गुरुवार, 23 अक्तूबर 2014

गूगल देव को प्रणाम


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प्रस्तुति--जूही सिन्हा, रूही सिन्हा


सुशील झा सुशील झा | शुक्रवार, 12 फरवरी 2010, 18:13 IST
तैंतीस हज़ार करोड़ देवी देवताओं की जमात में जल्दी ही एक नाम और जुड़ने वाला है. भगवान गूगल का.

भगवान गूगल की महिमा अपरंपार है. वो सर्वज्ञानी हैं. सभी समस्याओं के बारे में जानते हैं और उनके पास समाधान भी है.

जिन मामलों में आम देवता कुछ नहीं कर सकते गूगल उनमें भी मदद कर सकते हैं.

पढ़ाई करनी हो, शादी करनी हो, दुःख प्रकट करना हो, खुशी प्रकट करनी हो, सब में गूगल महाराज की मदद ली जा सकती है.

उनके दस हाथ या दस सर नहीं हैं बल्कि लाखों हाथ और सर हैं जिन्हें वेबपेज कहा जाता है.

कुछ भी जानना हो तो गूगल देव को याद कीजिए. मात्र स्मरण भर से पुण्य मिलता है और सवाल पूछते ही जवाब मिल जाता है.

बड़े फ़ायदे हैं गूगल के तभी वो देवताओं की श्रेणी में शामिल होने ही वाले हैं. अगर नहीं मानते हैं तो याद कीजिए आखिरी बार किसी सवाल के जवाब के लिए आपने कौन सी किताब उठाई थी?

या फिर किसी दोस्त से किसी तथ्य की प्रमाणिकता के लिए आपने कब किसी अख़बार का हवाला दिया था?
कोई तथ्य प्रमाणिक न लगे तो सीधे गूगल महाराज की शरण में जाना आपको ज़रुर याद आएगा.

हां ये बात और है कि गूगल महाराज आपको संपादित सामग्री नहीं देते. वो दुनिया भर की सारी जानकारी आपको दे देते हैं. उसमें सही और ग़लत क्या है ये आपको ही तय करना है.

गूगल देव का सबसे बड़ा वरदान पत्रकारों को मिला है. उनकी भूमिका जर्नलिज़्म में इतनी बड़ी है कि कई लोग अब जर्नलिज़्म की बजाय गूगलिज़्म करते हैं और उनके लिखे ( या चुराए?) गए लेख काफ़ी पसंद भी किए जाते हैं.

हां गूगल देव के किसी दूसरे भक्त ने देवता की मदद से ये चोरी पकड़ ली तो बात और है.

गूगल की महिमा बताने वाली एक किताब है, 'व्हाट वुड गूगल डू' यानी गूगल क्या करता.
ये किताब गूगल देव की असीम लोकप्रियता और सफलता के बारे में बताते हुए सलाह देता है कि आज के युग में कुछ भी करना हो तो ये ध्यान करें कि अगर गूगल देव आपकी स्थिति में होते तो क्या करते? बस उस कार्य में सफलता आपके क़दम चूम सकती है. पुस्तक के बारे में और जानकारी के लिए गूगल पर पुस्तक का नाम टाइप कर सकते हैं.

लेकिन गूगल देव आप पर कितने मेहरबान हैं इसके भी उपाय हैं यानी देवता को क्या भेंट करना है तो देवता प्रसन्न हों ये भी जानना ज़रुरी है.

मसलन अगर आप चाहते हैं कि सर्च में आपकी सामग्री सबसे ऊपर दिखे तो उसके भी तरीके हैं जिसकी जानकारी या कंसल्टेंसी के लिए गूगल देव के पुजारी अच्छी ख़ासी दक्षिणा लेते हैं.

प्रभु को खुश करने के लिए दक्षिणा तो देनी पड़ती ही है.

वैसे इंटरनेट रुपी ब्रहांड में और भी देवता हैं जो गूगल देव से बराबरी करना चाहते हैं मसलन याहू देव, एओएल देव इत्यादि लेकिन गूगल का स्थान गणेश जी की तरह है. सबसे पहला.

इंटरनेट के ब्रहांड में सबसे पहले गूगल की पूजा होती है.
अब अक्सर जब लोगों को अपनी लोकप्रियता की चिंता होने लगती है या यह सवाल सताने लगता है कि दुनिया में लोग उन्हें जानते भी हैं या नहीं, तो वे फिर गूगल की ही शरण में जाते हैं.
सर्च में जाकर अपना नाम डालिए और गूगल बता देगा कि इंटरनेट की दुनिया में आपकी पहचान कितनी बड़ी है.
ऐसे गूगल देव को शत-शत प्रणाम, जिनके बिना जीवन मुश्किल ही नहीं असंभव सा लगने लगा है.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 18:48 IST, 12 फरवरी 2010 Ankit : आपका गूगल चालीसा बहुत अच्छा लगा..क्यूंकि ये बहुत सही भी है..लेकिन गूगल देव को अभी बहुत आगे बढ़ाना है..गूगल का नया Google Buzz शायद ही फेसबुक या ट्विटर के आगे टिक पाएं...लेकिन मोटे तौर पर अभी तो गूगल ही सबसे बड़े देवता है (वैसे सुशील जी ३३ कोटि देवता का एक मतलब ३३ प्रकार के देवता से है ३३ करोड़ देवता से नहीं...! वैसे इतने भी कम नहीं है..)
  • 2. 19:31 IST, 12 फरवरी 2010 समीर लाल: गुगल देव को नमन!
  • 3. 19:31 IST, 12 फरवरी 2010 ANIL PANDEY, BEIJING : गूगल देव को प्रणाम करना शायद ही कोई इन्टरनेट यूज़र भूलता हो. यूं कहें कि गूगल के बिना ज़िंदगी अधूरी है तो इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए. गूगल ही नहीं अमेरिका के बिना भी दुनिया में पत्ता नहीं हिलता, भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ओबामा के स्टेट डिनर देने पर तो मानो हर कोई उनका ही क़ायल हो गया है. नीतियों या परमाणु क़रार की बात भूल जाइए. वैसे गूगल की बात हो रही है तो चीन को कैसे भूला जा सकता है आजकल उसी ने अमेरिका की नाक में दम जो कर रखा है. हाल में साइबर अटैक के बाद तो गूगल ने चीन से अपना सामान समेटने की धमकी भी दे डाली. लेकिन ये काम इतना आसान नहीं है, बाज़ार का जो मसला है. वैसे चीन में गूगल का मार्केट शेयर महज़ ३७ प्रतिशत है. जबकि देसी सर्च इंजन बायदु ने ६३ फीसदी बाज़ार पर अपनी पकड़ बना रखी है.इसके बावजूद गूगल अगर चीन से नाता तोड़ ले उसका ही ज़्यादा नुक़सान होगा, ऐसा जानकारों का माना है. लेकिन इतना तय है कि हू जिन ताओ गूगल को बिना सेंसर के चलने की इजाज़त नहीं देने वाले. ऐसे में चीन में गूगल देवता को भी अपना मस्तक झुकाना पड़ रहा है. पर भारत में तो इन्टरनेट की शुरुआत ही अक्सर गूगल के आगे धूप बत्ती जलाने से होती है... मैं यही कहूँगा गूगल की जय हो, जय हो अमेरिका के बाज़ार की. जय हो यू टयूब की. वाक़ई देवता से कम नहीं है इंटरनेट.
  • 4. 19:42 IST, 12 फरवरी 2010 himmat singh bhati: सुशील जी, अव्वल तो गूगल इंसानों की बनाई साइट है, वह भी भेट चढ़ाने पर ऊपर चढ़ती है नहीं तो पीछे ही रहती है. इसे देवता की श्रेणी में तो नहीं रखा जा सकता. यह बड़ी बात है कि इंसान से ग़लती नहीं होती तो वह भी देवता कहलाता! यह कमी तो गूगल में भी है. यह सही है कि लिखने वालों की मुराद ज़रूर पूरी होती है जो चुरा कर अपना काम निकालना चाहता है.
  • 5. 20:10 IST, 12 फरवरी 2010 BALWANT SINGH HOSHIARPUR PUNJAB : सुशील जी, काफ़ी दिनों बाद ब्लॉग पर आपके दर्शन हुए. भाई गूगल देव की भांति आते जाते रहा करो. गूगल देवो भव:, गूगल शरणम गच्छामि. खूब सच्चाई ब्यान की है आपने. एक मज़ेदार बात है. मैंने 7-8 साल पहले अपने बेटे का नाम गूगल की तर्ज़ पर गूगली रखा परंतु धीरे -धीरे उसका नाम बच्चों ने गूगल डॉट कॉम रख दिया. बड़ी मुश्किल से उसका नाम बदला. लेकिन अभी भी कुछ बच्चे गूगल डॉट कॉम के नाम से पुकारते हैं.| चलो अच्छा है हमारे देवताओं की सूची में एक नाम और सही. हो सकता है आने वाले समय में इस देवता के भव्य मंदिर भी अस्तित्व में आ जाएँ. वैसे तो हर कंप्यूटर इस देवता का आवास है. यह ऐसा देवता है की जिसके भक्त विश्व के कोने-कोने में विद्यमान हैं. इस देवता को न तो देशों की सीमाएं बाँट पाईं और न ही यह रंग ,नस्ल- भेद ,भाषा ,जात-पात और राजीनीतिक दायरों में सीमित रहा. इसकी व्यापकता कितनी अपरमपार है. धन्य हो गूगल देवता. तुझे शत -शत प्रणाम.
  • 6. 20:55 IST, 12 फरवरी 2010 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA: सुशील जी, यह तो बहुत ही शानदार है लेकिन गूगल को भगवान का दर्जा देना मेरे ख़्याल से 100% ग़लत है. एक साइट भगवान नहीं हो सकती है. कृपया आप इसे भगवान से न जोड़ें तो बेहतर होगा.
  • 7. 20:56 IST, 12 फरवरी 2010 Avinash kumar Singh: सच में यह विचार सत्य पर आधारित है और आपने जो लिखा है वह हर जगह सारी दुनिया में सही है. शुक्रिया.
  • 8. 21:32 IST, 12 फरवरी 2010 himmat singh bhati: सुशील जी, कमियां आपमें भी हैं और गुगल में भी और मैं भी इससे अछूता नहीं हूं क्योंकि मुझमें भी कमियां हैं. अगर कमियां नहीं होतीं तो हम सभी भगवान गिने जाते. और रही बात गूगल की तो यह सही है कि भगवान के दर्शन करने के लिए पुजारियों को भेंट देने पर बेसमय भी भगवान के दर्शन किए जा सकते हैं. यहां भी आपकी बात सही है कि गूगल से जुड़े लोगों को भेंट करने पर पहले पन्ने पर खोज के दर्शन हो सकते हैं. इसलिए गूगल को भगवान नहीं लेकिन कुछ हद तक कलयुग भगवान कहा जा सकता है. अगर आप गूगल को भगवान न कह कर भेंट वाले भगवान कहते तो बात और भी निखर कर सामने आती. फिर भी बुरा नहीं बहुत कुछ ठीक है.
  • 9. 21:47 IST, 12 फरवरी 2010 ashok: व्यंग सीधा और सरल है और तीखा बनाने का प्रयास करें. धन्यवाद.
  • 10. 22:31 IST, 12 फरवरी 2010 Malik Faisal: क्या बकवास है, कुछ अच्छा लिखए जो यह शक न पैदा कराए कि आप पत्रकार नहीं है.
  • 11. 22:44 IST, 12 फरवरी 2010 ANIL MISHRA,Guelph,Ontario,Canada: यह दुनिया का ताज़ा-ताज़ा आश्चर्य है. किसी से पूछने, किताब खोलने और दोबारा जांच करने से अच्छा है गूगल पर खोज लें, गूगल को सर्वे-सर्वा का नाम दिया जाना चाहिए. इस प्रकार गूगल देवता को कोटि-कोटि प्रणाम.
  • 12. 00:17 IST, 13 फरवरी 2010 Chandan Kumar: काफ़ी अच्छा लेख है. पर अब गूगल करके देखना होगा कि कहीं आपने भी यह लेख गूगल करके चुराया तो नहीं है!
  • 13. 03:51 IST, 13 फरवरी 2010 Satish Ranjan: सुशील जी, आप अपने इस ब्लॉग के ज़रिए क्या कहना चाहते हैं ? यह सिर्फ़ मज़े के लिए है या फिर गूगल का प्रचार!
  • 14. 07:44 IST, 13 फरवरी 2010 Arunesh: अब आपने गूगल को भी भगवान बना दिया! बिल गेट्स को क्या कहेंगे? मुझे पता है यह उपमावादी अलंकार का प्रयोग है लेकिन भगवान का दर्जा दिया जाना कुछ हज़म नहीं हुआ. आज भी बहुत से लोग हैं जो गूगल का प्रयोग करते हुए पाठ्य पुस्तक में भी देखते हैं. अगर आप किसी वैज्ञानिक से बात करें तो आपके बयान पर वह सिर्फ़ ज़ोर से हंसेगा! शायद आपने काफ़ी समय से किताब उठाने की ज़हमत नहीं उठाई है. कल को हैरानी नहीं होगी अगर आप बीबीसी को भी किसी देवी की तुलना में प्रयोग न करें! कृपया अपनी क़लम में थोड़ी धार लानी शुरू कीजिए. ब्लॉग पढ़कर सिर्फ़ निराशा हुई है!
  • 15. 11:45 IST, 13 फरवरी 2010 anand dev: गूगल देव को मेरा भी प्रणाम...
  • 16. 12:59 IST, 13 फरवरी 2010 Anupam Gupta: वाह, काफ़ी अच्छा है.
  • 17. 13:04 IST, 13 फरवरी 2010 braj kishore singh: गूगल को भगवान घोषित करनेवाले सुशीलजी आपको बार-बार नमस्कार है. आपने गूगल को भगवान बना दिया क्योंकि आपके पास इतना पैसा है कि आप गूगल का उपयोग कर सकें. लेकिन इस दुनिया में अब भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके लिए रोटी ही भगवान और सूरज-चाँद सबकुछ है. क्या आपका गूगल भगवान उनकी ज़रूरतें पूरी कर सकता है?
  • 18. 14:27 IST, 13 फरवरी 2010 Sanjay Kareer: सही कहा लेकिन कुछ नया नहीं... यह एक दोधारी तलवार है, आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे इस्‍तेमाल करते हैं. ज़िंदगी गूगल के बिना भी चलेगी और उसमें कुछ चीजें शामिल नहीं होंगी.
  • 19. 14:30 IST, 13 फरवरी 2010 AfsarAbabsRizvi "Anjum": सुशील जी आपने जिस ओर सबका ध्यान आकर्षित किया है इसमें कोई शक नहीं कि आज इंटरनेट का ज़माना है. लेकिन साथ ही आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि हम और आप भारत में रहते हैं, यहां पर कितने प्रतिशत लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं. वैसे आपका व्यंग क़ाबिले-तारीफ़ है लेकिन यह बात हमारे भारत पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती क्योंकि जिस देश में लोग भूख से लड़ रहे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं वहां लोगों को गूगल देवता के बारे में क्या पता. हां आपकी बात अमरीका और यूरोप में 100% सच साबित होती है.
  • 20. 14:54 IST, 13 फरवरी 2010 kuldeep: ये कैसी बेतुकी बात है. भगवान का मज़ाक़ न उड़ाएं.
  • 21. 15:28 IST, 13 फरवरी 2010 Shambhu Kumar Singh: प्रिय भाई सुशील जी! बीबीसी हिन्दी की गुणवत्ता, महत्ता और विशेषता विश्वविदित है. आप जो कुछ भी लिख रहे होते हैं, उससे पहले आपको अच्छी तरह से सोच-विचार लेना चाहिए कि क्या आपके अंदर से वो पत्रकार निकलकर सामने आ पाया है, जो आप है? भाई आप बीबीसी जैसे परिवार के पत्रकार हैं.
  • 22. 16:28 IST, 13 फरवरी 2010 neelkamal: सही है जी.
  • 23. 17:08 IST, 13 फरवरी 2010 प्रभाकर चंचल: गुगल की महिमा का गुनगान आपने बड़े ही सुंदर तरीके से किया है...गुगल तो आज के युग का एक भगवान है....जिन्हे इंटरनेट की सहायता से बड़ी आसानी से पाया जा सकता है...ये देवता हमारी हर समस्या का समाधान करते हैं...हमें समझते है....इनके पास वो सबकुछ है जो हमारे काम का है है...मैंने भी गुगल की महिमा का गुनगान अपने कुछ शब्दों में किया है....अगर आप मुझे अपना पता दें तो मैं आपको अवश्य भेजुंगा...मेरा लेख भी आपके लेख से काफी मिलता जुलता है...आप मुझे अपना पता और फोन नंबर मेल ज़रूर कीजिएगा....ताकि मैं आपके विचार भी अपने लेख पर जान सकूं.
  • 24. 19:14 IST, 13 फरवरी 2010 पुष्प कुलश्रेष्ठ : बिना गूगल नेट के कुछ संभव नहीं.
  • 25. 19:26 IST, 13 फरवरी 2010 समीर गोस्‍वामी : कम से कम लेख पढ़ने वालों को टिप्‍पणी करने से पहिले व्‍यंग्‍य की समझ होनी चाहिए. टिप्‍पणी करने वाले कुछ लोग मुझे कम दिमाग के लोग समझ आ रहे हैं. ऐसे ही लोग देश में जातिगत तनाव पैदा करते हैं. सुशील जी शुक्र मनाईए कि आप अल्‍पसंख्‍यक समुदाय से नहीं हैं, नहीं तो आपको भारत में रहने के एवज में तमाम धर्म के तथाकथित ठेकेदारों से आपको व्‍यंग्‍य करने के लिए माफी मॉंगनी पड़ जाती. बहरहाल बहुत बढि़या लेख है बधाई हो.
  • 26. 19:38 IST, 13 फरवरी 2010 Prem Verma: बिनु पग चले, सुने बिनु काना!
    कर बिनु कर्म करे बिनु नाना!!
    ये वो लक्ष्ण हैं जो कि भगवान या ब्रह्म में बताए गए हैं और गूगल इनमें से कई लक्ष्णों को पूरा करता है. सटीक ब्लॉग के लिए साधुवाद.
  • 27. 20:59 IST, 13 फरवरी 2010 सुन्दर एस नेगी: सुशील जी आपने गूगल को गूगल देव कहा, लेकिन गूगल में तो बहुत सी खामीया है जो शायद कभी सही नही होंगी. हम भी कई बार गूगल का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उसकी सच्चाई पर शक जरूर होता है.
  • 28. 22:49 IST, 13 फरवरी 2010 AMIT KUMAR JHA: गूगल देव की महिमा अपार है, और वो भी आज के इस सूचना क्रांति युग में कहें तो वो सर्वशक्तिमान बने बैठे हैं जिनका प्रसाद पाने को हर इंटरनेट यूज़र्स लालायित रहता है. सच है, इंटरनेट पर कोई भी, कैसी भी जानकारी चाहिए, गूगल देवता की शरण में आइए और पल भर में उससे सम्बंधित सारी जानकारियां आपके सामने हाजिर हो जाती हैं. यह चमत्कार नहीं तो और क्या है. गूगल देव को सत सत नमन और इस आधुनिक कथा के प्रस्तुतकर्त्ता सुशील झा को धन्यवाद.
  • 29. 08:17 IST, 14 फरवरी 2010 Dhirendra jha: बहुत अच्छा लिखा है आपने. कुछ लोगों के लिए ये सच में गूगल भगवान की तरह है. मेरा सत् सत् प्रणाम है गूगल को.
  • 30. 10:50 IST, 14 फरवरी 2010 NILAMBUJ SINGH: जो लोग व्यंग्य समझ नहीं सकते वो भी दनादन कमेन्ट किए चले जाते हैं. अफ़सोस! सुशील जी काफी उम्दा लेख लिखा है आपने. अंकित का कहना ठीक है कि देवता 33 कोटि के हैं मतलब 33 तरह के हैं. वैसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. गूगल शरणम गच्छामि!
  • 31. 08:08 IST, 15 फरवरी 2010 Amit Anand Mahishi: गूगल की महिमा अपरंपार है.
  • 32. 08:33 IST, 15 फरवरी 2010 आनंद मिश्र: बहुत ही बेहतरीन हास्य-व्यंग लेख के लिए सुशील जी को धन्यवाद.
  • 33. 12:07 IST, 15 फरवरी 2010 ABHISHEK TRIPATHI: झा साहब क्या कॉलम लिखा है. पढ़ कर मज़ा आ गया. लेकिन ये बताएं कि यह सकारात्मक टिप्पणी है या नकारात्मक?
  • 34. 14:56 IST, 15 फरवरी 2010 Shashi Bhandari: गूगल देव को मेरा प्रणाम, गूगल देव की जय हो...
  • 35. 20:46 IST, 15 फरवरी 2010 Satish Chandra: वाह वाह सुशील जी वाह वाह. मज़ा आ गया आपका गूगल चालीसा पढ़कर. गूगल चालीसा के लिए आपको मेरी तरफ़ से बहुत बहुत सराहना.
  • 36. 13:51 IST, 16 फरवरी 2010 sandeep kumar: क्या ख़ूब लिखा है. वाक़ई आज के दिन गूगल की महिमा अपरंपार है.
  • 37. 17:36 IST, 16 फरवरी 2010 manorath rana: लगता है आप भी उन पत्रकारों की जमात में शामिल है, जो पत्रकारिता का नहीं गूगल महिमा का मंडन करते है, लेख पढ़कर ऐसा लगा जैसे किसी आठवीं कक्षा के विद्यार्थी ने इंटरनेट विषय पर निबंध लिखा हो. एक दम बकवास एवं बेकार दर्जे का लेख.
  • 38. 14:31 IST, 17 फरवरी 2010 Bhanu: अब गूगल देव के बारे मैं क्या कहूं. देवों मैं देव महादेव हैं गूगल बाबा. मैं इनको गूगल बाबा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि यह भी भोले बाबा की तरह सारे कष्टों को दूर कर मनुष्य को सफल बनाते हैं. इसलिए सभी गूगल भक्त जनों से मेरा हार्दिक अनुरोध है की वे हाथ जोड़ कर गूगल देव की उपासना करें उनकी मनोकामना गूगल बाबा जरूर पूरी करंगे. अंत मैं बस इतना ही कहूँगा बोलो देवा धी देव गूगल देव की जय
  • 39. 06:21 IST, 18 फरवरी 2010 Kautilya: माना कि गूगल जो चाहे वह जानकारी आपको उपलब्ध करा देते हैं. पर यह मनुष्य के मस्तिष्क की ऊंचाइयों से कहीं परे है. क्या गूगल वह गाना ढूंढ सकता है जिसकी शुरुआती धुन ही मुझे याद हैं शब्द नहीं? गूगल क्या वह चित्र खोज सकता है जिसे मैंने बचपन में कहीं देखा था जिसके रंग और सजीवता मुझे अभी तक याद हैं? क्या गूगल मुझे वह सुगंध ढूंढ़ कर दे सकते हैं जिसे मैंने कहीं सहज ही महसूस की थी? मेरा मस्तिष्क ये सारी बातें सर्च कर सकता है, फिर कैसे मैं गूगल को भगवान मानूं.
  • 40. 16:37 IST, 18 फरवरी 2010 Deepak: बहुत अच्छा लिखा है सच है गूगल सर्वशक्तिमान बन चुका है.
  • 41. 19:15 IST, 18 फरवरी 2010 JYOTI KUKREJA, NEW DELHI: सुशील झा जी का बलॉग पढ़कर काफ़ी अच्छा लगा. पढ़ने के बाद मैंने अपने नाम डालकर भी देखा. बहुत ही दिलचस्प बात है कि हज़ारों चीज़ें यहाँ देखी जा सकती है.
  • 42. 07:32 IST, 28 फरवरी 2010 Divya: कब कौन भगवान बन जाए, पता ही नहीं चलता. सुशील जी के गूगल देव को मैं प्यार से ' गूगल आंटी' बुलाती हूँ. बहुत सुंदर लेख है.

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