गुरुवार, 18 सितंबर 2014

वेबसाइट के बाजार में 'सब कुछ' बिकता है...




माशा


माशा
हमारे मोहल्ले में हर बृहस्पतिवार को सब्जीमंडी लगती है। उसमें एक दुकानदार अपनी हरी सब्जियां बेचने के लिए आवाज लगाया करता है- लीजिए कैटरीना कैफ सा सफेद बैगन। दीपिका पादुकोण सी छरहरी भिंडियां। आइए यहां सोनाक्षी के जैसी मस्त लौकी भी है और करीना से लाल-लाल सुंदर टमाटर भी। आप उससे सब्जी खरीदें या न खरीदें लेकिन उसके ठेले की तरफ आपका ध्यान जाता ही है। अब दुकानदार किसी हीरोइन की तुलना किसी सब्जी से कैसे करता है, इसका खुलासा तो मुश्किल है, लेकिन उसके सब्जी बेचने के तरीके से बाजार के एक सच का खुलासा जरूर हो जाता है। वह सच यह है कि बाजार की सिर्फ एक ही सच्चाई है- बिक्री। बिक्री का तरीका क्या है, इसका कोई मायने नहीं।
टाइम्स ऑफ इंडिया के वेब पोर्टल ने भी अपना 'माल' बेचा है। उसने दीपिका पादुकोण की अलग-अलग किस्म की तस्वीरें पोस्ट कीं। ऊपर कमेंट लिखा- हे भगवान, दीपिका का क्लिवेज! लोगों ने दीपिका की तस्वीरें देखीं। किसी को मजा आया, किसी को तस्वीरें भोंडी, भद्दी लगीं। पोर्टल को हिट्स मिले। उसके दिन भर की 'कमाई' हो गई। दीपिका को इस गैलरी पर, इस कमेंट पर गुस्सा आया। उन्होंने सवाल किया क्या पोर्टल के लिए यह खबर है? महिला सशक्तीकरण के दावे करने वाले अखबारों को क्या यह शोभा देता है? उन्हें ट्वीट किया, मैं डंके की चोट पर कहती हूं कि मैं औरत हूं और मेरा क्लीवेज है।
दीपिका के समर्थन में बहुत से लोग आए। बड़े स्टार्स से लेकर पत्रकार तक। शाहरुख खान, करण जौहर, रितेश सिधवानी जैसे लोगों ने कहा कि महिलाओं की ऐसी तस्वीरें पोस्ट करना, किसी अखबार को शोभा नहीं देता। पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा कि दीपिका हमारे लिए स्टार हैं क्योंकि उन्होंने तुरंत रिएक्ट किया।
वैसे वेब पोर्टल्स के कामकाज को करीब से जानने वालों के लिए यह एक सामान्य बात है। मशहूर अखबारों के ऑनलाइन संस्करणों में दर्जनों उप संपादक ऐसी तस्वीरें ढूंढने में लगे रहते हैं, जिनसे उनकी साइट को ज्यादा से ज्यादा हिट्स मिलें। हीरोइन हॉलिवुड की हो तो और भी अच्छा... वे कुछ ज्यादा बिंदास होती हैं। इसके बाद रात को साइट पर पड़ने वाले हिट्स से पता चलता है कि आज कितना 'माल' बिका! वेब पोर्टल ही क्यों, न्यूज चैनलों में भी यह एक आम बात है। एक बार राखी सावंत से किए जाने वाले एक टीवी इंटरव्यू के दौरान प्रोड्यूसर ने कैमरामैन को साफ-साफ समझाया कि कैमरा उनके शरीर के किन अंगों पर फोकस करेगा। राखी की ड्रेस ऑफ शोल्डर थी।
एक जमाने में दिल्ली की लाल बत्तियों पर 'सांध्य टाइम्स' नाम का अखबार खूब बिका करता था। वह भी अपनी हेडलाइंस की वजह से। गाड़ियां लाल बत्ती पर रुकी नहीं कि हॉकर ने चिल्लाकर कहा- पढ़िए-पढ़िए। धरम के साथ रेखा भागी। लोग उत्सुकता वश अखबार खरीद लेते थे। बत्ती हरी हुई और गाड़ी चल पड़ी। इस बीच आपने अखबार खोला, धरम-रेखा वाली खबर पढ़ने के लिए। पता चला- धरम फतेहपुरी का है और रेखा चांदनी चौक की।
वेब पोर्टल्स का धंधा ऐसे ही चलता है। यहां अपना 'माल' बेचने के कोई एथिक्स नहीं। दीपिका की तस्वीरें पोर्टल के लिए प्रोडक्ट है। इस प्रोडक्ट को बेचकर उसे हिट्स कमाने हैं। दिन भर में कितने हिट्स पड़े, वेब पोर्टल की दिन भर की कमाई यही है। यह बात दीपिका को नागवार गुजरे, तो इससे किसी को क्या! अखबार ने तो दीपिका के ट्वीट पर रिट्वीट करके कहा- दीपिका यह आपके लिए कॉम्प्लिमेंट है।
दीपिका इसे कॉम्प्लिमेंट मानें या न मानें, हम इसे कॉम्प्लिमेंट नहीं मानते। शर्मनाक, भोंडी या भद्दी तस्वीरों से वेबसाइट्स भरी पड़ी हैं। इन तक पहुंचने के लिए आपको किसी पीसी की जरूरत नहीं। आपका मोबाइल ही आपका पीसी बन गया है। डेटा कार्ड खरीदिए और लुत्फ उठाइए ऐसी साइटों का। एक रुपए में एक विडियो। अंग्रेजी न आती हो, लिखना पढ़ना न आता हो, तो भी इन साइटों तक आपकी पहुंच बन सकती है।
सामने खुला बाजार है। माल उठाते जाइए- जो मन करे, जितना मन करे। सस्ते का सस्ता। दुकानदार खड़े हैं, जो अपना माल शान से दिखा सकेगा, वह मालामाल हो जाएगा। वेब के बाजार में सब कुछ बिकता है। अभी दीपिका की तस्वीरें बिक रही हैं, फिर किसी और की बिकेंगी। आपको ऐतराज है तो हो!!
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
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