मंगलवार, 16 सितंबर 2014

भारत के कुछ पुराने अखबार






पत्रकारिता का इतिहास

पायनियर
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लेख का ड्राफ़्टलेख (प्रतीक्षित)
पायनियर ब्रिटिश कालीन भारत में निकलने वाला एक समाचार पत्र था। इस समाचार पत्र की शुरुआत इलाहाबाद से वर्ष 1876 ई. में की गई थी।
  • लॉर्ड विलियम बैंटिक वह प्रथम गवर्नर-जनरल था, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण अपनाया था।
  • कार्यवाहक गर्वनर-जनरल चार्ल्स मेटकॉफ़ ने भी 1823 ई. के प्रतिबन्ध को हटाकर समाचार पत्रों को मुक्ति दिलवाई। यही कारण है कि उसे 'समाचार पत्रों का मुक्तिदाता' भी कहा जाता है।
  • 1857-1858 के विद्रोह के बाद भारत में समाचार पत्रों को भाषाई आधार के बजाय प्रजातीय आधार पर विभाजित किया गया।
  • अंग्रेज़ी समाचार पत्रों एवं भारतीय समाचार पत्रों के दृष्टिकोण में अंतर होता था। जहाँ अंग्रेज़ी समाचार पत्रों को भारतीय समाचार पत्रों की अपेक्षा ढेर सारी सुविधाये उपलब्ध थीं, वही भारतीय समाचार पत्रों पर प्रतिबन्ध लगा था।
  • सभी समाचार पत्रों में 'इंग्लिश मैन' सर्वाधिक रूढ़िवादी एवं प्रतिक्रियावादी था। 'पायनियर' सरकार का पूर्ण समर्थक समाचार-पत्र था।
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हिंदी प्रदीप
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लेख का ड्राफ़्टलेख (प्रतीक्षित)
हिंदी प्रदीप एक मासिक पत्र था, जो 7 सितम्बर, 1877 को प्रथम बार प्रकाशित हुआ। यह पत्र बालकृष्ण भट्ट द्वारा निकाला गया था और इसके सम्पादक बालकृष्ण भट्ट थे और पृष्ठ संख्या 16 थी। इसमें लेखों के अतिरिक्त नाटक भी प्रकाशित होते थे।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार "'हिंदी प्रदीप' गद्य साहित्य का ढर्रा निकालने के लिए ही" निकाला गया था।
  • कई घोर संकट के बावजूद भी 'हिंदी प्रदीप' 35 वर्षों तक निरंतर निकलता रहा।
  • इस मासिक पत्र का उद्घाटन भारतेंदु जी के हाथों हुआ था।
  • हिंदी प्रदीप का शुरू होना पत्रकारिता की दृष्टि से हिंदी साहित्य के इतिहास में एक क्रांतिकारी घटना थी।
  • इस पत्र ने हिंदी पत्रकारिता को एक नई दिशा प्रदान की। इसका स्वर राष्ट्रीयता, निर्भीकता तथा तेजस्विता का था, अतः अंग्रेज़ सरकार इस पर कड़ी निगरानी रखती थी।
  • पत्र में हिंदी साहित्य और पत्रकारिता पर कई प्रकार की सामग्री रहती थी।
  • 'कविवचन सुधा' के बाद 'हिंदी प्रदीप' ही वह पत्र रह गया था, जो अपने पाठकों में राष्ट्रीय चेतना जागृत कर सका। सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं पर स्वतंत्र विचार प्रकाशन के कारण यह पत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गया और 'कविवचन सुधा' के बाद इसे ही सबसे अधिक ख्याति मिली।[1]
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बनारस अख़बार

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लेख का ड्राफ़्टलेख (प्रतीक्षित)
बनारस अख़बार का प्रकाशन जनवरी, 1845 में हुआ। यह अख़बार गोविन्द नारायण थत्ते के सम्पादन में उत्तर प्रदेश से प्रकाशित हुआ। अख़बार के संचालक राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द थे। अधिकांश लोग इस अख़बार को ही हिन्दी का पहला अख़बार मानते हैं। किंतु इसे हिन्दी भाषी क्षेत्र का प्रथम समाचार पत्र माना जा सकता है।

अरबी तथा फ़ारसी शब्दों का प्रयोग

देवनागरी लिपि के प्रयोग के बावजूद इस अख़बार में अरबी और फ़ारसी भाषा के शब्दों की बहुतायत थी, जिसे समझना साधारण जनता के लिए एक कठिन कार्य था। पंडित अंबिका प्रसाद वाजपेयी ने लिखा है कि "बनारस अख़बार की निकम्मी भाषा का उत्तरदायित्व यदि किसी एक पुरुष पर है तो वे राजा शिवप्रसाद सिंह हैं।" बनारस से ही 1850 में तारा मोहन मैत्रेय के संपादन में सुधाकरपत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। यह पत्र साप्ताहिक था तथा बंगला एवं हिन्दी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होता था। भाषा की दृष्टि से समाचार पत्र 'सुधाकर' को हिन्दी प्रदेश का पहला पत्र कहा जाना अधिक उपयुक्त है। 1853 में यह पत्र सिर्फ हिन्दी में ही छपने लगा था।

अन्य अख़बार

'बनारस अख़बार' एवं 'सुधाकर' के बाद कुछ अन्य अख़बारों का भी प्रकाशन हुआ, जिनके नाम निम्नलिखित हैं-
  • 'मार्तण्ड' (11 जून, 1846)
  • 'ज्ञान दीपक' (1846)
  • 'जगदीपक भास्कर' (1849)
  • 'सामदण्ड मार्तण्ड' (1850)
  • 'फूलों का हार' (1850)
  • 'बुद्धिप्रकाश' (1852)
  • 'मजहरुल सरुर' (1852)
  • 'ग्वालियर गजट' (1853)
  • 'मालवा अख़बार' (1894)
मुंशी सदासुखलाल के संपादन में आगरा से 'बुद्धि प्रकाश' नाम का यह पत्र पत्रकारिता के दृष्टि से ही नहीं, अपितु भाषा व शैली की दृष्टि से भी ख़ास स्थान रखता है। प्रसिद्ध समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस पत्र की भाषा की प्रशंसा करते हुए लिखा था कि "बुद्धि प्रकाश की भाषा उस समय की भाषा को देखते हुए बहुत अच्छी होती थी।"

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समाचार सुधावर्षण
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समाचार सुधावर्षण हिन्दी का प्रथम दैनिक समाचार पत्र था। इसका सम्पादन सन 1854 में श्यामसुन्दर सेन ने किया। समाचार सुधावर्षण का प्रकाशन कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) से किया गया था।
  • इस पत्र के प्रकाशन से पूर्व हिन्दी के समाचार पत्रों की संख्या बढ़ने लगी थी और जनसमूह की दृष्टि पत्रकारिता की ओर उन्मुख होने लगी।
  • इसी समय 1854 में श्यामसुन्दर सेन ने समाचार सुधावर्षण का प्रकाशन किया।
  • समाचार सुधावर्षण द्विभाषीय समाचार पत्र था, जो हिन्दी और बंगला भाषा में छपता था।
  • पत्र अपनी निर्भीकता एवं प्रगतिशीलता के कारण कई बार अंग्रेज़ सरकार का कोपभाजक बना।
  • 1855 में 'सर्वहितकारक' आगरा से और 'प्रजा हितैषी' का प्रकाशन हुआ।
  • 'पयामे आज़ादी' 1857 में निकलने वाला एकमात्र समाचार पत्र था।

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भारत जीवन

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भारत जीवन पत्र का प्रकाशन 3 मार्च, 1884 में किया गया। यह पत्र बाबू रामकृष्ण वर्मा द्वारा प्रकाशित किया गया था।
  • अपने प्रकाशन के समय यह पत्र चार पृष्ठ का हुआ करता था, किंतु बाद में यह आठ पृष्ठों में छपने लगा।
  • भारत जीवन पत्र का वार्षिक मूल्य डेढ़ रुपया था।
  • यह पत्र 30 वर्षों तक प्रकाशित होता रहा।
  • यह समाचार पत्र एक दब्बू पत्र सिद्ध हुआ था। इसने कभी भी स्वाधीनतापूर्वक साहस से लेखन कार्य नहीं किया।

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न्दोस्थान

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हिन्दोस्थान हिन्दी क्षेत्र से प्रकाशित होने वाला प्रथम सम्पूर्ण दैनिक पत्र था।
  • 1885 ई. में राजा रामपाल सिंह लन्दन से इसे 'कालाकांकर' (प्रतापगढ़) ले आए थे।
  • कालाकांकर से इस पत्र के हिन्दी और अंग्रेज़ी संस्करण प्रकाशित होने लगे थे।
  • हिन्दोस्थान पत्र उत्तर प्रदेश से स्वतंत्रता सेनानी महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी के संपादन में निकला गया था।
  • इस पत्र के सहयोगी के रूप में नवरतन प्रसिद्ध थे।

पन्ने की प्रगति अवस्था












टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

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भारत मित्र
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भारत मित्र कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) से प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र था। यह समाचार पत्र 17 मई, 1878 को प्रकाशित किया गया था
  • भारत मित्र को जिस समय कलकत्ता में प्रकाशित किया गया, उस समय वहाँ से हिन्दी का कोई भी पत्र प्रकाशित नहीं होता था।
  • यह समाचार पत्र बड़ा ही प्रसिद्ध और कर्मशील था।
  • इस समाचार पत्र के कुशल संपादन के कारण ही यह अच्छे पत्रों में गिना जाने लगा था।
  • पण्डित हरमुकुन्द शास्त्री भारत मित्र के पहले वैतनिक सम्पादक थे, जिन्हें लाहौर से बुलाया गया था।
  • यह पत्र काफ़ी लम्बे समय (37 वर्षों) तक निरंतर चलता रहा।

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पयामे आज़ादी
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पयामे आज़ादी फ़रवरी, 1857 में दिल्ली से प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र था। इस समाचार पत्र का प्रकाशन प्रसिद्ध क्रांतिकारी अजीमुल्ला ख़ाँ ने किया था।
  • इस पत्र के प्रकाशक एवं मुद्रक नवाब बहादुरशाह जफ़र के पौत्र केदार बख़्त थे।
  • पहले यह यह समाचार पत्र उर्दू में निकाला गया और बाद में हिन्दी में भी इसका प्रकाशन हुआ।
  • पयामे आज़ादी में अंग्रेज़ सरकार के विरुद्ध सामग्री होती थी, पत्र ने दिल्ली की जनता में स्वतंत्रता की अग्नि को फैलाया।
  • इसी पत्र में भारत का तत्कालीन राष्ट्रीय गीत भी छपा था, जिसकी कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित थीं-
"हम हैं इसके मालिक, हिंदुस्तान हमारा।
पाक वतन है कौम का जन्नत से भी प्यारा।।
आज शहीदों ने तुझको, अहले वतन ललकारा।
तोड़ो गुलामी की जंजीरें, बरसाओ अंगारा।।"
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