गुरुवार, 26 मार्च 2015

पत्रकारिता के भूगोल का ककहरा



जन संचार के प्रश्नोत्तर 

 

प्रस्तुति- रिद्धि सिन्हा नुपूर

संचार -___संचार चर धातु से बना है | जिसका अर्थ है चलना या एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना
२ संचार के मूल तत्वों पर विचार करे
क-सचारक या स्रोत (संदेश  देने के बारे में सोचना )
ख-सन्देश का कूटीकरण (एनकोडींग-संदेश भेजने वाले के द्वारा  भाषाबद्ध कर संदेश को भेजना  )
ग-सन्देश का कूटवाचन|(डीकोडींग या भाषा ग्रहण करना और संदेश प्राप्त द्वारा संदेश का अर्थ समझना  )
घ-प्राप्त कर्ता (सन्देश प्राप्त करता  )
3 संचार के प्रकार_
अ-- सांकेतिक संचार –जब संचार संकेत के द्वारा हो|  इस  में मनुष्य अपने अंगो या अन्य उपकरणों का प्रयोग करता है|
ब-- मैखिक संचार –जब व्यक्ति बोल कर कोई संकेत पहुचाये | भाषण ,बातचीत
स –समूह संचार – जब कोई पूरा समूह बात हो |इसमें  सामूहिक रूप संचरा होता है |
४ --फीडबैक -- सन्देश पर अपनी प्रतिक्रिया जब संदेस प्राप्त कर्ता उसका  उत्तर  देता है
५--शोर --  संचार के प्रगति में जब बाधा उत्पन हो तो उसे शोर कहते है | यह बाधा किसी भी प्रकार की हो सकती है |
जन संचार – जब किसी समूह के साथ संचार हम प्रत्यक्ष  न कर के किसी यांत्रिक माध्यम से करे तो वहीं  जन संचार है | जन संचार के माध्यम –सिनेमा , रेडियो ,दूरदर्शन सिनेमा |
7 --प्रिंट माध्यम –छपाई वाले माध्यम  जैसे- समाचार पत्र ( न्यूज़ पेपर), पुस्तके( बुक)
८—संवाददाता( रिपोर्टर) – जो समचार को संकलित करे अर्थात जो समाचार अनेक माध्यम से इकठ्ठा करे |
संपादक—जो खबरों को काट-छाट कर छपने योग्य बनाता है|
१०—पत्रकारिता – देश विदेश में होने वाली घटना को इकट्ठा कर उसे सूचना के रूप में प्रकाशित करना |पत्रकारिता के मूल तत्व के रूप में हम नई सूचना को इकट्ठा करना मन सकते है |
११—पत्रकारिता  विविध आयाम – सम्पादकीय , फोटो पत्रकारिता , कार्टून कोना रेखाकन  आदि |
पत्रकारिता के प्रकार –
१२ विशेषीकृतपत्रकारिता—किसी विशेषक्षेत्र की गहराई से  जानकारी  देनी वाली पत्रकारिता ही विशेषी कृत पत्रकारिता है |जैसे खेल पत्रकारिता
१३ खोज परक पत्रकारितासार्वजनिक स्थान पर होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर होने वाली पत्रकारिता ही खोजपरक पत्रकारिता है| टेलीवीजन में इसे स्टिगं ओपरेशन कहते है| जैसे हवाला कांड ,ओपरेशन दुर्योधन आदि |
१४वाचडॉग पत्रकारिता—यह खोजपरक पत्रकारिता का ही अंग है इस में सरकारी विभाग के कम काज पर निगाह रखा जाता है और उसकी गड़बड़ी का पर्दाफाशकिया जाता है |
१५ एड्वोकेशी पत्रकारिता – किसी विचार धारा ,घटना या मत पर जनमत तैयार करना ही एड्वोकेशी पत्रकारिता है | जैसे राम सेतू के लिये जनमत तैयार करने के लिये प्रचार किया गया है |
१६ पेज थ्री पत्रकारिता या पीतपत्रकारिता –सनसनी, ग्लैमर की दुनिया ,या किसी सिलेब्रिटी के बारे बताने वाली पत्रकारिता ही पेज थ्री पत्रकारिता है |
१७-डेड लाईन—कोई भी समाचार जिस अवधि के बाद छापता है वही अवधि उस समाचार पत्र की डेडलाईन है | जो समाचार पत्ररोज छपते है उनकी डेडलाइन २४ घंटे होती है अथार्त जो घटना २४ घंटे पहले की है वह उस पत्र के लिये बेकार है |
१८-फ्लैश या ब्रेकिग – कोई बड़ी खबर कम शब्दों में दिखाई जाए वही ब्रेकिग न्यूज़ है |जैसे मोदी जी प्रधानमंत्री बने आदि |
१९-किसी समाचार पत्र तीन प्रकार के पत्रकार होते है –
पूर्ण कालिक—ये किसी समाचार पत्र के नियमित वेतन भोगी कर्मचारी(पत्रकार) होते है|
अंशकालिक पत्रकार(स्ट्रिगर )—किसी समाचार पत्र में निश्चित मानदेय( धनराशि ) के आधार पर काम करते है| ये कई समाचार पत्र में काम कर सकते है |
३-फ्रिलासर पत्रकार( स्वतंत्र पत्रकार)—ये किसी समाचार पत्र के वेतनभोगी नहीं होते है | ये भुगतान के आधार पर किसी भी समाचार पत्र या संगठन को समाचार देते है |
२०-  समाचार लेखन की शैली को उल्टा पिरामिड शैली कहते है | इस में सबसे महत्वपूर्ण बाते पहले लिखी जाती है उसके बाद कम महत्वपूर्ण बाते लिखी जाती है अंत में सबसे कम महत्व की बाते |
२१-समाचार में छह ककार का महत्व होता है—
१:क्या,२: कब,३: कहाँ,४: कौन,५: कैसे,६: क्यों
समाचार लेखन के तीन अंग है—
शीर्षक—हेडलाइन
मुखड़ा –किसी समाचार के पहले अनुछेद या प्रथम तीन चार पंक्तियोंलिखी गयी बाते मुखड़े के अतर्गत आती है इसमें सामान्यतया चार ककार आते है--१:क्या,२: कब,३: कहाँ,४: कौन |इस में घटना के बारे में सूचना होती है पर उसका विवरण नहीं, जिससे पाठक के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हो|
निकाय( बोडी) – इस में समाचार का विस्तार से वर्णन किया जाता है | इसमें पहले यह बताया जाता है घटना कैसे घटी फिर यह बताया जाता है की घटना क्यों घटी, अत: शेष दोनों ककार इस क्रम में आते है| --१ : कैसे,२ :क्यों

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