 की ये कोई अकेली घटना नहीं है। दुनिया की गरम मिजाजी का सबसे बड़ा सबूत ये है कि साल 2014 दुनिया का सबसे गरम साल साबित हो सकता है।
दुनिया में 1880 से हर साल के तापमान का रिकॉर्ड रखा जा रहा है, 130 साल के इतिहास में सबसे गरम साल साबित हो सकता है। ये इशारा है कुदरत के उस गुस्से का जिसकी वजह से दुनिया में बारहोमासी मौसम एक जैसा होने की तरफ बढ़ रहा है। यानी मई-जून, दिसंबर-जनवरी हर महीने में दुनिया एक जैसी होगी। ऐसा हुआ तो गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।
लंबे वक्त से जानकार चेता रहे हैं कि एक जैसा मौसम हुआ तो दुनिया प्रलय के मुहाने पर आ सकती है। एक जैसा मौसम अपने साथ कई समस्याएं ले कर आएगा। फसलें चौपट हो जाएंगी, बीमारियां महामारी का रूप लेने लगेंगी और दुनिया के इस बदले चेहरे के जिम्मेदार होंगे हम।
दिसंबर 2014 में सर्दी में भी गर्मी, सितंबर 2014 'जनत' में जल प्रलय, जुलाई 2014 114 साल का सबसे बड़ा सूखा, जून 2014 औसत तापमान 45 डिग्री से.। ये साल 2014 की चार तस्वीरें हैं, जो मौसम के मिजाज में बदलाव का ही नहीं बल्कि सीधे जलवायु परिवर्तन की तरफ इशारा कर रही हैं।
इस साल भारत में हर मौसम में मौसम ने अपना चरम रूप दिखाया है। सितंबर में जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भयंकर बाढ़ आई। जुलाई में बादल ऐसे रूठे थे कि 2014 में 114 साल का सबसे बड़ा सूखा पड़ा और मई-जून-और जुलाई में सूरज के सितम की कहानी ये थी कि भारत के तमाम शहरों में दिन चढ़ते ही कर्फ्यू जैसे हालात बन जाते थे।
इन महीनों में आमतौर पर शहरों का औसत तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास डोलता रहा। रही सही कसर दिसंबर में पूरी होती नजर आ रही है। जिस मौसम में सर्दी से हाड़-मांस कांप जाता था, उस मौसम में लोग स्वेटर पहने बिना दिन में गुलाबी गुनगुनी धूप सेंकते नजर आ रहे हैं।
नवंबर के आखिरी हफ्ते और दिसंबर में मौसम की तस्वीर, 28 नवंबर का तापमान बताने के लिए काफी है। 28 नवंबर का अधिकतम तापमान इस साल 30.2 डिग्री सेल्सियस था। 2013 में ये 28 डिग्री सेल्सियस था। 2012 में 26 डिग्री सेल्सियस ही था।
सर्दी में गर्मी का ये अहसास सिर्फ अहसास की ही बात नहीं है, वैज्ञानिक पड़ताल की हकीकत भी गरम होते ग्रह की कहानी कह रही है। भारत ही नहीं समूची दुनिया में गर्मी बढ़ रही है। अमेरिकी वैज्ञानिक एजेंसी नेशनल ओशियानिक एंड एटमोसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन NOAA ने ताजा आंकड़ों के आधार पर आशंका जताई है कि साल 2014 दुनिया का सबसे गरम साल हो सकता है।
दुनिया में 1880 से यानी जबसे तापमान का रिकॉर्ड रखा जाना शुरू हुआ है, उसके मुताबिक 130 साल के इतिहास में 2014 के पहले 10 महीने सबसे गर्म रहे हैं। अमेरिका में हाल के हफ्तों में शुरुआती कड़ाके की सर्दी के बावजूद धरती के लिए यह साल अब तक का सबसे गर्म साल रहा है।
दुनिया के अबतक के आंकड़ों के मुताबिक में अक्टूबर का हालिया महीना सबसे गर्म रहा है। 20वीं सदी में अक्टूबर के औसत तापमान के मुकाबले साल 2014 का तापमान 0.74 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है, जो इशारा है कि साल 2014 सबसे गर्म साल हो सकता है। हालांकि नासा ने साल 2014 को दूसरा सबसे गर्म साल और ब्रिटेन के मौसम विभाग ने इसे तीसरा सबसे गर्म साल कहा है।
अब तक साल 2010 दुनिया का सबसे गरम साल माना जाता है, इसके बाद 1998 को दूसरा सबसे गरम साल कहा जाता है। साल 2014 दोनों को पछाड़ पाएगा या नहीं, सही मायने में ये तय होगा अगले साल की जनवरी-फरवरी में जब 2014 के पूरे आंकड़े आ जाएंगे।
अलग अलग संस्थाएं अपने तरीके से मौसम का आकलन करती हैं। लिहाजा साल 2014 को लेकर हर संस्था के नजरिए में फर्क दिख रहा है। लेकिन अमेरिका के NOAA, NASA और ब्रिटेन के मौसम विभाग के आंकड़े विश्व मौसम विभाग भी लेता है। इनके आधार पर तय होगा कि साल 2014 कितना गर्म रहा-लेकिन इसमें कोई शक नहीं है दुनिया में गरमी बढ़ रही है।
2009 के कोपेनहेगन समझौते के मुताबिक दुनिया के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की कोई भी बढ़ोतरी खतरनाक हो सकती है। दुनिया के तापमान में 2 से 3 डिग्री बढ़ोतरी के खौफनाक नतीजे सामने आ सकते हैं। भयंकर गर्मी, जबरदस्त सूखा, हाहाकारी तूफान, और जमा देने वाली बर्फबारी से जलवायु हमेशा के लिए बदल सकती है। इस लिहाज से खतरे की घंटी बज भी चुकी है। दुनिया के 10 सबसे गर्म साल 1997 के बाद रिकॉर्ड किए गए हैं। बीसवीं सदी में जहां औसत तापमान 57.1 डिग्री फाहरेनहाइट रहा है वहीं अब पारा इससे एक डिग्री से ऊपर चढ़ चुका है।


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