रविवार, 30 नवंबर 2014

टीवी आधारित विज्ञापन की विशेषताएं






प्रस्तुति- --आलोक सिंह धीरज पांडेय



टीवी आधारित विज्ञापन की विशेषताआंे की बात करें तो हम कह सकते हैं कि आज हर घर में टीवी की पहुंच है। हर घर में तो क्या कई जगह पर तो झोपडियों में रहने वाले लोगों के पास रंगीन टीवी और उपर लगे आॅन एयर डिश जैसी सुविधाएं है। आज टीवी के कारण ही टीवी विज्ञापन का एरिया इतना विशाल हो चुका है कि किसी भी उत्पाद का सफलता का पैमाना टीवी से नापा जाता है। यानि जो दिखेगा वो ही बिकेगा वाली बात साबित हो रही है। इसके कुछ कारण है जो इसे अन्य विज्ञापन माध्यम से अलग करते है वे इस प्रकार है।
1. आॅडियो-वीडियो माध्यमः यह एक श्रव्य-दृश्य माध्यम है जो कम पढे लिखे लोगों के लिए लाभदायक भी है। चित्रित व्यवस्था होने के कारण हर कोई विज्ञापन का सार-सक्षेप समझ जाता है।
2. स्थानीय स्तर पर उपलब्धताः किसी एक शहर या जिले में विज्ञापन करने के लिए सभी विज्ञापन माध्यमों में सबसे प्रबल और टारगेट रीच का माध्यम है टीवी विज्ञापन और इसको पूरा करवाता है केबल टीवी कनेक्शन। केबल के जरिए हम उन क्षेत्रों तक भी पहुंच सकते हैं जहां लोग समाचार-पत्र ही न पढते हो या अन्य कोई मीडिया का यूज ही न करते हो।
3. स्पेशल चैनल, स्पेशल विज्ञापनः यहां स्पेशल से अभिप्राय स्पेशल है यानि कुछ ऐसे विज्ञापन जिन्हें केवल कुछ ही चैनल पर चलाया जाता है या कई ऐसे टीवी चैनल जिन पर स्पेशली विज्ञापन ही चलते है। उदाहरण के तौर पर होमशोप 18 के चैनल पर पूरी तरह से विज्ञापन ही चलते है और ये विज्ञापन केवल होमशोप18 के ही होते हैं। इसी तरह सिनेमा टीवी नामक चैनल पर केवल नाप तोल डाॅट काॅम के ही विज्ञापन चलते है।
4. ग्राफिक्स के जरिए और बेहतरीः आज टीवी विज्ञापन ग्राफिक्स और बेकग्राउंड म्यूजिक के जरिए और बेहतर लगते है। कुछ विज्ञापन तो ऐसे होते है जिसे एक बार देखने के बाद उसकी बेहतर म्यूजिक कंपोज से याद हो जाते है या कही चलते है तो उसकी आवाज सुनते ही जेहन में आ जाता है कि अमुक कंपनी का विज्ञापन आ रहा है।
5. डीलर के आत्मविश्वास को बढावाः जैसा की पहले ही बताया जा चुका है कि आज मार्केट में जो दिखेगा वो बिकेगा वाली कहावत सौ आने सच साबित हो रही है। इसलिए किसी उत्पाद की डीलिंग करने वाला डीलर भी यही चाहता है कि उसके उत्पाद का विज्ञापन टीवी पर आए ताकि वह लोकप्रिय हो और उस उत्पाद की ज्यादा से ज्यादा ब्रिकी हो। आज आपकों हर दुकानदार के पास सैंकडों ऐसे उत्पाद मिलेंगे जिसका विज्ञापन टीवी में आ रहा हो और बगैर टीवी में आने वाले एक-दो। आप भी उन्ही उत्पादांे को खरीदना चाहेंगे जो टीवी में आ रहे हो। ऐसे में टीवी में विज्ञापन आने के कारण डीलर का आत्मविश्वास बढ जाता है।
6. इमिजेट फीडबेकः अविलंब प्रतिपुष्टि से हमारा अभिप्राय विज्ञापन की सफलता-असफलता पर लोगों द्वारा कुछ ही समय में दी गई प्रतिक्रिया है।
प्रायः हम देखते है कि कई बार किसी विज्ञापन के आने के बाद उस उत्पाद की ब्रिकी में जबरदस्त इजाफा होता है, तो कई बार यूं का यूं पडा रह जाता है। ऐसे में कंपनी अपनी डिमांड और सप्लाई का निचैड निकाल कर अंदाजा लगा लेती है कि इस विज्ञापन से कितना लाभ हुआ। इसके अलावा कई बार विज्ञापन में टोल-फ्री या मिस्ड काॅल या अन्य कोई सुविधाएं या प्रलोभन देकर कंपनी उसका फीडबेक ले लेती है।
लिमीटेशन आफ टीवी एडवरटाइजमेंट..
1. महंगाः अन्य विज्ञापन माध्यमों के मुकाबले महंगा है।
2. समय की कमीः प्रायः टीवी में सदा समय की कमी सी दिखाई देती है। विज्ञापन बडे तेजी और कम समय के दिखाई देते हैं। इसका मुख्य कारण है हाई कोस्ट। ज्यादा महंगा होने के कारण विज्ञापनों का टाइम पीरियड काफी स्माल होता है।
3. बिजली समस्याः टीवी विधुत आधारित होता है, इसलिए बगैर लाइटस इसका कोई आधार नहीं होता।
4. अन्य के मुकाबले रिकार्ड या वाइड देखना मुश्किलः आमतौर पर अन्य विज्ञापन माध्यम जैसे समाचार-पत्र में विज्ञापन को बार-बार या पूरी तरह से देखना सुलभ है, लेकिन टीवी में जो एक बार निकल जाता है उसे दोबारा नहीं दिखाया जाता। दूसरा समय की कमी के कारण उसमें उत्पाद से जुडे कुछ तथ्य जैसे टर्म एंड कंडिशन आदि भी छोटे अक्षरों में दिखाए जाते है जिसके बारे में जाना भी नहीं जा सकता। ऐसे में समाचार-पत्र जैसे माध्यम कारगर साबित होते है जिसमें रिकार्ड के साथ-साथ विज्ञापन के हर पहलू पर नजर डाली जा सकती है।
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