सोमवार, 24 नवंबर 2014

सोशल नेटवर्किंग साइट्स का युवा पीढ़ी पर प्रभाव


 

पंकज, सीडिंग

 

जब से समाज की स्थापना हुई है तब से मनुष्य समाज में रहने वाले अन्य लोगों के साथ निरंतर संपर्क साधता रहता है। इसी संपर्क साधने की प्रक्रिया में विकास के चलते नई खोज हुई और सोशल नेटवर्किग साइट्स अस्तित्व में आई। इन साइट्स के जरिए लोग एक दूसरे से संपर्क स्थापित करते हैं। युवा पीढ़ी के लिए यह जानकारी प्राप्त करने, मनोरंजन तनाव से मुक्त रहने, नए लोगों से पहचान बनाने का साधन बन गया है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर वह अपनी बात अपने संपर्क के लोगों के साथ सांझा करते हैं।
अपने शुरूआती दौर में सोशल नेटवर्किंग साइट एक सामान्य सी दिखने वाली साइट होती थी और इसके जरिए उपयोगकर्ता एक-दूसरे से चैटरूम के जरिए बात करते थे और अपनी निजी जानकारी व विचार एक-दूसरे के साथ बांटते थे। इन साइट्स में द वेल, (1985, ‘द ग्लोब डाट काम, 1994, ट्राईपोड डाट काम (1995 शामिल थीं। 90 के दशक से इन साइट्स में बदलाव आया और इसमें फोटो, वीडियो, संगीत, शेयरिंग, आनलाइन गेम्स, विज्ञान, कला. ब्लागिंग, चैटिंग, आनलाइन डेटिंग जैसी तमाम सुविधाएं बढ़ीं। भारत में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली वेबसाइट्स में फेसबुक, ट्विटर व आरकुट शामिल हैं। इसके अलावा हाय फाइव, बेबो, याहू 360, फ्रेंड ज़ोर्पिया आदि कई सोशल नेटवर्किंग साइट उपलब्ध हैं। फेसबुक फरवरी 2004 में लांच हुई थी जिसने बहुत कम समय में युवाओं के बीच पहुंच बनाकर प्रसिद्धि पाई । वहीं आरकुट वर्ष 2004 में बनाई गई थी जिस पर गूगल इंक का स्वामित्व है। ट्विटर वर्ष 2006 में जैक डर्सी द्वारा बनाई गई थी । इसके प्रयोगकर्ता अपने एकाउंट से कोई भी संदेश छोड़ते है जिसे ट्वीटर कहा जाता है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में शोध कर रहीं शोधार्थी पंकज द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर शोध किया जा रहा है और इस शोध का प्रयोजन यह जानना है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स निजी एवं सामाजिक समस्याओं पर निर्णय लेने में युवाओं को कैसे प्रभावित करती है\ क्या यह किसी मुद्दे पर युवाओं की सोच में परिवर्तन कर सकती है\ क्या सोशल नेटवर्किंग साइट आज सूचनाओं एवं मनोरंजन का एक तीव्र माध्यम बन गई है, क्या युवा पीढ़ी इन साइट्स की आदी हो चुकी है\
इसमें कोई शक नहीं है कि आज जीवनशैली को इंटरनेट ने बहुत प्रभावित किया है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी की इस नई तकनीक ने विष्व की सीमाओं को तोड़ दिया है। मैकलुहन के शब्दों में पूरी दुनिया एक वैश्विक ग्राम में बदल चुकी है।
इंटरनेट ने आज विश्व के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ दिया है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए आज कोई भी व्यक्ति एक-दूसरे से कहीं से भी संपर्क साध सकता है। इसका प्रयोग करने वाले युवाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। न्यू मीडिया के इस साधन पर यह शोध कार्य महत्वपूर्ण है।
शोधार्थी- पंकज, सीडिंग इंस्टीट्यूट फार मीडिया स्टडीज (जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी)

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