बुधवार, 6 मई 2015

पत्रकारिता में कैरियर / भविष्य







 
लेखक--शैलेन्द्र कुमार 
प्रस्तुति--नुपूर सिन्हा सुरभि 

भारत में विकास तथा गवर्नेंस का क्षेत्र हाल ही में एक नया उदाहरण बना है, जिसका मुख्य आधार नई नीतिगत व्यवस्था, परिवर्तित व्यवसाय परिवेश और सार्वभौमिकरण है। इन समसामयिक स्थितियों के कारण पत्रकारिता की प्रासंगिकता व्यापक रूप से बढ़ गई है। पत्रकारिता के बढ़ रहे महत्व को देखते हुए, कई मीडिया संस्थाएं शैक्षिक संस्थाएं और इलेक्ट्रॉनिक चैनल स्थापित किए गए हैं। मीडिया समाज तथा शासन का वास्तविक दर्पण बन गया है और जन-साधारण की समस्याओं उनकी मांगो को उठाने तथा उन्हें न्याय दिलाने का एक प्रभावी साधन (प्लेट फार्म) बन गया है।

बदलते परिवेश में प्रायः प्रत्येक करियर की संभावनाओं में आमूल परिवर्तन कर दिया है। पत्रकारिता में करियर एक प्रतिष्ठित व्यवसाय है और कुछ मामलों में एक उच्च वेतन देने वाला व्यवसाय है, जो युवाओं की बडी़ संख्या को आकर्षित कर रहा है। किसी भी राष्ट्र के विकास में पत्रकारिता एक अहम भूमिका निभाती है। पत्रकारिता ही वह साधन है, जिसके माध्यम से हमें समाज की दैनिक घटनाओं के बारे में सूचना प्राप्त होती है। वास्तव में पत्रकारिता का उद्देश्य जनता को सूचना देना, समझाना, शिक्षा देना और उन्हें प्रबुद्ध करना है।

पत्रकारों के लिए अवसर अनंत है। किंतु साथ ही साथ किसी भी पत्रकार का कार्य अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि नया विश्व, इस कहावत को चरितार्थ कर रहा है कि ‘‘कलम (और कैमरा) तलवार से कहीं अधिक प्रभावशाली है।’’ अब घटनाओं की मात्र साधारण रिपोर्ट देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रिपोर्टिंग में अधिक विशेषज्ञता और व्यावसायिकता होना आवश्यक है। यही कारण है कि पत्रकार समाचारपत्रों एवं आवधिक पत्र-पत्रिकाओं के लिए राजनीति शास्त्र, वित्त एवं अर्थशास्त्र, जाचं, संस्कृति एवं खेल जैसे विविध क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करते हैं।

एक करियर के रूप में तीन ऐसे मुख्य क्षेत्र हैं जिनमें पत्रकारिता के इच्छुक व्यक्ति रोजगार ढूंढ़ सकते हैं:
• अनुसंधान एवं अध्यापन
• प्रिंट पत्रकारिता
• इलेक्ट्रॉनिक (श्रव्य/दृश्य) पत्रकारिता

अनुसंधान एवं अध्यापन: यद्यपि उच्च शिक्षा, पत्रकारों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, किंतु अनुसंधान भी पत्रकारिता में एक सामान्य करियर विकल्प है। पत्रकारिता में पी.एच.डी. प्राप्त व्यक्ति कॉलेजों विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थाओं में रोजगार तलाशते हैं। कई अध्यापन पदों पर विशेष रूप से विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अनुसंधान कार्यकलाप अपेक्षित होते हैं। शैक्षिक छापाखानों का यह आधार है ‘‘प्रकाशित करो या नष्ट हो जाओ”। अधिकांश छापाखानों की तरह इसका भी एक सत्य और विरूपण है। यद्यपि यह निश्चित तौर पर सत्य है कि पुस्तकों अथवा लेखों को प्रकाशित करना कार्य - सुरक्षा तथा पदोन्नति का मुख्य मार्ग है और अधिकांश विश्वविद्यालयों में वेतन वृद्धि होती है, यह अपेक्षा ऐसी स्थापनाओं में अधिक लागू होती है जहां मूल छात्रवृत्ति को महत्व तथा समर्थन दिया जाता है। तथापि कई संस्थाएं उन्नति के एक प्रारंभिक मार्ग के रूप में अनुसंधान अथवा अध्यापन पर अधिक बल देती है। कुछ संस्थाएं एक पर दूसरे को महत्व देती हैं तो कई संस्थाओं का प्रयास अनुसंधान तथा अध्यापन के बीच अधिकतम संतुलन बनाए रखना रहा है।

इसके परिणामस्वरूप यद्यपि कुछ व्यवसायों में पत्रकारिता में कोई डिग्री विशेष रूप से अपेक्षित होती है, तथापि, ऐसा शैक्षिक प्रशिक्षण विविध प्रकार के व्यवसायों में जाने की एक महत्वपूर्ण योग्यता हो सकती है। पत्रकारिता में कला-स्नातक या मास्टर ऑफ आर्टस अथवा अनुसंधान (पीएच.डी.) डिग्रियों के लिए, गैर-लाभ भोगी क्षेत्र में, कोई विश्वविद्यालय, कोई संस्थान कोई व्यावसायिक या मीडिया फर्म रोजगार का क्षेत्र हो सकती है। कुछ ऐसे डिग्रीधारी स्व-रोजगार वाले होते हैं और अपनी निजी अनुसंधान अथवा परामर्श-फर्मों के प्रमुख होते हैं। तथापि, इस तथ्य पर बल दिया जाना चाहिए कि उनकी पद्धतियों तथा परिप्रेक्ष्यों को उपयोगिता देते हुए पत्रकारों ने उनके विकास में सहायता की है और वे ऐसे कई क्षेत्रों तथा करियर के पदों पर फैले हो जहां अनुसंधान का न केवल उपयोग किया जाता हो, बल्कि अनुसंधान कार्यों से भी कहीं आगे जाते हों।

प्रिंट पत्रकारिता: प्रिंट पत्रकारिता समाचार पत्रों पत्रिकाओं तथा दैनिक पत्रों के लिए समाचारों को एकत्र करने एवं उनके सम्पादन से संबद्ध हैं। समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं, वे बड़ी हों या छोटी, हमेशा विश्वभर में समाचारों तथा सूचना का मुख्य स्रोत रही हैं और लाखों व्यक्ति उन्हें प्रतिदिन पढ़ते हैं। कई वर्षों से प्रिंट पत्रकारिता बडे़ परिवर्तन की साक्षी रही है। आज समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएं विविध विशेषज्ञतापूर्ण वर्गों जैसे राजनीतिक घटनाओं व्यवसाय समाचारों, सिनेमा, खेल, स्वास्थ्य तथा कई अन्य विषयों पर समाचार प्रकाशित करते हैं, जिनके लिए व्यावसायिक रूप से योग्य पत्रकारों की मांग होती है। प्रिंट पत्रकारिता में कोई भी व्यक्ति सम्पादक, संवाददाता, रिपोर्टर, आदि के रूप में कार्य कर सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता: इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का विशेष रूप से प्रसारण के माध्यम से जन-समुदाय पर पर्याप्त प्रभाव है। दूरदर्शन, रेडियो, श्रव्य, दृश्य (ऑडियो, वीडियो) और वेब जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने दूर -दराज के स्थानों में समाचार, मनोरंजन एवं सूचनाएं पहुंचाने का कार्य किया है। वेब में, कुशल व्यक्तियों को वेब समाचार पत्रों (जो केवल वेब की पूर्ति करते हैं और इनमें प्रिंट संस्करण नहीं होते और लोक प्रिय समाचारपत्रों तथा पत्रिकाओं को जिनके अपने वेब संस्करण होते हैं, साइट रखनी होती है। इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता में कोई भी व्यक्ति रिपोर्टर, लेखक, सम्पादक, अनुसंधानकर्ता, संवाददाता और एंकर बन सकता है।


व्यक्तिगत गुण/कौशल:


पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सफल करियर के रूप में किसी भी व्यक्ति को जिज्ञासु दृढ़ इच्छा शक्ति वाला, सूचना को वास्तविक, संक्षिप्त तथा प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने की अभिरुचि रखने वाला, किसी के विचारों को सुव्यवस्थित करने तथा उन्हें भाषा तथा लिखित-दोनों रूपों में स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करने में कुशल होना चाहिए। दबाव में कार्य करने के दौरान भी नम्र एवं शांत चित्त बने रहना एक अतिरिक्त योग्यता होती है। जीवन के सभी क्षेत्रों से व्यक्तियों का साक्षात्कार लेते समय पत्रकार को व्यावहारिक, आत्मविश्वासपूर्ण तथा सुनियोजित रहना चाहिए। उसे प्रासंगिक तथ्यों को अप्रासंगिक तथ्यों से अलग करने में सक्षम होना चाहिए। अनुसंधान तथा सूचना की व्याख्या करने के लिए विश्लेषण कुशलता होनी चाहिए।


शिक्षा:


यद्यपि स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम एवं अनुसंधान चलाने वाले कई विश्वविद्यालय तथा संस्थान हैं, उनमें कुछ निम्नलिखित हैं:-

• लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
• जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
• भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली
• मुद्रा संचार संस्थान
• सिम्बियोसिस पत्रकारिता एवं संचार संस्थान
• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
(सूचना उदाहरण मात्र है)


तैनाती:


पत्रकारिता में कोई पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद, कोई भी व्यक्ति किसी मीडिया अनुसंधान संस्थान या किसी सरकारी संगठन में एक अनुसंधान वैज्ञानिक बन सकता है। अनुसंधान कार्य के दौरान भी कोई व्यक्ति अन्य अनुदानों तथा सुविधाओं के अतिरिक्त, मासिक वृत्तिका प्राप्त कर सकता है। कोई भी व्यक्ति किसी समाचारपत्र में या इलेक्ट्रॉनिक चैनल में एक पत्रकार के रूप में कार्यग्रहण कर सकता है और अच्छा वेतन अर्जित कर सकता है।

(लेखक एक फ्रीलांस पत्रकार हैं। ई-मेल: shailendra_lu@yahoo.co.in, shailendra_lu@gmail.com)

REPOTER

SAMAJSEVA

book on print journalism

महोदय,
अखबारी पत्रकारिता पर अनेक किताबें बाजार में हैं। इन्हीं में एक किताब आपके इस छोटे भाई की भी जुड़ गई है। किताब बाकी किताबों से इस मायने में अलग है कि इसमें सिद्धांत पर कम अख़बारों की व्यावहारिक पत्रकारिता पर ज्यादा जोर दिया गया है। आजकल अख़बारों के दफ्तरों में किस प्रकार काम होता है, इसकी जानकारी पुस्तक को पढ़कर आसानी से हासिल की जा सकती है।
किताब में बौद्धिकता का आतंक नहीं है। बहुत सरल ढंग से संपादन, रिपोर्टिंग और पेज निर्माण को समझाने का प्रयास किया गया है। इसमें पत्रकारिता के इतिहास के बजाय वर्तमान की बात है। फोकस इस पर रखा गया है कि एक युवा को प्रिंट का पत्रकार बनने के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए और अख़बारों में उसे किस प्रकार का काम करना पड़ता है। अनेक अख़बारों में आज पत्रकार ही पेज भी बना रहे हैं इसलिए पुस्तक में संपादन, रिपोर्टिंग के साथ पेज निर्माण पर भी विशेष सामग्री दी गई है। मुझे विश्वास है कि इस किताब को पढ़कर कोई भी युवा किसी अख़बार के दफ्तर में आत्मविश्वास के साथ प्रवेश कर सकता है।

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