रविवार, 21 सितंबर 2014

अनुवाद : बहुत समझदारी का काम है अनुवाद


 

 

प्रस्तुति-- समिधा, राहुल राकेश

दिल्ली


हिंदी पत्रकारिता में अनुवाद की बहुत ज़रूरत पड़ती है. मगर अनुवाद समझकर किया जाना चाहिए. उस भाषा से ऐसी झलक नहीं आनी चाहिए कि वो अनुवादित भाषा है. अनुवाद की भाषा सहज होनी चाहिए.

राजेश प्रियदर्शी, डिजिटल एडिटर, बीबीसी हिन्दी
हिंदी पत्रकारिता में अनुवाद बहुत बड़े पैमाने पर होता है, इतने बड़े पैमाने पर कि पत्रकार जब अनुवाद नहीं भी करते तो भी उनकी भाषा में कई बार अनुवाद वाला परायापन होता है.
अच्छा अनुवाद क्या है—जिसमें अनुवाद वाला अटपटापन न हो, अधिक से अधिक लोगों तक बात पहुँच जाए, तथ्य और भाव न बदलें.
अच्छा अनुवाद करने के लिए दोनों भाषाओं का ज्ञान ही नहीं, दोनों भाषाओं की बारीक़ समझ ज़रूरी है, यह समझ ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ने से ही आती है.
अनुवाद कभी शब्दों का नहीं, पूरी रिपोर्ट या लेख का करना चाहिए,  मतलब ये कि अनुवाद शुरू करने से पहले पूरे ऑरिजनल टेक्स्ट को पढ़ा जाना चाहिए ताकि उसका संदर्भ साफ़ हो जाए.
पत्रकारिता के अनुवाद का मतलब होता है, पढ़ना, समझना और फिर समझाना.
गाँठ बाँधने वाली बात ये है कि बिना ठीक से समझे अंदाज़ा लगाकर किए जाने वाले अनुवाद में ही सबसे भयंकर ग़लतियाँ होती हैं.
अगर पढ़ने, सुनने वाले को यह एहसास हो कि अनुवाद की हुई चीज़ परोसी जा रही है तो यह अनुवाद करने वाले की नाकामी है.
अगर आपके वाक्य,  मुहावरे और भाव हिंदी के अनुरुप नहीं हैं तो आपके काम से अनुवाद की बू आएगी, लिखने के बाद इस नज़र से एक बार ज़रूर पढ़ें कि भाषा बनावटी या अटपटी तो नहीं लग रही.
अँगरेज़ी में एक ही वाक्य में ढेर सारी जानकारियाँ हो सकती हैं, लेकिन हिंदी में ऐसा करना ज़रूरी नहीं है, वाक्य हिंदी के अनुरूप होने चाहिए न कि अँगरेज़ी की नकल.
इसके अलावा, अँगरेज़ी के जुमलों के भाव को ठीक से समझना चाहिए, वर्ना ग़लती होने का डर रहता है, मिसाल के तौर पर-- I can't thank you enough का अनुवाद 'मैं आपको बहुत धन्यवाद नहीं दे सकता' नहीं होगा, इसका मतलब है कि मैं आपको जितना धन्यवाद दूँ, कम ही होगा. इसके लिए हिेंदी में कहा जा सकता है--मैं किन शब्दों में आपका शुक्रिया अदा करूँ?
अँगरेज़ी के आम चलन और मुहावरों को न समझने की वजह से सबसे ज़्यादा ग़लतियाँ होती हैं, ‘डेडलाइन’ का मृतरेखा और ‘स्टेट ऑफ़ द आर्ट’  का अ्नुवाद कला की स्थिति इसी वजह से होता है.
ग़लती से, कैपिटल लेटर्स को नज़रअंदाज़ करके जगहों के नामों का अनुवाद करने पर ‘पोर्ट ऑफ़ स्पेन’, स्पेन का बंदरगाह बन सकता है.
इसी तरह उच्चारण न जानने पर शिकागो को चिकागो लिखने की भूल हो सकती है.

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