रविवार, 5 अक्तूबर 2014

वीडियो पत्रकारिता –जरूरी (उपयोगी) सलाह





प्रस्तुति-- प्रियदर्शी किशोर, धीरज पांड़ेय

वीडियो पत्रकारिता में पत्रकारिता के साथ-साथ कैमरा और एडिटिंग की बुनियादी समझ होनी चाहिए. साथ ही रिपोर्टर को कई व्यावहारिक इंतज़ामों पर ध्यान देना होता है. मगर साथ ही इस बात का ख़याल भी रहना चाहिए कि रिपोर्टर का मूल काम पत्रकारिता है.

आपके लिए ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि आपका ध्यान पत्रकारिता पर रहे – इसलिए नियमित रूप से अपने काम के सामानों की जाँच करें.
आपका काम व्यवस्थित रहने में आसानी हो इसलिए लिस्ट बनाएँ, रिमांइडर रखें, जो भी संभव हो वो करें.
ऐसी चीज़ों की लिस्ट रखें जिनके भूलने की संभावना अधिक हो सकती है, पर साथ-साथ हमेशा इन बातों की जाँच करें -
  • ट्राइपॉड
  • माइक
  • बैटरियाँ
  • लाइट
  • हेडफ़ोन
  • एक्स्ट्रा सामान
ध्यान रिपोर्ट पर रखें. रिपोर्ट में क्या और कैसे कवर करना है, पहले उसका फ़ैसला करें और उसे कैसे सबसे अच्छे तरीक़े से किया जा सकता है इसकी योजना बनाएँ. यदि संभव हो तो, दफ़्तर से निकलते समय ज़रूरी फ़ोन कर लें. जिन लोगों से इंटरव्यू करना है या मिलना है, क्या वो सब तय हो चुका है या आपको दूसरे लोगों से भी बात करनी है या दूसरी जगहों पर भी जाना है.
आपके पास समय कम हो, इसलिए आप जितना अधिक स्पष्ट रहेंगे, उतनी परेशानी कम होगी. आप नहीं चाहेंगे कि आपको कोई परेशानी हो, मिसाल के तौर पर जाने से पहले देख लें कि कहीं आपको छाते की ज़रूरत तो नहीं पड़ने वाली.
एक बार शूटिंग शुरू होने के बाद अपना ध्यान उस पर केंद्रित करें. लाइटिंग देखें, ख़ास तौर से व्हाइट बैलेंस चेक करें. ये भी सोचें कि आप रिपोर्ट कैसे शूट करने जा रहे हैं -
  • वाइड शॉट – लोकेशन को दिखाने के लिए
  • क्लोज़ अप – बातें रिकॉर्ड करने के लिए
  • ओवर द शोल्डर शॉट – इंटरव्यू के लिए
  • रिवर्स शॉट – ताकि एडिटिंग में सहायता मिले
  • क्रिएटिविटी के बारे में सोचें. आप जो रिपोर्ट करने जा रहे हैं उसे किसी शॉट या सिक्वेंस में कैसे दर्शा सकते हैं? आप कैसे तस्वीरों और आवाज़ों के माध्यम से अपनी रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं?  
सिक्वेंस की शूटिंग के बारे में और सलाह –
रिपोर्ट को पहले से स्टेज न करें. साधारण लोग कलाकार नहीं होते और ऐसा बहुत कम होता है कि वो अच्छे से अभिनय कर सकें.
किसी जगह से निकलने से पहले एहतियात के तौर पर कुछ एक्स्ट्रा शॉट ज़रूर रिकॉर्ड कर लें. साथ ही चेक कर लें कि रिकॉर्डिंग हुई है और आपके पास रिपोर्ट बनाने के लिए पर्याप्त सामग्री आ चुकी है.
और सबसे ज़रूरी बात – शूटिंग में केवल तकनीकी पक्ष पर ध्यान देने से बचें. आपको पत्रकार के रूप में सोचना है – लोग क्या कह रहे हैं इसे सुनना है और अच्छे शॉट और साउंडबाइट को नोट करना है.
एडिटिंग शुरू करने से पहले एक बार फिर सोचें कि आपकी रिपोर्ट कैसी होने जा रही है. ओपनिंग शॉट क्या है? किस इंटरव्यू और साउंडबाइट का इस्तेमाल होना है? और आप इसे कैसे ख़त्म करने जा रहे हैं?
हमेशा अपने आप से ये पूछना याद रखें कि आपके पास जो सामग्री है आप उनसे अपनी रिपोर्ट को क्या स्वरूप दे सकते हैं.

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