गुरुवार, 30 अक्तूबर 2014

साइबर क्राईम का बढ़ता दायरा





लेखक- आर. एम.पी  सिंह


प्रस्तुति-- राहुल मानव, , रविन्द्र सोनी




पृथ्वी, जल और आकाश 'तीनों क्षेत्रों में अपराधों का विस्तार हुआ है। अपराधियों की पहुँच सभी स्थानों पर है। सरकार कोई कानून बनाती है, उसके पहले उसका 'तोड़' निकाल लिया जाता है। इसीलिये पुरानी कहावत है - सौ राजा की बुध्दि एक चोर में होती है। यह भी कहा जाता है कि अपराधियों की बुध्दि अन्धकार में चलती है' 'चोर ही चाँदनी रात न भावा'। लेकिन कम्प्यूटर के विकास होने से सूचना एवं प्रौद्यागिकी का क्षेत्र भी अपराधों और अपराधियों की पहुँच से बाहर नहीं है। यह चोरी प्रकाश में होने लगी है। की- बोर्ड पर बैठा व्यक्ति हाथ में एक 'माऊस' लेकर उतना नुकसान पहुँचा सकता है जितना 'बम और तोप' भी नहीं पहुँचा सकते हैं।
साइबर क्राईम क्या है?
आज मानव जीवन कंप्यूटर से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र के अपराध क्या-क्या हो सकते हैं, इसे जानना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। कोई भी आपराधिक कृत्य जो कंप्यूटर अथवा संचार साधनों से जुड़ी है, साइबर क्राईम की श्रेणी में आता है। उदाहरण के लिये 'कंप्यूटर के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, हैकिंग, अश्लील संदेश संप्रेषण, टेलिफोन तकनीक का दुरूपयोग, राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ, वायरस का फैलाव, निजी हित में कंप्यूटर का उपयोग, कंपनी नीति के विरूध्द गतिविधि, कंप्यूटर नेटवर्क पर आक्रमण, प्रोनोग्राफी को प्रोत्साहन, आंतरिक और गुप्त सूचनाओं की चोरी, बौध्दिक संपदा की चोरी, आदि गतिविधियां व कार्यकलाप साइबर अपराध की श्रेणी में आती हैं।
डाटा और सूचना दो चीजें हैं। डाटा कंप्यूटर में भंडारित रहते हैं और सूचना डाटा के आधार पर संप्रेषित रिपोर्ट की जाती है। साइबर आपराधिक गतिविधियां डाटा से जुड़ी होती हैं और वे अपने पीछे इलेक्ट्रानिक साक्ष्य छोड़ जाती है। साइबर क्राइमों की जांच के लिये 'कंप्यूटर फारसेनिक' एक सक्षम विधा है जो विश्वस्तर पर विकसित हो रही है। इसमें आई.टी. और कंप्यूटर क्षेत्र के विशेषज्ञ लोग रहते हैं।
1. साइबर अपराधों को हम चार श्रेणी में विभक्त कर सकते हैं :-
2. कंप्यूटर नेटवर्क से संबंधित अपराध
3. वित्तीय धोखाधड़ी
4. बौध्दिक संपदा से संबंधित
5. गैर-साइबर अपराधों को विस्तारित करने में कंप्यूटर का उपयोग
1.कंप्यूटर नेटवर्क से संबंधित अपराध : इस श्रेणी में मुख्य रूप से हैकिंग, सेकिंग, ई-मेल के माध्यम से धमकी देना, अज्ञात ई-मेल, मोबाइल फोन पर अश्लील संदेश देना, वायरस, आदि शामिल हैं।
2.वित्तीय धोखाधड़ी : इस श्रेणी में डिजिटल डाटा से खिलवाड़, वित्तीय संस्थाओं जैसे कैप, कार्यालय आदि की डाटा को गलत ढंग से प्राप्त करना मुख्यत: इस अपराध में आते हैं।
3.बौध्दिक संपदा की चोरी : इस श्रेणी में पेटेंट प्रोडक्ट की चोरी, साफ्टवेयर पाइरेसी, म्यूजिक पाइरेसी आदि शामिल है।
4.गैर साइबर अपराधों में कंप्यूटर का उपयोग : इस श्रेणी में वैसे अपराध आते हैं जो मुख्य रूप से प्रोनोग्राफी से संबंधित है। इसमें कंप्यूटर के माध्यम से राष्ट्रविरोधी व समाज विरोधी कार्यकलाप भी शामिल हैं।
5.मोबाइल और टेलिफोन के माध्यम से जो वायरस या गलत संदेश प्रसारित किये जाते हें वे भी साइबर क्राईम की श्रेणी में आते हैं।
साइबर विधि
साइबर अपराधियों को पकड़ने और दंडित करने की प्रक्रिया भी तेजी से विकसित हो रही है। सभी देशां में कानून बनाये गये हैं। भारत में इनफारमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत साइबर अपराधियों के विरूध्द कार्रवाई की जा रही है। आई.टी.एक्ट 2000 की कुछ धाराओं में 2008 में संशोधन भी किया गया है ताकि अपराधियों के विरूध्द और सहजतापूर्वक कार्रवाई की जा सके। धारा 69-ए के तहत पुलिस को यह अधिकार है कि किसी भी वेबसाइट को ब्लाक कर सकती है। इंडियन कॉपीराइट एक्ट के तहत भी साइबर अपराधियों के विरूध्द कार्रवाई की जा रही है। साइबर फारसेनिक विशेषज्ञों को और भी सशक्त करने की दिशा में चिंतन भी किया जाना चाहिए क्योंकि इस क्षेत्र के अपराधी अपराध के नये-नये तरीके अपना लिये हैं। देश के कई बड़े शहर जैसे बैंगलुरू, हैदराबाद, लखनऊ, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई आदि में साइबर थाने खोले गये हैं। पुलिस को उचित प्रशिक्षण देने के उपरान्त इन थानों में पदस्थ किया जाता है।
भारत में जुलाई 2009 में दिल्ली में देश के प्रथम साइबर-रेग्युलेशन कोर्ट का शुभारम्भ किया गया जहाँ साइबर अपराधों की सुनवाई होगी। साइबर अपराधों की रोकथाम की दिशा में यह उल्लेखनीय कदम है।
साइबर क्राइम में भारत, चीन, ब्राजील, कनाड़ा आदि देशों में बेतहाशा वृध्दि हुई है। भारत में 'कॉल सेंटर' के कारण साइबर क्राईम की संख्या में वृध्दि हो रही है। सन् 2000 में साइबर क्राईम में भारत का स्थान विश्व में 14वां था। इन अनंत अपराधों पर नियंत्रण आवश्यक है। इसके लिये आवश्यक है कि साइबर लॉ का पालन कठोरता से किया जाये ओर दंड के प्रावधानों का प्रचार-प्रसार किया जाये1
साइबर क्राईम मेें कंप्यूटर का प्रयोग या तो हथियार के रूप में किया जाता है या वह टारगेट रहता है। इसे टू द कंप्यूटर और वाई द कंप्यूटर भी कहा जा सकता है। इन अपराधां के पीछे मुख्य मूल उद्देश्य है लालच, बदला और गुप्त सूचनाओं को प्राप्त करना होता है। कई बार स्टाकर्स ई-मेल संख्या प्राप्त कर तरह-तरह के प्रलोभन देकर अपना जाल फैलाते हैं और ब्लेमेल भी करते हैं। अत: अपना नाम, ई-मेल, दूरभाष संख्या हर किसी को नहीं देना चाहिए। यदि परेशानी आये तो पुलिस को सूचित करना चाहिए। कई बार 'लॉटरी' के माध्यम से भी निजी जानकारियां मांगी जाती हैं। कई बार नौकरी और वित्तीय लाभ देने का भी प्रलोभन अपराधियों द्वारा दिया जाता है। उस प्रकार के ई-मेल के रिसपाण्ड करने से बंचना चाहिए। यदि किसी के एकाऊंट में कहीं से पैसा आता है तो तत्काल सम्बन्धित वित्तीय संस्था से संपर्क करना चाहिए। प्राप्त ई-मेल अथवा अपराध का स्वरूप दर्शाते हुए ऑन लाईन अथवा आवेदन पत्र पर अपना विवरण देते हुए पुलिस को शिकायती आवेदन पत्र देना आवश्यक है, जिसमें प्राप्त संदेश का पूर्ण विवरण हो।
 
आर. एम.पी  सिंह

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