शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

बजट की दिलचस्प बातें



नई दिल्ली। देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली आज वित्तीय वर्ष 2014-15 का आम बजट पेश करने वाले हैं। हर भारतीय आज उनकी ओर टकटकी लगाए देख रहा है। अपनी आर्थिक दुश्वारियों से निजात मिलने की उम्मीद कर रहा है। वहीं इंडस्ट्री के दिग्गज इस बजट से ग्रोथ की राह के बूस्टर की आशा लगाए हैं। आप बजट को गंभीरता से लें अथवा इसे अनदेखा करें ये आपकी और आपके परिवार की जिंदगी पर बड़ा असर डालता है। आम बजट 2015-16 से ठीक पहले जानिए बजट के इतिहास से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।
-पहली बार भारत में 7 अप्रैल 1860 को बजट पेश किया गया था। भारत में इसे फाइनेंस मेंबर जेम्स विल्सन ने प्रस्तुत किया था। लेकिन संविधान के अनुरूप बजट की शुरुआत भारत की आजादी के बाद 1947 में हुई। आजाद भारत के लिए पहला आम बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आर के षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 को पेश किया था।
-षणमुखम चेट्टी से जुड़ी एक बात ये कि उनकी थोड़ी सी लापरवाही की वजह से 1947 में इंग्लैंड के वित्त मंत्री ह्यूज डॉल्टन को अपना पद छोड़ना पड़ा था। दरअसल, बजट का कुछ हिस्सा लीक हो गया था और इंग्लैंड में एक पत्रकार ने बजट पेश होने से पहले ही टैक्स से संबंधित जानकारियां सार्वजनिक कर दी थीं। इस वाकये के बाद ह्यूज डॉल्टन को अपना पद छोड़ना पड़ा था और बजट के समय तैयारियों पर हमेशा के लिए सख्ती बढ़ा दी गई।
-जॉन मथाई देश के दूसरे वित्त मंत्री बने थे। उन्होंने 1949-1950 का बजट पेश करते हुए पूरा बजट नहीं पढ़ा। बल्कि बजट के कुछ खास बिंदुओं को सदन में पढ़ा। उनका ये भाषण महंगाई और इकोनॉमिक पॉलिसी पर केंद्रित था। ये बजट ऐतिहासिक था। जिसमें पहली बार योजना आयोग और पंचवर्षीय योजना का जिक्र हुआ।
-भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाला वित्तीय वर्ष 1867 से शुरू हुआ। 1867 के पहले तक 1 मई से वित्तीय वर्ष शुरू होता था और 30 अप्रैल को खत्म होता था।
- 1955-56 से बजट के दस्तावेज हिंदी में भी तैयार किए जाने लगे।
-भारत को 1950 के दशक के बजट में पहली बार ब्रिटेन के अलावा किसी अन्य विदेशी देश की मदद मिली। ये रूस था, जिसने भारत को भारी मात्रा में धन उपलब्ध कराया। पहले नए बने देशों की मदद बड़े देश किया करते थे, उनकी मदद ऐसे देशों की आय का बड़ा स्रोत होता था। सबसे पहले अमेरिका और ब्रिटेन ने ऐसे देशों को मदद की शुरुआत की। लेकिन 1950 के दशक में सोवियत रूस और उसके सहयोगी देशों जैसे चेकोस्लोवाकिया और रोमानिया ने भारत को मदद दी। इस मदद के दम पर 1959 में भिलाई स्टील प्लांट की स्थापना की गई।
-भारत के केंद्रीय बजट में 1955-56 में पहली बार कालाधन उजागर करने की स्कीम शुरू की गई थी। राजीव गांधी ने 1987 के बजट में पहली बार कॉरपोरेट टैक्स का न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स से परिचय कराया था। सरकार के कर राजस्व में सबसे बड़ा योगदान प्रत्यक्ष टैक्स का है। यह 2000-01 में 36 फीसदी था जो 2012-13 में 52 फीसदी हो गया है।
-केंद्रीय बजट में 1994 में सेवा कर का प्रावधान किया गया था। इस बजट को तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने पेश किया था। टैक्स के दायरे में सर्विस सेक्टर को लाने के विचार के कारण ही बजट में सर्विस टैक्स का प्रावधान किया गया था।
-केंद्रीय बजट की घोषणा पहले फरवरी के अंतिम दिन में शाम पांच बजे की जाती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय ब्रिटेन में बाजार खुलने का समय था लेकिन इसके बाद 2001 से वित्त मंत्री केंद्रीय आम बजट संसद में 11 बजे से पहले पेश करने लगे।
-भारतीय बजट इतिहास में सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के नाम है। मोरारजी देसाई ने वित्तमंत्री रहते हुए दस बार बजट पेश किया था। मोरारजी देसाई के बाद अगर किसी का नाम आता है तो वो हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मनमोहन सरकार में वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम, जिन्होंने नौ बार देश के लिए बजट पेश किया।
-देश के लिए मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, यशवंत सिन्हा, वाई बी चव्हाण और सी डी देशमुख ने 7-7 बजट पेश किए हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में 6 बजट पेश किए हैं। वहीं देश के चौथे वित्त मंत्री टी टी कृष्णमचारी ने भी 6 बजट पेश किए।
-जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चरण सिंह, एनडी तिवारी, मधु दंडवते, एस बी चव्हाण और सचिंद्र चौधरी ने एक-एक बजट पेश किया है। पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के साथ वित्त मंत्री भी रहते हुए बजट पेश किए थे। चरण सिंह ने एक बार और मोरारजी देसाई ने चार मौकों पर उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री रहते हुए बजट पेश किया।

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