रविवार, 30 नवंबर 2014

विज्ञापन के प्रकार







प्रस्तुति-- आलोक सिंह राहुल मानव

विज्ञापन के प्रकारों की बात करें तो यह अलग-अलग स्तरों पर निर्भर करता है। जैसे आउटडोर, इनडोर, शैक्षिक, कृषि आधारित आदि लेकिन हम यहां विज्ञापन के वाइड एरिया के अनुसार वर्गीकरण करेंगे ताकि उपरलिखित स्वरूप भी इनमें ही समा जाए।
1. जनसंचार के अनुसार विज्ञापनः विज्ञापन के इस क्लासीफिकेशन से हमारा अभिप्राय मास मीडिया के अनुसार माध्यम का चुनाव करना है जैसे रेडियो माध्यम, टीवी या समाचार पत्र या अन्य कोई माध्यम हमें विज्ञापन करने के लिए चुनने से है।
2. एरिया के अनुसार विज्ञापनः विज्ञापन के इस प्रकार में हम विज्ञापन के क्षेत्र की बात करते हैं जैसे विज्ञापन अंतराष्ट्रीय स्तर का है या राष्ट्रीय या क्षेत्रीय अथवा लोकल
3. कमर्शियल अथवा काॅरपोरेट विज्ञापनः इसे डीफायन करने के लिए हम किसी सोशल या गर्वनमेंट विज्ञापन का आधार लेंगे। प्रायः लगभग सभी विज्ञापन कमर्शियल अथवा काॅरपोरेट जगत से जुडे होते है, क्योंकि सबका एक निश्चित उददेश्य होता है अपने उत्पाद की जानकारी देकर उसकी सेलिंग  प्वाइंट बढाना।
4. गर्वनमेंट विज्ञापनः ये विज्ञापन कमर्शियल या काॅरपोरेट विज्ञापन के बिल्कुल विपरीत होते हैं। इनका उददेश्य किसी वस्तु की जानकारी देकर सैल बढाना नहीं होता, ब्लकि ये केवल जानकारी मात्र का ही प्रायोजन रखते है। इन विज्ञापनों में मुख्यतः कोई संदेश, कोई नियुक्ति संबंधी सूचना, कोइ्र्र सुधी पत्र या किसी नियुक्ति की रद करने जैसी सूचना ही होती है। अगर ये कोई उत्पाद या वस्तु का विज्ञापन ही करते हैं तो उसमें भी सैलिंग की बजाय जागरूकता का ज्यादा प्रभाव रहता है।
5. कम्पीटेटिव विज्ञापनः कम्पीटेटिव यानि प्रतिस्पर्धात्मक विज्ञापन से हमारा अभिप्राय एक दूसरे से अपने आप को बेहतर बताने वाले विज्ञापनों से है। आमतौर पर ये विज्ञापन कमर्शियल की श्रेणी में आते हैं क्योंकि इनका उददेश्य दूसरे से अपने आप को बेहतर बताकर अपने सेलिंग प्वाइंट बढाना ही उददेश्य होता है। इसे केवल किसी वस्तु की डारेक्ट सेलिंग की बजाय दूसरे से बेहतर दर्शाकर सैल बढाने की बजाय कम्पीटेटिव विज्ञापन की श्रेणी में रखा गया है। आम तौर पर हम टीवी में किसी एक डिटरजेंट पाउडर को दूसरे से ज्यादा दाग निकालते देखते है। दावा करने वाली कंपनी एक स्क्रीन की दो विंडो बनाकर दूसरे को नीचा दिखानी की कोशिश करती है, इसी को ही कम्पीटेटिव विज्ञापन कहा जाता है।
6. गैर प्राकृतिक विज्ञापनः अननेचूरल विज्ञापन से हमारा अभिप्राय विज्ञापन को  एनीमेटिड तरीके से पेश करने से है। आजकल हम देखते है कि कई तरह के विज्ञापनों में किसी पात्र को एनिमेशन के जरिए दिखाकर विज्ञापन किया जाता है। या कई विज्ञापन केवल एनिमेशन आधारित ही होते हैं। ऐसे विज्ञापनों को अननेचूरल विज्ञापन कहा जाता है।
7. सामाजिक विज्ञापनः ऐसे विज्ञापनों से हमारा अभिप्राय समाज में जागरूकता लाने वाले विज्ञापनों से है। ये विज्ञापन टीबी, एडस, बालश्रम, बालविवाह आदि से जुडे होते है। किसी प्राकृतिक आपदा के बाद मांगी गई सहायता बारे विज्ञापन भी इस श्रेणी में आते हैं।
8. वारनिंग विज्ञापनः वारनिंग यानि चेतावनी वाले विज्ञापन भी एक तरह से सामाजिक कडी का हिस्सा होते हैं, लेकिन उसी टर्म में कि विज्ञापन का मूल आधार सामाजिक स्तर का हो। जैसे- तंबाकू, सिगरेट के विज्ञापन। इसके अलावा कई ऐसे चेतावनी वाले विज्ञापन होते है जिसका संबंध उत्पाद की ब्रिकी बढाने से कोसों दूर होता है। आमतौर पर किसी कंपनी द्वारा अपने किसी कर्मचारी के प्रति लोगों को सूचना देकर उससे लेनदेन करने से रोकने की सलाह, किसी उत्पाद की हो रही नकल को लेकर असली कंपनी द्वारा उसका चेतावनी स्वरूप विज्ञापन आदि चेतावनी विज्ञापन के रूप में गिने जाते है।

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