रविवार, 5 अक्तूबर 2014

प्रसारण में अच्छी प्रस्तुति





प्रस्तुति-- धीरज, किशोर प्रियदर्शी


प्रसारण के दौरान ये ज़रूरी है कि आप अपनी आवाज़ के सही इस्तेमाल को समझें. केवल अच्छी आवाज़ से ही प्रस्तुति अच्छी नहीं हो जाती. प्रस्तुति के दौरान आप शांत और स्वाभाविक सुनाई दें इसके लिए माइक्रोफ़ोन के इस्तेमाल जैसी बातों को समझना भी ज़रूरी है. इस बारे में बीबीसी के वॉयस विशेषज्ञ की कुछ व्यावहारिक सलाह.


माइक्रोफ़ोन के ठीक से इस्तेमाल और स्वाभाविक तथा शांत सुनाई देने के लिए कुछ तकनीकें
वॉयस विशेषज्ञ एल्सपेथ मॉरिसन माइक्रोफ़ोन के बेहतर इस्तेमाल के बारे में कुछ उपयोगी सुझाव देती हैं.
वे कहती हैं कि माइक को अपने मुँह के बहुत कऱीब रखने से बचें. आपने गायकों को ऐसा करते देखा होगा, मगर गाना और बोलना अलग-अलग चीज़ें हैं.
इसकी जगह, आप माइक्रोफ़ोन को एक इंसान का कान समझें और उसी हिसाब से दूरी का पालन करें.
वॉल्यूम, यानी आवाज़ के ऊँची-नीची रहने के बारे में भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है.
आप किसी भीड़ को संबोधित नहीं कर रहे, इसलिए गरजने की ज़रूरत नहीं. ना ही आपको किसी ऐसे विज्ञापन की तरह सुनाई देना चाहिए जहाँ कलाकार की आवाज़ लगभग फ़ुसफ़ुसाहट जैसी होती है.
साँस लेना याद रखें
यदि आप स्वाभाविक रूप से साँस नहीं लेते तो आप तनावग्रस्त सुनाई देंगे.
साँस लेना भूल जाने का असर ये होता है कि आप थक जाएँगे और ऐसी जगहों पर रूकना शुरू कर देंगे जो अस्वाभाविक सुनाई देगा.
आप सही जगहों पर साँस ले सकें, इसके लिए आप अपनी स्क्रिप्ट में निशान बना सकते हैं. गहरी साँस लेने की जगह के लिए एक पूर्ण विराम लगा सकते हैं और जहाँ हल्की साँस लेने से काम चल जाए, वहाँ कॉमा लगाया जा सकता है ताकि वाक्य पूरा पढ़ा जा सके.
आवाज़ का ख़याल रखना
आपको अपनी आवाज़ का समुचित ख़याल रखना चाहिए और प्रयास करना चाहिए कि प्रसारण पर जाने से पहले आप तैयार हों.
एक प्रसारण पत्रकार के तौर पर आपके पेशे में आपकी आवाज़ एक महत्वपूर्ण साधन है.
अतः इसका ध्यान रखना ज़रूरी है.
क्या अच्छा है? पानी - ये आपका सबसे अच्छा दोस्त है. ये सुनिश्चित रखें कि आप प्रसारण वाले दिन अच्छी तरह से पानी पीते रहें.
और ख़राब?
धूम्रपान, कॉफ़ी, कुछ ख़ास तरह के भोज्य पदार्थ और दवाओं से आपकी आवाज़ सूख सकती है या इनका और भी दूसरा असर हो सकता है, इसलिए इनका ध्यान रखना चाहिए.
वैसे आवाज़ का ध्यान रखना, अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग हो सकता है, इसलिए सबसे अच्छा सुझाव ये है कि आप स्वयं ये पता लगाएँ कि आपके लिए क्या ठीक लग रहा है और क्या नहीं.
वॉर्मिंग अप
आपकी आवाज़ इस बात पर निर्भर करती है कि आपका शरीर कैसा महसूस कर रहा है.
देर रात या बहुत अधिक सुबह प्रसारण करते समय तरोताज़ा सुनाई देने का उपाय ये है कि आप ऐसा व्यवहार करें जैसे आप बिल्कुल जागे हुए हैं, भले ही आप ऐसा महसूस ना कर रहे हों.
प्रसारण के दौरान कुछ ही समय के लिए तरोताज़ा सुनाई देने के लिए एल्सपेथ कुछ और उपाय सुझाती हैं.
जैसे– कैसे बैठे हैं इसका ध्यान रखना, यदि सीधे ना बैठे हों तो आवाज़ पर असर पड़ सकता है. कुछ लोगों को खड़े होकर बोलने में आसानी होती है. और यदि आप सामान्य जीवन में कोई ख़ास भाव-भंगिमा अपनाते हैं तो आप प्रसारण में भी उनका इस्तेमाल करें, अन्यथा आप स्वाभाविक सुनाई नहीं देंगे.

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